दर्द वाले दांत की जगह सही दांत निकालने का आरोप, नादेमऊ के निजी क्लिनिक पर उठे सवाल

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रिपोर्ट- हिमांशु तिवारी 

कन्नौज: दांत के दर्द से परेशान एक व्यक्ति इलाज कराने निजी क्लिनिक पहुंचा, लेकिन आरोप है कि इलाज के दौरान दर्द वाले दांत की जगह दूसरा सही दांत निकाल दिया गया। मामला नादेमऊ कस्बे में संचालित बताए जा रहे एक निजी क्लिनिक से जुड़ा है। पीड़ित वीर पाल सिंह निवासी किसई ने संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग करने की बात कही है।

पीड़ित का आरोप है कि उसने डॉक्टर को स्पष्ट रूप से उस दांत के बारे में बताया था, जिसमें दर्द हो रहा था। इसके बावजूद कथित तौर पर दूसरे दांत को निकाल दिया गया। पीड़ित के मुताबिक उसने दांत निकालने से पहले कई बार ऐसा न करने के लिए कहा, लेकिन उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर प्लास की मदद से दांत निकाल दिया गया।

मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में निजी क्लिनिकों में इलाज की व्यवस्था, चिकित्सकीय योग्यता और आवश्यक अनुमति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

दर्द वाले दांत के बजाय दूसरा दांत निकालने का आरोप

पीड़ित वीर पाल सिंह के अनुसार, वह दांत में लगातार हो रहे दर्द से परेशान थे। इसी समस्या के इलाज के लिए वह नादेमऊ स्थित बताए जा रहे निजी क्लिनिक में पहुंचे थे। वहां उन्होंने डॉक्टर सुबोध जाटव को अपने दर्द वाले दांत के बारे में जानकारी दी।

पीड़ित का कहना है कि इलाज के दौरान उसने चिकित्सक को यह भी बताया कि किस दांत में दर्द है। इसके बावजूद आरोप है कि जिस दांत में दर्द नहीं था, उसे निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

वीर पाल सिंह के मुताबिक उन्होंने दांत निकालने से पहले कई बार मना किया। उनका आरोप है कि इसके बावजूद कथित तौर पर उनकी बात नहीं सुनी गई और प्लास की मदद से दांत निकाल दिया गया। पीड़ित का कहना है कि बाद में उसे पता चला कि जिस दांत में दर्द था, वह अभी भी मौजूद है।

यदि पीड़ित की शिकायत सही पाई जाती है, तो यह मरीज की पहचान और उपचार प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पीड़ित ने लगाए इलाज के दौरान नशे में होने के आरोप

पीड़ित ने इलाज करने वाले डॉक्टर पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उसका कहना है कि कथित तौर पर डॉक्टर नशे की हालत में थे। हालांकि, इस आरोप की भी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

ऐसे आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। यदि किसी चिकित्सक पर इलाज के दौरान नशे में होने का आरोप लगाया जाता है, तो संबंधित विभाग द्वारा इसकी गंभीरता से जांच की जानी आवश्यक है, क्योंकि मरीज की सुरक्षा सीधे तौर पर उपचार करने वाले व्यक्ति की स्थिति और चिकित्सकीय क्षमता से जुड़ी होती है।

वहीं, पीड़ित का कहना है कि गलत दांत निकल जाने के बाद उसकी परेशानी और बढ़ गई है। अब वह चाहता है कि मामले की चिकित्सकीय जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।

पिता के बाद बेटे द्वारा क्लिनिक चलाने का दावा

पीड़ित और स्थानीय लोगों की ओर से यह भी दावा किया गया है कि नादेमऊ में यह क्लिनिक पहले राम बाबू सगर के नाम से संचालित होता था। स्थानीय जानकारी के अनुसार राम बाबू सगर के निधन के बाद उनके बेटे सुबोध द्वारा उसी स्थान पर क्लिनिक का संचालन जारी रखने की बात कही जा रही है।

हालांकि, क्लिनिक के वर्तमान संचालन, पंजीकरण, संचालक की चिकित्सकीय योग्यता और इलाज करने की वैध अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन बिंदुओं पर संबंधित स्वास्थ्य विभाग की जांच आवश्यक है।

मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्लिनिक किस श्रेणी में पंजीकृत है, वहां दंत चिकित्सा सेवाएं देने वाले व्यक्ति की शैक्षिक योग्यता क्या है और क्या संबंधित विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त है।

वैध चिकित्सकीय योग्यता की जांच की मांग

पीड़ित ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से क्लिनिक की वैधता की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही वह यह भी चाहता है कि क्लिनिक संचालक की शैक्षिक एवं चिकित्सकीय योग्यता और मरीजों को दी जा रही सेवाओं की जांच की जाए।

दंत चिकित्सा जैसी विशेषज्ञ सेवा के लिए प्रशिक्षित और अधिकृत चिकित्सक से उपचार कराना मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी निजी क्लिनिक में उपचार से पहले संबंधित चिकित्सक की योग्यता और संस्थान की वैधता की जानकारी होना जरूरी माना जाता है।

यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि कोई व्यक्ति आवश्यक योग्यता या अनुमति के बिना चिकित्सा सेवाएं दे रहा था, तो संबंधित कानून और नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, यदि क्लिनिक वैध पाया जाता है तो लगाए गए आरोपों की चिकित्सकीय प्रक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जानी चाहिए।

पुलिस चौकी पर ताला मिलने का दावा

पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद वह शिकायत लेकर नादेमऊ पुलिस चौकी पहुंचा था। उसके मुताबिक वहां ताला लगा मिला। इसके बाद उसने मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही है।

इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। पुलिस स्तर पर शिकायत दर्ज हुई है या नहीं और मामले में कोई जांच शुरू की गई है या नहीं, इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ऐसे मामलों में पीड़ित की शिकायत दर्ज कर उसकी चिकित्सकीय स्थिति का परीक्षण कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। साथ ही, यदि उपचार से संबंधित कोई पर्चा, बिल, मेडिकल रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति

इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्वास्थ्य विभाग की संभावित जांच की होगी। जांच के दौरान क्लिनिक की वैधता, संचालक की योग्यता, मरीज को दी गई चिकित्सा सेवा और दांत निकालने की प्रक्रिया से संबंधित तथ्यों की जांच की जा सकती है।

इसके अलावा, पीड़ित का चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया जाना उपयोगी होगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वास्तव में कौन-सा दांत निकाला गया और जिस दांत में दर्द की शिकायत थी, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।

यदि उपलब्ध रिकॉर्ड और चिकित्सकीय जांच से आरोपों की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं पाए जाते हैं, तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

मरीजों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण

यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निजी चिकित्सा संस्थानों में मरीजों की सुरक्षा और पारदर्शिता का मुद्दा भी जुड़ता है। मरीज जब किसी चिकित्सक के पास इलाज के लिए जाता है तो वह अपनी समस्या के सही निदान और सुरक्षित उपचार की उम्मीद करता है।

दांतों के उपचार में भी सही दांत की पहचान, एक्स-रे या आवश्यक जांच और मरीज की सहमति जैसी प्रक्रियाओं का महत्व रहता है। इसलिए किसी भी उपचार से पहले मरीज को अपनी समस्या और प्रस्तावित प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मरीजों को भी संभव हो तो उपचार से पहले अपनी मेडिकल रिपोर्ट, एक्स-रे और उपचार संबंधी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। इससे भविष्य में किसी तरह की शिकायत या चिकित्सकीय विवाद की स्थिति में रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है।

जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी

फिलहाल नादेमऊ के इस मामले में पीड़ित की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करना जरूरी है।

अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इस शिकायत का संज्ञान लेकर कब तक जांच शुरू करते हैं। साथ ही, पुलिस स्तर पर शिकायत की स्थिति और क्लिनिक की वैधता को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

निष्कर्ष

नादेमऊ में दांत के दर्द का इलाज कराने पहुंचे वीर पाल सिंह ने आरोप लगाया है कि दर्द वाले दांत की जगह सही दांत निकाल दिया गया। उन्होंने इलाज करने वाले डॉक्टर पर कथित तौर पर उनकी आपत्ति को नजरअंदाज करने और इलाज के दौरान नशे में होने का भी आरोप लगाया है।

इसके साथ ही क्लिनिक के संचालन, चिकित्सकीय योग्यता और आवश्यक अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्ष जांच इस मामले में सबसे अहम होगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

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