जनगणना-2027: आधार, बैंक खाते और मोबाइल की जानकारी देनी होगी, पहली बार दर्ज होगा जातीय विवरण
रिपोर्ट – डिजिटल उप्रन्यूज़
उत्तर प्रदेश में जनगणना-2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। जनगणना के दूसरे चरण में मकान, परिवार और प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसके तहत लोगों से आधार नंबर, बैंक खाते, मोबाइल फोन, वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी सुविधाओं की उपलब्धता से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। इसके अलावा, आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जातीय विवरण भी दर्ज किया जाएगा। प्रदेश में इस व्यापक अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए 5.62 लाख से अधिक कार्मिकों की तैनाती की योजना है।
एक दिसंबर से चार जनवरी तक चलेगा सर्वेक्षण
उत्तर प्रदेश में जनगणना के दूसरे चरण के तहत एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक घर-घर जाकर जानकारी जुटाई जाएगी। इस दौरान जनगणना कर्मी प्रत्येक मकान पर पहुंचकर वहां रहने वाले परिवारों, सदस्यों की संख्या और व्यक्तिगत विवरण से संबंधित सवाल पूछेंगे। इसका उद्देश्य प्रदेश की जनसंख्या, परिवारों की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ा व्यवस्थित आंकड़ा तैयार करना है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जनगणना कर्मी घरों में रहने वाले लोगों से उनकी बुनियादी जानकारी प्राप्त करेंगे। साथ ही, परिवार के पास उपलब्ध विभिन्न पहचान पत्रों और वित्तीय सुविधाओं के बारे में भी सवाल किए जाएंगे। इन जानकारियों के आधार पर जनगणना का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
हालांकि, नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी सुविधा की उपलब्धता पूछे जाने और उससे संबंधित दस्तावेज की प्रति मांगे जाने में अंतर है। जनगणना निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा के अनुसार, लोगों को आवश्यक जानकारी ही देनी होगी। इसके लिए किसी प्रकार के कागजात या दस्तावेज की प्रतियां जमा नहीं करनी होंगी।
जनगणना में पूछे जाएंगे करीब 40 सवाल
जनगणना-2027 के दूसरे चरण में लोगों को लगभग 40 सवालों के जवाब देने होंगे। इन सवालों के माध्यम से परिवार की संरचना, मकान और व्यक्तियों से संबंधित विभिन्न जानकारियां एकत्र की जाएंगी।
प्रमुख सवालों में परिवार में कुल कितने सदस्य रहते हैं, मकान में कितने लोग निवास करते हैं और संबंधित व्यक्ति के पास कौन-कौन से पहचान पत्र या सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसी जानकारियां शामिल होंगी। इसके अतिरिक्त आधार नंबर, बैंक खाते और मोबाइल फोन से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी।
वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता के बारे में भी सवाल पूछे जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में सभी 40 सवालों की पूरी सूची नहीं दी गई है। इसलिए प्रत्येक सवाल के सटीक प्रारूप और उसके जवाब से संबंधित आधिकारिक निर्देशों को देखना महत्वपूर्ण होगा।
इस प्रक्रिया का एक प्रमुख उद्देश्य देश और प्रदेश के नागरिकों से संबंधित आंकड़ों को व्यवस्थित रूप से संकलित करना है। इसके परिणामस्वरूप जनसंख्या और परिवारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करने में मदद मिलेगी।
पहली बार दर्ज होगा जातीय विवरण
जनगणना-2027 की एक महत्वपूर्ण विशेषता जातीय विवरण का शामिल होना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जातीय विवरण दर्ज किया जाएगा। इससे जनसंख्या के सामाजिक स्वरूप से संबंधित आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया को नया आयाम मिलेगा।
जातीय विवरण दर्ज किए जाने को लेकर यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जनसंख्या से संबंधित आंकड़े सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक जरूरतों और सामाजिक परिस्थितियों के अध्ययन में उपयोगी होते हैं। हालांकि, जातीय विवरण से संबंधित सवालों का सटीक प्रारूप, उत्तर दर्ज करने की प्रक्रिया और अन्य दिशा-निर्देशों की पुष्टि आधिकारिक प्रश्नावली से की जानी चाहिए।
