औरैया में दीपावली पर खुलेगा 5 करोड़ का खिलमिल पार्क, कबाड़ से बनी दुनिया के 7 अजूबों की कलाकृतियां

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रिपोर्ट – अंजुमन तिवारी 

औरैया: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के लोगों को दीपावली के अवसर पर घूमने-फिरने के लिए एक नया आकर्षण मिलने जा रहा है। यमुना नदी के किनारे लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया खिलमिल पार्क आम जनता के लिए खोले जाने की तैयारी में है। करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस पार्क की खासियत यह है कि यहां दुनिया के सात अजूबों की कलाकृतियां बेकार सामग्री यानी वेस्ट मटेरियल से बनाई गई हैं। इसके अलावा, पार्क में जिले के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की झलक भी देखने को मिलेगी। इससे स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से आने वाले पर्यटकों को भी एक नया पर्यटन स्थल मिल सकता है।

औरैया में एक ही जगह दिखेंगे दुनिया के सात अजूबे

खिलमिल पार्क को खास बनाने के लिए यहां दुनिया की प्रसिद्ध इमारतों और स्मारकों की कलाकृतियां तैयार की गई हैं। अब लोगों को इनकी प्रतिकृतियां देखने के लिए अलग-अलग देशों की यात्रा करने की जरूरत नहीं होगी। पार्क में एक ही स्थान पर दुनिया के सात अजूबों की झलक देखने को मिलेगी।

इन कलाकृतियों में भारत का प्रसिद्ध ताजमहल, फ्रांस का एफिल टावर, इटली की पीसा की झुकी मीनार, मिस्र के पिरामिड, रोम का कोलोसियम, ब्राजील की क्राइस्ट द रिडीमर प्रतिमा और अमेरिका का स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी शामिल हैं।

इन प्रसिद्ध स्मारकों की प्रतिकृतियां पार्क में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं। खासकर बच्चों और युवाओं के लिए यह स्थान मनोरंजन के साथ दुनिया की प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतों के बारे में जानने का अवसर भी उपलब्ध करा सकता है।

इसके साथ ही, परिवार के साथ समय बिताने और आसपास के क्षेत्र में घूमने की योजना बनाने वाले लोगों के लिए भी यह पार्क एक नया विकल्प बन सकता है।

कबाड़ से तैयार की गईं आकर्षक कलाकृतियां

खिलमिल पार्क की सबसे अनोखी विशेषता इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री है। यहां दुनिया के सात अजूबों की कलाकृतियां वेस्ट मटेरियल यानी बेकार समझी जाने वाली सामग्री से तैयार की गई हैं। इस तरह अनुपयोगी वस्तुओं को रचनात्मक रूप देकर उन्हें आकर्षक कलाकृतियों में बदला गया है।

दरअसल, आज के समय में कचरे का उचित प्रबंधन और बेकार सामग्री का दोबारा उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में इस पार्क की अवधारणा लोगों को यह संदेश देने में मदद कर सकती है कि हर बेकार वस्तु को फेंकना जरूरी नहीं है। सही सोच और रचनात्मकता के माध्यम से उसका उपयोग सजावटी और उपयोगी संरचनाएं बनाने में भी किया जा सकता है।

इसके अलावा, पार्क में प्रदर्शित कलाकृतियां बच्चों और युवाओं को रचनात्मक सोच के लिए प्रेरित कर सकती हैं। यदि यहां आने वाले लोगों को वेस्ट मटेरियल से कलाकृतियां बनाने की प्रक्रिया और उसके महत्व के बारे में भी जानकारी दी जाती है, तो यह स्थान मनोरंजन के साथ पर्यावरण जागरूकता का माध्यम भी बन सकता है।

औरैया की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को भी मिली जगह

खिलमिल पार्क में केवल विदेशी स्मारकों की प्रतिकृतियां ही नहीं बनाई गई हैं, बल्कि औरैया जिले की स्थानीय पहचान को भी महत्व दिया गया है। पार्क में जनपद के प्रमुख धार्मिक स्थलों की कलाकृतियां तैयार की गई हैं, ताकि यहां आने वाले लोगों को क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की झलक भी मिल सके।

