मेरठ जेल में अनोखी जन्माष्टमी: महिला बंदियों के बच्चों में दिखेगा राधा-कृष्ण का रूप, मां सजाएगी बेटी

WhatsApp Image 2026-09-04 at 1.46.14 PM

Digital UP News Desk

मेरठ: चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में इस बार जन्माष्टमी का पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ बच्चों की मासूम खुशियों को भी समर्पित नजर आएगा। जेल प्रशासन ने महिला बंदियों के साथ रह रहे छोटे बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में विशेष रूप से शामिल करने की तैयारी की है। इस दौरान जेल परिसर में श्रीकृष्ण जन्म की झांकी, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। खास बात यह है कि महिला बंदियों के साथ रह रहे चार छोटे बच्चों को राधा-कृष्ण के रूप में सजाया जाएगा।

इन बच्चों में जेल में रह रही महिला बंदी मुस्कान की नन्ही बेटी पीहू भी शामिल है। जन्माष्टमी के अवसर पर पीहू राधा का रूप धारण करेगी। इसके लिए उसकी मां मुस्कान ही उसे तैयार करेगी और उसका श्रृंगार करेगी। जेल प्रशासन की ओर से बच्ची के लिए राधा की पोशाक और जरूरी सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

मां खुद सजाएगी बेटी को राधा के रूप में

जन्माष्टमी को लेकर महिला बंदी मुस्कान ने जेल प्रशासन से अपनी बेटी के लिए राधा की पोशाक और श्रृंगार से संबंधित जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। जेल प्रशासन ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए आवश्यक व्यवस्था शुरू कर दी है।

जन्माष्टमी के दिन पीहू को राधा के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके बाद वह श्रीकृष्ण जन्म की झांकी में हिस्सा लेगी। सबसे भावुक पहलू यह होगा कि उसकी मां मुस्कान खुद अपनी बेटी को राधा के रूप में सजाएगी। जेल की परिस्थितियों के बीच मां और बेटी के लिए यह अवसर निश्चित रूप से अलग अनुभव लेकर आएगा।

वहीं, जेल प्रशासन का उद्देश्य यह भी है कि महिला बंदियों के साथ रहने वाले बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सामान्य वातावरण और खुशियों का अनुभव कराया जा सके। इसलिए इस बार जन्माष्टमी के आयोजन में बच्चों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

चार बच्चे बनेंगे राधा-कृष्ण

जेल अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में महिला बंदियों के साथ चार छोटे बच्चे रह रहे हैं। इनमें दो बच्चे और दो बच्चियां शामिल हैं। जन्माष्टमी के कार्यक्रम के दौरान दोनों बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण और दोनों बच्चियों को राधा के रूप में तैयार किया जाएगा।

इसके लिए जेल परिसर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बच्चों के लिए पोशाक, श्रृंगार और झांकी से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। कार्यक्रम में बच्चों की भागीदारी को लेकर जेल प्रशासन उत्साहित है।

दरअसल, जेल में रहने वाले छोटे बच्चों का जीवन सामान्य बच्चों की तुलना में अलग परिस्थितियों वाला होता है। ऐसे में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम उनके लिए मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम भी बन सकते हैं। इसी सोच के साथ जेल प्रशासन इस आयोजन को विशेष बनाने की तैयारी कर रहा है।

भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आकर्षण

जन्माष्टमी के अवसर पर चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में सिर्फ झांकी ही नहीं, बल्कि कई अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। श्रीकृष्ण जन्म की झांकी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगी।

महिला बंदियों के साथ-साथ अन्य बंदियों की भी कार्यक्रम में भागीदारी होगी। जेल परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से जुड़ा धार्मिक वातावरण तैयार किया जाएगा। इसके लिए सजावट और अन्य तैयारियां की जा रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान कृष्ण जन्म से जुड़े धार्मिक प्रसंगों को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी प्रदर्शित किए जाने की तैयारी है। इससे बंदियों को धार्मिक आयोजन में शामिल होने का अवसर मिलेगा और जेल परिसर में सकारात्मक माहौल बनाने में भी मदद मिलेगी।

व्रत रखने वाले बंदियों को मिलेगा निर्धारित भोजन

जन्माष्टमी के अवसर पर कुछ बंदी धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत भी रखेंगे। जेल प्रशासन ने ऐसे बंदियों के लिए भी व्यवस्था की है। जेल नियमावली के तहत व्रत रखने वाले बंदियों को निर्धारित व्रत का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

इस तरह प्रशासन की कोशिश है कि पर्व के दौरान धार्मिक आस्था से जुड़े बंदियों को नियमों के अनुसार आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। साथ ही, आयोजन में अनुशासन और जेल की निर्धारित व्यवस्था का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।

मुस्कान का मामला न्यायालय में विचाराधीन

जन्माष्टमी के इस आयोजन में शामिल होने वाली बच्ची पीहू की मां मुस्कान पिछले एक वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद है। वह ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र की रहने वाली बताई गई है। उसके खिलाफ उसके पति सौरभ की हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज है। पुलिस के अनुसार, मामले में मुस्कान पर अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति की हत्या करने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस जांच के दौरान शव को नीले ड्रम में रखने से संबंधित आरोप भी मामले में सामने आए थे। हालांकि, यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों को अदालत के अंतिम फैसले से पहले प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। मुस्कान के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।

इस मामले से अलग, जन्माष्टमी कार्यक्रम में उसकी बेटी की भागीदारी को जेल प्रशासन बच्चों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधि के तौर पर देख रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य किसी बंदी के मामले को लेकर चर्चा करना नहीं, बल्कि जेल में रह रहे बच्चों को पर्व की खुशियों से जोड़ना है।

हर साल मनाया जाता है जन्माष्टमी पर्व

वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में हर वर्ष जन्माष्टमी का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष भी आयोजन को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों को इस बार विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। चारों बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके अलावा जेल परिसर में भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और श्रीकृष्ण जन्म की झांकी भी आयोजित की जाएगी।

जेल प्रशासन का कहना है कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से बंदियों को धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर मिलता है। साथ ही, महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों को भी पर्व का हिस्सा बनने और खुशियों का अनुभव करने का अवसर मिलता है।

बच्चों की भागीदारी से खास बनेगा आयोजन

इस बार मेरठ जेल की जन्माष्टमी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि आयोजन में छोटे बच्चों को केंद्र में रखा गया है। राधा-कृष्ण के रूप में सजकर बच्चे जब झांकी में शामिल होंगे, तो यह कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण होगा।

विशेष रूप से पीहू को उसकी मां द्वारा राधा के रूप में तैयार किया जाना इस आयोजन को भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। जेल प्रशासन की ओर से बच्ची की पोशाक और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था की जा रही है, ताकि वह जन्माष्टमी के कार्यक्रम में सहजता से हिस्सा ले सके।

कुल मिलाकर, चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में इस बार जन्माष्टमी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गतिविधियों और बच्चों की मासूम भागीदारी का संगम बनने जा रही है। जेल प्रशासन जहां आयोजन को नियमों के दायरे में पूरा कराने की तैयारी कर रहा है, वहीं महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों को पर्व की खुशियों में शामिल करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

You may have missed