मेरठ एमएलसी चुनाव में वोटर लिस्ट पर भड़के विधायक अमित अग्रवाल, प्रशासन की कार्यशैली पर उठाए सवाल
रिपोर्ट – मनीष पाराशर
मेरठ: मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक विधान परिषद सीटों के लिए जारी मतदान के बीच मतदाता सूची में कथित खामियों का मुद्दा सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर नाराजगी जताई और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही मोहल्ले और आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले मतदाताओं के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों की सूचियों में दर्ज हैं। इसके कारण मतदाताओं को अपने निर्धारित मतदान केंद्र तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
विधायक अमित अग्रवाल के अनुसार, कुछ मतदाताओं को अपने निवास स्थान से 10 से 12 किलोमीटर दूर स्थित मतदान केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। उन्होंने इसे मतदाता सूची तैयार करने और कंप्यूटर में विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया में हुई कथित लापरवाही बताया। साथ ही, उन्होंने चुनाव संपन्न होने के बाद मामले की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब मेरठ-सहारनपुर खंड में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान जारी है। हालांकि, मतदाता सूची में बताई गई खामियों की आधिकारिक पुष्टि और प्रशासन की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मतदाता सूची में गड़बड़ी का विधायक ने लगाया आरोप
मतदान के लिए पहुंचे विधायक अमित अग्रवाल ने मतदाता सूची की स्थिति पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि एक ही क्षेत्र में रहने वाले लोगों के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज होने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विधायक ने उदाहरण देते हुए वर्धमान अकादमी और राधा गार्डन मतदान केंद्रों का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, कसेरू बक्सर, मीनाक्षीपुरम, डिफेंस कॉलोनी और राधा गार्डन जैसी आसपास की कॉलोनियों के मतदाताओं के नाम कथित तौर पर 17 अलग-अलग स्थानों पर बिखरे हुए हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि माछरा और शोभापुर तक के मतदाताओं को दूर स्थित मतदान केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। इस वजह से मतदान करने के इच्छुक लोगों को अपने नाम और मतदान केंद्र की जानकारी जुटाने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
हालांकि, इन दावों के संबंध में संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए मतदाता सूची में गड़बड़ी की वास्तविक स्थिति का आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
कंप्यूटर फीडिंग में लापरवाही का आरोप
विधायक अमित अग्रवाल ने मतदाता सूची में सामने आई कथित खामियों के लिए कंप्यूटर फीडिंग की प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के विवरण दर्ज करने में सावधानी बरती जानी चाहिए थी, ताकि एक ही क्षेत्र के लोगों को मतदान के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े।
उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उनके परिवार के छह सदस्यों ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म भरे थे, लेकिन सूची में केवल तीन से चार लोगों के नाम ही दिखाई दिए।
यह शिकायत मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया और आवेदन के बाद नाम दर्ज होने की स्थिति को लेकर सवाल खड़े करती है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं होने के पीछे आवेदन की स्थिति, पात्रता, दस्तावेजों की जांच या अन्य प्रशासनिक कारण भी हो सकते हैं। इसलिए संबंधित आवेदन और आधिकारिक मतदाता सूची की जांच से ही वास्तविक वजह स्पष्ट होगी।
चुनाव के बाद कार्रवाई की मांग
विधायक ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की।
उनका कहना है कि मतदाता सूची में त्रुटियों के कारण लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि मतदाताओं के नाम, पते और मतदान केंद्र से संबंधित विवरण सही तरीके से दर्ज किए जाएं।
इसके अलावा, यदि किसी मतदाता को अपने नाम या मतदान केंद्र को लेकर समस्या होती है, तो संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को शिकायत की जांच कर उचित जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। इससे मतदाताओं की परेशानी कम करने और चुनावी व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
शिक्षक और स्नातक सीटों के लिए जारी है मतदान
मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक विधान परिषद सीटों के लिए मतदान के दौरान मतदाता सूची का मुद्दा चर्चा में आया है। इन सीटों के चुनाव में पात्र शिक्षक और स्नातक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।
इस चुनाव की प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता विशेष महत्व रखती है, क्योंकि मतदान केंद्र की सही जानकारी मिलने से मतदाताओं को वोट डालने में सुविधा होती है। वहीं, नाम या मतदान केंद्र से जुड़ी त्रुटियां सामने आने पर मतदाताओं को अतिरिक्त परेशानी हो सकती है।
ऐसे में निर्वाचन अधिकारियों के लिए जरूरी है कि वे शिकायतों की जांच करें और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करें। साथ ही, भविष्य में होने वाले चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर भी ध्यान दिया जाए।
भाजपा विधायक के सवालों से प्रशासनिक व्यवस्था पर चर्चा
इस मामले में राजनीतिक चर्चा इसलिए भी तेज हुई है, क्योंकि मतदाता सूची पर सवाल उठाने वाले अमित अग्रवाल सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक हैं। उन्होंने अपनी ही सरकार के अधीन जिला प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है।
हालांकि, विधायक के बयान के आधार पर इसे प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड, शिकायतों और निर्वाचन अधिकारियों के पक्ष की जांच आवश्यक है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विधायक ने मतदाता सूची में कथित खामियों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कुल मिलाकर, मेरठ-सहारनपुर खंड एमएलसी चुनाव के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा सामने आने से मतदान व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। विधायक अमित अग्रवाल ने दूर-दूर मतदान केंद्र आवंटित होने और परिवार के कुछ सदस्यों के नाम सूची में नहीं मिलने का दावा किया है। अब मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया और आधिकारिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खामियां किन कारणों से हुईं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

