कानपुर देहात में साइबर ठगी के 10 हजार रुपये पुलिस ने कराए वापस, शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर हुई थी धोखाधड़ी
रिपोर्ट- विशाल मिश्रा
कानपुर देहात। साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच कानपुर देहात पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक शिकायतकर्ता के खाते से साइबर ठगी के जरिए निकाली गई पूरी धनराशि वापस कराने में सफलता हासिल की है। थाना शिवली पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने कार्रवाई करते हुए शिकायतकर्ता के 10,000 रुपये वापस उसके खाते में पहुंचाए। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद शिकायतकर्ता ने थाना शिवली पुलिस का आभार जताया।
जानकारी के अनुसार, थाना शिवली क्षेत्र के ग्राम मारग मैथा निवासी सुरेन्द्र कुमार पुत्र रामऔतार के साथ 1 जून 2026 को साइबर ठगी की घटना हुई थी। बताया गया कि साइबर ठग ने शिकायतकर्ता को फोन करके शेयर मार्केट में निवेश करने का झांसा दिया। बातचीत के दौरान ठग ने निवेश के नाम पर शिकायतकर्ता से यूपीआई के माध्यम से कुल 10,000 रुपये ट्रांसफर करा लिए।
रुपये ट्रांसफर होने के बाद शिकायतकर्ता को साइबर ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने बिना देर किए मामले की शिकायत थाना शिवली स्थित साइबर हेल्प डेस्क पर दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित लेनदेन और धनराशि को लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
साइबर हेल्प डेस्क की तत्परता से वापस मिली पूरी रकम
शिकायत मिलने के बाद थाना शिवली पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित डिजिटल लेनदेन की जानकारी जुटाई और धनराशि को वापस कराने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस की कार्रवाई के परिणामस्वरूप शिकायतकर्ता के खाते में साइबर ठगी की पूरी 10,000 रुपये की धनराशि वापस करा दी गई।
पुलिस की इस कार्रवाई से शिकायतकर्ता को आर्थिक राहत मिली। वहीं, यह कार्रवाई साइबर अपराध की शिकायत मिलने के बाद समय रहते कदम उठाने की उपयोगिता को भी सामने लाती है। साइबर ठगी के मामलों में पीड़ित जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराता है, उतनी ही जल्दी संबंधित लेनदेन की जांच और आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर ठगी से रहें सावधान
पुलिस की ओर से लोगों को लगातार साइबर अपराधों से सावधान रहने की अपील की जाती है। मौजूदा समय में साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। इनमें शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देना भी एक तरीका है।
ऐसे मामलों में ठग फोन कॉल, मैसेज या अन्य डिजिटल माध्यमों से संपर्क कर निवेश के नाम पर रुपये ट्रांसफर करने के लिए कह सकते हैं। कई बार शुरुआती बातचीत में निवेश को लाभदायक और सुरक्षित बताया जाता है। इसके बाद व्यक्ति को यूपीआई या अन्य ऑनलाइन माध्यम से धनराशि भेजने के लिए कहा जाता है।
इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर शेयर मार्केट या किसी अन्य निवेश योजना में रुपये ट्रांसफर नहीं करने चाहिए। निवेश करने से पहले संबंधित संस्था, प्लेटफॉर्म और उसकी विश्वसनीयता की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। साथ ही, किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग या यूपीआई से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने से भी बचना चाहिए।
पुलिस ने साइबर अपराध से बचने के लिए दी महत्वपूर्ण सलाह
कानपुर देहात पुलिस की ओर से साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन फ्रॉड होने की स्थिति में पीड़ित को घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति के खाते से ऑनलाइन धोखाधड़ी के माध्यम से पैसे निकल जाते हैं, तो उसे तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होगी, धनराशि को सुरक्षित कराने की संभावना उतनी ही बेहतर हो सकती है।
लोगों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और फोन पर बैंक खाते, एटीएम, यूपीआई पिन, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। किसी भी निवेश प्रस्ताव की सत्यता की पुष्टि किए बिना भुगतान करना जोखिम भरा हो सकता है।
मोबाइल फोन खोने पर CEIR पोर्टल का करें इस्तेमाल
पुलिस ने मोबाइल फोन खो जाने की स्थिति में भी लोगों को आवश्यक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी है। मोबाइल फोन गुम या चोरी होने पर नागरिक CEIR पोर्टल और संचार साथी एप्लीकेशन के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
मोबाइल फोन आज डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई और सोशल मीडिया समेत कई महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़ा रहता है। इसलिए फोन खो जाने की स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाना जरूरी है। मोबाइल गुम होने पर संबंधित सिम और डिजिटल खातों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क रहना चाहिए।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
ऑनलाइन लेनदेन करते समय कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर साइबर ठगी के जोखिम को कम किया जा सकता है। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा फोन करके निवेश, नौकरी, इनाम, लोन या किसी अन्य लाभ का लालच दिए जाने पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा, किसी भी व्यक्ति को अपना OTP, UPI PIN, ATM PIN, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी नहीं बतानी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी या किसी कंपनी का प्रतिनिधि बनकर इस प्रकार की जानकारी मांगता है, तो पहले उसकी पहचान और दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।
इसी तरह, यूपीआई के माध्यम से रुपये प्राप्त करने और रुपये भेजने की प्रक्रिया को लेकर भी सावधानी बरतना जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन डाउनलोड करना या रिमोट एक्सेस देना भी नुकसानदायक हो सकता है।
समय पर शिकायत करना सबसे महत्वपूर्ण
थाना शिवली पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क द्वारा 10,000 रुपये वापस कराने की कार्रवाई यह बताती है कि साइबर ठगी होने के बाद समय पर शिकायत दर्ज कराना कितना महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसी भी मामले में धनराशि की वापसी की गारंटी नहीं होती, लेकिन तत्काल शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए समय मिल सकता है।
पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि साइबर अपराध का शिकार होने पर घटना को छिपाने के बजाय तत्काल शिकायत करें। कई लोग शर्म या झिझक के कारण शिकायत करने में देरी कर देते हैं, जिससे कार्रवाई में कठिनाई हो सकती है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस का जताया आभार
सुरेन्द्र कुमार के मामले में थाना शिवली पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क द्वारा की गई कार्रवाई के बाद उनके खाते में पूरी 10,000 रुपये की धनराशि वापस करा दी गई। धनराशि वापस मिलने पर शिकायतकर्ता ने थाना शिवली पुलिस का धन्यवाद किया।
कानपुर देहात पुलिस का यह प्रयास साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को राहत पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। साथ ही, इस मामले से आम लोगों को यह संदेश भी मिलता है कि ऑनलाइन ठगी की स्थिति में समय गंवाए बिना साइबर हेल्पलाइन और संबंधित पुलिस विभाग से संपर्क करना चाहिए।
साइबर ठगी होने पर क्या करें?
- ऑनलाइन फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 पर कॉल करें।
- cybercrime.gov.in पर साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करें।
- बैंक या संबंधित भुगतान सेवा प्रदाता को तत्काल सूचना दें।
- किसी अनजान व्यक्ति से आगे की बातचीत में कोई गोपनीय जानकारी साझा न करें।
- मोबाइल फोन गुम होने पर CEIR पोर्टल और संचार साथी के माध्यम से शिकायत दर्ज करें।
- भविष्य में निवेश से पहले संबंधित कंपनी या प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच जरूर करें।
इस प्रकार, डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना भी उतना ही आवश्यक है। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर की गई शिकायत आर्थिक नुकसान को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