इसके साथ ही, जनगणना में जुटाई जाने वाली अन्य जानकारियां भी प्रदेश की आबादी और परिवारों की परिस्थितियों का व्यापक रिकॉर्ड तैयार करने में सहायक होंगी।
बेघर लोगों की भी होगी गणना
जनगणना अभियान के अंतर्गत केवल मकानों में रहने वाले परिवारों की ही गिनती नहीं की जाएगी, बल्कि बेघर लोगों को भी आंकड़ों में शामिल करने की व्यवस्था की गई है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, चार जनवरी की रात खुले में सोने वाले लोगों की गणना की जाएगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से ऐसे लोगों की संख्या का आकलन किया जा सकेगा, जिनके पास रहने के लिए नियमित आवास उपलब्ध नहीं है।
बेघर लोगों की गणना जनसंख्या से संबंधित आंकड़ों को अधिक व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे समाज के उन वर्गों की स्थिति को समझने में सहायता मिल सकती है, जो सामान्य आवासीय सर्वेक्षणों में छूट जाने की आशंका रखते हैं।
हालांकि, इस गणना के दौरान अपनाई जाने वाली विस्तृत प्रक्रिया और बेघर व्यक्तियों की श्रेणी निर्धारित करने के नियमों के लिए आधिकारिक दिशा-निर्देश ही अंतिम आधार होंगे।
पांच जनवरी 2027 होगी संदर्भ तिथि
जनगणना के लिए पांच जनवरी 2027 को संदर्भ तिथि निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है। संदर्भ तिथि जनसंख्या संबंधी आंकड़ों को एक निश्चित समय बिंदु से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसका अर्थ है कि जनगणना से जुड़े आंकड़ों को निर्धारित नियमों के अनुसार संदर्भ तिथि के आधार पर व्यवस्थित किया जाएगा। इससे विभिन्न क्षेत्रों की जनसंख्या और अन्य संबंधित विवरणों का तुलनात्मक अध्ययन करना आसान होता है।
इसलिए जनगणना कर्मियों को सही जानकारी देना और पूछे गए सवालों का स्पष्ट जवाब देना महत्वपूर्ण होगा। इससे आंकड़ों के संकलन में सटीकता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश में 5.62 लाख से अधिक कार्मिक होंगे तैनात
प्रदेश में जनगणना जैसे बड़े अभियान को पूरा करने के लिए व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था तैयार की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस काम में 5.62 लाख से अधिक कार्मिक लगाए जाएंगे। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों को कुल 1,195 चार्ज में विभाजित किया गया है।
इनमें 350 ग्रामीण और 845 शहरी चार्ज शामिल हैं। इस प्रकार, ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में ढाई गुने से अधिक चार्ज निर्धारित किए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सभी चार्ज तहसील स्तर पर बनाए गए हैं। वहीं, शहरी क्षेत्रों में नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों, कैंटोनमेंट बोर्ड, औद्योगिक टाउनशिप और नगर निगम के जोन को शामिल किया गया है।
शहरी क्षेत्र की व्यवस्था में 545 नगर पंचायत, 200 नगर पालिका परिषद, 13 कैंटोनमेंट बोर्ड, आठ औद्योगिक टाउनशिप और 79 नगर निगम जोन शामिल हैं। इन प्रशासनिक इकाइयों के माध्यम से जनगणना कार्य को अलग-अलग क्षेत्रों में व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।
नागरिकों के लिए क्या है जरूरी?
जनगणना के दौरान नागरिकों को जनगणना कर्मियों के सवालों का सही और स्पष्ट जवाब देना चाहिए। साथ ही, उन्हें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जनगणना निदेशक के अनुसार, जानकारी देने के लिए दस्तावेजों की प्रतियां जमा करना आवश्यक नहीं होगा।
किसी भी अतिरिक्त जानकारी या प्रक्रिया से संबंधित संदेह की स्थिति में संबंधित प्रशासन की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना उचित रहेगा। विशेष रूप से आधार नंबर, बैंक खाते, मोबाइल फोन और जातीय विवरण जैसे विषयों पर जानकारी देते समय आधिकारिक निर्देशों को समझना जरूरी है।
कुल मिलाकर, जनगणना-2027 उत्तर प्रदेश में जनसंख्या और परिवारों से जुड़े आंकड़ों को एकत्र करने का व्यापक अभियान होगा। घर-घर सर्वेक्षण, बेघर लोगों की गणना, जातीय विवरण और प्रशासनिक स्तर पर बड़ी संख्या में कार्मिकों की तैनाती इस प्रक्रिया के प्रमुख पहलू हैं। अब अभियान के निर्धारित कार्यक्रम और आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार आंकड़े जुटाने की तैयारी की जा रही है।

