बिजनौर में तटबंध की मांग को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीण, चुनाव बहिष्कार का ऐलान फिर दी और एक चेतावनी – पढ़िए
रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा
बिजनौर: गंगा किनारे तटबंध निर्माण की मांग को लेकर बिजनौर के हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। तटबंध का निर्माण नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में गंगा का पानी आसपास के इलाकों में पहुंचने से उन्हें हर साल जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है। इस बार भी सड़क से लेकर खेतों तक पानी पहुंचने के कारण ग्रामीणों और किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों ने अपनी समस्या के स्थायी समाधान की मांग करते हुए आगामी चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से तटबंध निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में ग्रामीणों ने धरने के माध्यम से अपनी आवाज जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने का निर्णय लिया है।
बरसात में बढ़ जाती है ग्रामीणों की परेशानी
हस्तिनापुर खादर क्षेत्र गंगा के किनारे स्थित होने के कारण बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या से प्रभावित रहता है। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश और गंगा के बढ़ते जलस्तर के दौरान पानी आसपास के रास्तों और खेतों तक पहुंच जाता है। इसके चलते ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन प्रभावित होता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या केवल आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर खेती पर भी पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई किसानों की मेहनत और लागत पानी में प्रभावित हो गई है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि फसल नुकसान का अभी तक उचित सर्वे नहीं कराया गया है, जिससे प्रभावित किसानों को मुआवजे की उम्मीद भी अधर में है।
सड़क से खेतों तक पहुंचा पानी
ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात के दौरान क्षेत्र की सड़कों पर भी पानी भर जाता है। इससे गांवों के बीच आवागमन मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर राहगीरों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जलभराव होने से बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और रोजमर्रा के काम से बाहर जाने वाले लोगों को विशेष परेशानी होती है।
इसके अलावा, खेतों में पानी पहुंचने के कारण कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में भी उन्हें इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
तटबंध निर्माण को लेकर ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों की मुख्य मांग गंगा किनारे तटबंध का निर्माण कराना है। उनका कहना है कि तटबंध बनने से बाढ़ और जलभराव की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। ग्रामीणों का दावा है कि इस मांग को लेकर कई बार संबंधित स्तर पर अपनी बात रखी गई, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिला।
इसी वजह से ग्रामीण अब धरने पर बैठ गए हैं। धरने के माध्यम से वे प्रशासन से तटबंध निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक उनकी आवाज इसी तरह उठती रहेगी।
चुनाव बहिष्कार का ऐलान
तटबंध निर्माण नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने आगामी चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों की ओर से क्षेत्र के विकास और समस्याओं के समाधान के वादे किए जाते हैं, लेकिन उनकी प्रमुख समस्या अब तक बनी हुई है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे चुनाव में मतदान से दूरी बनाने का निर्णय ले सकते हैं। हालांकि, चुनाव बहिष्कार का यह ऐलान ग्रामीणों की नाराजगी और लंबे समय से चली आ रही समस्या को लेकर उनके दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
फसल नुकसान के सर्वे और मुआवजे की मांग
जलभराव के कारण फसलों को हुए नुकसान को लेकर किसानों में भी चिंता है। ग्रामीणों के अनुसार, पानी के कारण कई खेत प्रभावित हुए हैं, लेकिन अभी तक नुकसान का सर्वे नहीं होने से किसानों को मुआवजे की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है।
किसानों की मांग है कि प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कराकर फसल नुकसान का आकलन कराए। इसके बाद पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खेती उनकी आय का प्रमुख आधार है और फसल खराब होने से परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।
आवागमन को लेकर भी चिंता
जलभराव के बीच सड़क से गुजरने वाले राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर पानी भरने के कारण सड़क की स्थिति स्पष्ट नहीं रहती। ऐसे में लोगों को सावधानी के साथ आवागमन करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव वाले स्थानों पर तत्काल राहत और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाए। साथ ही, दीर्घकालिक समाधान के लिए तटबंध निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।
प्रशासन से स्थायी समाधान की उम्मीद
थाना चांदपुर क्षेत्र के हस्तिनापुर खादर इलाके में ग्रामीणों के धरने के बाद अब प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि उनकी समस्याओं को केवल मौसमी जलभराव के रूप में न देखा जाए, बल्कि तटबंध निर्माण सहित स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं।
ग्रामीण सदीप कुमार कौशिक ने भी क्षेत्र की समस्याओं को लेकर अपनी बात रखी। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा किनारे रहने वाले लोगों को हर बरसात में जलभराव और फसल नुकसान जैसी परेशानियों से गुजरना पड़ता है। इसलिए तटबंध निर्माण, फसल नुकसान का सर्वे और उचित मुआवजा उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
फिलहाल, ग्रामीणों का धरना जारी है और चुनाव बहिष्कार की घोषणा के बाद यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और तटबंध निर्माण को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

