दिल्ली-NCR में प्रदूषण से बढ़ी चिंता, मुंडका का AQI 488; 24 अक्टूबर को बारिश की संभावना

WhatsApp Image 2026-10-23 at 4.33.37 PM

रिपोर्ट – डिजिटल उप्रन्यूज़

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर खराब बना हुआ है। 23 अक्टूबर 2026 की सुबह राजधानी दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 222 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। वहीं, दिल्ली के मुंडका इलाके में AQI 488 तक पहुंचने से प्रदूषण की स्थिति और गंभीर हो गई। इसके अलावा, एम्स के आसपास वायु गुणवत्ता सूचकांक 255 दर्ज किया गया। ऐसे में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रदूषित हवा से राहत मिलने का इंतजार है।

हालांकि, मौसम में बदलाव के कारण आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत को एक नया पश्चिमी विक्षोभ प्रभावित कर सकता है। इसके प्रभाव से 24 अक्टूबर को दिल्ली-NCR समेत उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश तथा तेज हवाएं चलने की संभावना है। यदि इन मौसमी गतिविधियों का प्रभाव दिल्ली-NCR तक पहुंचता है, तो हवा में मौजूद प्रदूषक कणों के स्तर में कुछ कमी आ सकती है।

दिल्ली-NCR में प्रदूषण की स्थिति क्यों बनी हुई है?

दिल्ली-NCR में अक्टूबर के दौरान मौसम में बदलाव के साथ वायु गुणवत्ता का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी होने की आशंका रहती है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को खराब हवा के दौरान अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक के माध्यम से यह समझने में मदद मिलती है कि वातावरण में प्रदूषण का स्तर कितना है। जब AQI बढ़ता है, तो इसका अर्थ है कि हवा में मौजूद प्रदूषक स्वास्थ्य के लिए अधिक नुकसानदेह हो सकते हैं। इसलिए, दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में दर्ज किए गए AQI के आंकड़े स्थानीय स्तर पर प्रदूषण की स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मुंडका में AQI 488, एम्स के पास भी हवा खराब

23 अक्टूबर की सुबह सामने आए आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 222 दर्ज किया गया। यह खराब श्रेणी में आता है। इसके मुकाबले मुंडका में AQI 488 तक पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी में शामिल है। वहीं, एम्स के आसपास AQI 255 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि दिल्ली के सभी इलाकों में प्रदूषण का स्तर एक जैसा नहीं है। कुछ स्थानों पर हवा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती है, जबकि दूसरे इलाकों में प्रदूषण काफी अधिक दर्ज किया जा सकता है। इसलिए, केवल राजधानी के औसत AQI को देखकर किसी एक इलाके की वास्तविक वायु गुणवत्ता का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, प्रदूषण के स्तर में समय और मौसम के अनुसार बदलाव भी हो सकता है। हवा की गति, वातावरण में नमी, तापमान और स्थानीय उत्सर्जन जैसे कारक वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में लोगों के लिए अपने आसपास के क्षेत्र का ताजा AQI देखना उपयोगी रहता है।

पश्चिमी विक्षोभ से मौसम बदलने की उम्मीद

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसके प्रभाव से 24 अक्टूबर को दिल्ली-NCR सहित उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश तथा तेज हवाएं चलने की संभावना है।

पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में बदलाव होने पर तापमान, हवा की गति और वातावरण की परिस्थितियों में परिवर्तन हो सकता है। यदि दिल्ली-NCR में पर्याप्त बारिश होती है और हवा की गति बढ़ती है, तो वातावरण में मौजूद कुछ प्रदूषक कणों को हटाने में मदद मिल सकती है। परिणामस्वरूप, वायु गुणवत्ता में अस्थायी सुधार देखने को मिल सकता है।

हालांकि, बारिश से प्रदूषण में कितनी कमी आएगी, यह मौसम की वास्तविक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। केवल बारिश की संभावना के आधार पर यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि दिल्ली-NCR की हवा पूरी तरह साफ हो जाएगी। इसके लिए बारिश के बाद जारी होने वाले AQI के आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी होगा।

AQI क्या है और इसकी श्रेणियां क्या बताती हैं?

AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स एक ऐसा सूचकांक है, जिसके माध्यम से हवा में मौजूद प्रदूषण के स्तर को समझा जाता है। भारत में AQI को सामान्यतः छह श्रेणियों में बांटा जाता है। इनमें 0 से 50 तक का स्तर अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर श्रेणी में आता है।

इस वर्गीकरण के अनुसार, दिल्ली का AQI 222 खराब श्रेणी में है, जबकि मुंडका का 488 गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। वहीं, एम्स के पास 255 का स्तर भी खराब श्रेणी में आता है।

इसलिए, AQI का आंकड़ा जितना अधिक होता है, हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता उतनी ही बढ़ जाती है। हालांकि, प्रदूषण का स्वास्थ्य पर प्रभाव व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, बाहर रहने की अवधि और प्रदूषकों के संपर्क पर भी निर्भर करता है।

प्रदूषण से बचाव के लिए क्या करें?

दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर खराब रहने के दौरान लोगों को अपनी दिनचर्या में कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे पहले, बाहर व्यायाम करने या लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने से पहले स्थानीय AQI की जानकारी लें। विशेष रूप से गंभीर प्रदूषण वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से बाहर रहने से बचें।

इसके अलावा, बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाले, सही फिटिंग के N95 मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। घर के अंदर भी धूम्रपान, कचरा जलाने और अन्य ऐसे कार्यों से बचें, जिनसे हवा प्रदूषित होती है।

यदि सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या अन्य असामान्य लक्षण महसूस हों, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित होगा।

बारिश से राहत की उम्मीद, लेकिन निगरानी जरूरी

कुल मिलाकर, 23 अक्टूबर को दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। राजधानी का AQI 222, मुंडका का 488 और एम्स के पास 255 दर्ज किया जाना अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है। वहीं, 24 अक्टूबर को संभावित बारिश और तेज हवाओं से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल, मौसम विभाग के पूर्वानुमान और वायु गुणवत्ता के ताजा आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी है। बारिश होने के बाद AQI में वास्तविक बदलाव से ही पता चलेगा कि दिल्ली-NCR के लोगों को प्रदूषित हवा से कितनी राहत मिली है।