लखीमपुर में दोषसिद्धि की कम दर पर डीएम सख्त, कमजोर पैरवी पर जताई नाराजगी

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रिपोर्ट – शरद अवस्थी 

लखीमपुर: अभियोजन मामलों में दोषसिद्धि की कम दर और गंभीर मामलों में आरोपितों को शीघ्र जमानत मिलने की स्थिति पर जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने नाराजगी जताई है। सोमवार शाम कलेक्ट्रेट में पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग के साथ अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने लंबित मुकदमों के शीघ्र निस्तारण और दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रभावी पैरवी पर जोर दिया।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में अभियोजन की पैरवी में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल मुकदमा दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्यायालय में मामले की मजबूत पैरवी और उपलब्ध साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना भी आवश्यक है। इससे दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने के साथ पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत किया जा सकता है।

गंभीर मामलों में प्रभावी पैरवी के निर्देश

डीएम अंजनी कुमार सिंह ने न्यायालयों में विचाराधीन गंभीर मामलों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस और अभियोजन विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि मुकदमों की सुनवाई के दौरान आवश्यक साक्ष्य और गवाह समय पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हो सकें।

उन्होंने गवाहों की शत-प्रतिशत गवाही सुनिश्चित कराने पर विशेष जोर दिया। साथ ही समन की तामीली भी समयबद्ध तरीके से कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि अकारण किसी गवाह की न्यायालय से वापसी नहीं होनी चाहिए। अधिक से अधिक साक्षियों को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को समन्वित प्रयास करने होंगे।

लंबित मामलों को प्राथमिकता से निस्तारित करने पर जोर

समीक्षा बैठक के दौरान पुराने और लंबित मुकदमों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और उनकी प्रभावी पैरवी करते हुए जल्द से जल्द निस्तारण कराने का प्रयास किया जाए।

उन्होंने कहा कि मुकदमों की प्रगति की नियमित समीक्षा जरूरी है। यदि किसी मामले में सुनवाई के दौरान कोई समस्या सामने आती है तो संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय से उसका समाधान सुनिश्चित करें। इससे मुकदमों के अनावश्यक रूप से लंबित रहने की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है।

डीएम ने यह भी कहा कि अपराध के मामलों में कानून का प्रभाव तभी दिखाई देता है, जब न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मजबूत पैरवी के माध्यम से दोष सिद्ध हो और न्यायालय द्वारा कानून के अनुसार सजा सुनाई जाए।

गंभीर मामलों में जमानत का प्रभावी विरोध करने के निर्देश

अभियोजन कार्यों की समीक्षा में गंभीर मामलों में आरोपितों को शीघ्र जमानत मिलने की स्थिति का भी उल्लेख हुआ। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि गंभीर मामलों में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी पैरवी की जाए।

उन्होंने कहा कि जहां कानूनन और तथ्यों के आधार पर जमानत का विरोध किया जाना आवश्यक हो, वहां अभियोजन पक्ष को मजबूती से अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमजोर पैरवी के कारण गंभीर मामलों में आरोपितों को राहत मिलने की स्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा।

डीएम ने अभियोजन अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक महत्वपूर्ण मामले की तैयारी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बेहतर ढंग से की जाए। साथ ही केस की प्रगति पर नियमित नजर रखी जाए।

दोषमुक्त मामलों की भी होगी समीक्षा

बैठक में केवल दोषसिद्धि वाले मामलों पर ही नहीं, बल्कि दोषमुक्त हुए मामलों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन मामलों में नियमानुसार अपील का आधार बनता है, उनमें समय से अपील की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि दोषमुक्त मामलों की समीक्षा करते समय यह देखा जाना चाहिए कि मामले में अभियोजन की पैरवी किस स्तर तक हुई, गवाह न्यायालय में उपस्थित हुए या नहीं और यदि कोई गवाह पक्षद्रोही हुआ तो उसके पीछे क्या परिस्थितियां रहीं।

इस प्रकार की समीक्षा से अभियोजन की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

गवाहों की उपस्थिति पर विशेष निगरानी

डीएम ने गवाहों की न्यायालय में उपस्थिति को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मुकदमों की सुनवाई में गवाहों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ समन की तामीली में समयबद्धता जरूरी है।

उन्होंने पुलिस और अभियोजन विभाग को निर्देशित किया कि गवाहों से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी की जाए। यदि किसी मामले में गवाह उपस्थित नहीं हो पा रहा है तो संबंधित कारणों की जानकारी लेकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

साथ ही, उन्होंने कहा कि अधिकतम साक्षियों को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराने के लिए दोनों विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करना चाहिए।

एसपी ने भी मजबूत पैरवी को बताया जरूरी

बैठक में पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस की कार्रवाई के साथ अभियोजन की मजबूत पैरवी भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में साक्ष्यों और गवाहों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि न्यायालय के समक्ष मामला मजबूती से प्रस्तुत हो सके। इससे पीड़ितों में न्याय के प्रति विश्वास और अपराधियों में कानून का भय कायम करने में मदद मिल सकती है।

अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर

जिलाधिकारी ने समीक्षा के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट किया कि गंभीर मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने मुकदमों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और कमजोरियों को समय रहते दूर करने के निर्देश दिए।

बैठक में एडीएम न्यायिक ब्रजपाल सिंह, एएसपी पश्चिमी अमित कुमार राय, संयुक्त निदेशक अभियोजन, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, सहायक अभियोजन अधिकारी, प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता क्रिमिनल, विशेष लोक अभियोजक, एडीजीसी क्रिमिनल सहित संबंधित अधिकारी और शासकीय अधिवक्ता मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, लखीमपुर में अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने दोषसिद्धि की दर बढ़ाने, गंभीर मामलों में मजबूत पैरवी करने, गवाहों की शत-प्रतिशत गवाही सुनिश्चित कराने और लंबित मुकदमों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष जोर दिया। साथ ही दोषमुक्त मामलों में नियमानुसार अपील की कार्रवाई समय से करने और कमजोर पैरवी की स्थिति में जवाबदेही तय करने के संकेत भी दिए गए।

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