इनमें देवकली बाबा, माता मंगला काली, भरेह का मंदिर और संकट मोचन मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की कलाकृतियां शामिल हैं।

इस पहल से पार्क में स्थानीय विरासत और वैश्विक पहचान वाले स्मारकों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। एक ओर जहां दुनिया के प्रसिद्ध स्मारकों की प्रतिकृतियां लोगों को आकर्षित करेंगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय धार्मिक स्थलों की झलक जिले की सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने में मदद कर सकती है।

इस प्रकार, खिलमिल पार्क को केवल मनोरंजन स्थल के रूप में ही नहीं, बल्कि औरैया की पहचान और विरासत को प्रदर्शित करने वाले स्थान के रूप में भी विकसित करने की संभावना है।

करीब डेढ़ साल से चल रहा है निर्माण कार्य

नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष अनूप कुमार गुप्ता के मुताबिक, खिलमिल पार्क के निर्माण का काम करीब डेढ़ साल से चल रहा है और अब यह अंतिम चरण में पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि पार्क को दीपावली तक आम जनता के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है।

करीब 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस पार्क पर लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। यमुना नदी के किनारे स्थित होने के कारण इसका स्थान भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

हालांकि, पार्क के उद्घाटन की अंतिम तारीख, प्रवेश शुल्क, खुलने-बंद होने का समय और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल, दीपावली तक इसे आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है।

पर्यटन के क्षेत्र में औरैया को मिल सकती है नई पहचान

खिलमिल पार्क के शुरू होने से औरैया में स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। अभी तक जिले में घूमने के लिए आने वाले लोगों के सामने उपलब्ध विकल्पों के अलावा यह पार्क एक नया आकर्षण जोड़ सकता है। खास बात यह है कि यहां विश्व प्रसिद्ध स्मारकों की प्रतिकृतियों के साथ स्थानीय धार्मिक स्थलों की झलक भी मिलेगी।

यदि पार्क में साफ-सफाई, सुरक्षा, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं का उचित प्रबंधन किया जाता है, तो यह परिवारों और बच्चों के लिए उपयोगी पर्यटन स्थल बन सकता है। इसके साथ ही, आसपास के क्षेत्रों से लोगों के आने पर स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलने की संभावना रहेगी।

इसके अतिरिक्त, स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी यह पार्क शैक्षणिक भ्रमण का एक विकल्प बन सकता है। यहां विद्यार्थी दुनिया के प्रसिद्ध स्मारकों की प्रतिकृतियों को देखकर उनके बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। वहीं, वेस्ट मटेरियल से तैयार कलाकृतियां पुनः उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाने का माध्यम बन सकती हैं।

दीपावली पर पार्क खुलने का लोगों को इंतजार

औरैया में विकसित किया जा रहा खिलमिल पार्क स्थानीय लोगों के लिए एक नई सुविधा और आकर्षण के रूप में सामने आ रहा है। करीब 5 करोड़ रुपये की लागत, लगभग 15 एकड़ का क्षेत्रफल और कबाड़ से बनाई गई दुनिया के सात अजूबों की कलाकृतियां इसे खास बनाती हैं। साथ ही, जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों की प्रतिकृतियां यहां स्थानीय संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत करेंगी।

अब लोगों को इंतजार है कि दीपावली तक पार्क के द्वार कब खोले जाते हैं और यहां आम जनता के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि निर्माण के साथ-साथ रखरखाव और जनसुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाता है, तो खिलमिल पार्क भविष्य में औरैया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी जगह बना सकता है।

खिलमिल पार्क औरैया में मनोरंजन, रचनात्मकता और स्थानीय विरासत को एक साथ जोड़ने वाली परियोजना है। इसके शुरू होने से लोगों को घूमने का नया स्थान मिलने के साथ ही वेस्ट मटेरियल के रचनात्मक उपयोग का संदेश भी मिल सकता है।

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