मेरठ में 16,726 निर्माणों पर सीलिंग का खतरा, व्यापारियों का ऐलान- 15 तारीख को होगा महा-आंदोलन
रिपोर्ट- मनीष पराशर
मेरठ, उत्तर प्रदेश। मेरठ में अवैध निर्माणों के खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के जोन-ए में चिह्नित 16,726 निर्माणों को लेकर कार्रवाई की आशंका के बीच शहर में विरोध तेज हो गया है। सेंट्रल मार्केट में हुई कार्रवाई के बाद व्यापारियों ने अपने घरों और दुकानों को लेकर चिंता जताई है। इसी क्रम में व्यापारियों ने अब 15 तारीख को बड़े जन-आंदोलन का ऐलान किया है।
व्यापारी नेताओं का कहना है कि इस मामले में सरकार और प्रशासन को व्यापारियों तथा स्थानीय निवासियों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आयोजित संवाद बैठक में अपेक्षित समाधान नहीं निकलने से व्यापारियों की नाराजगी और बढ़ गई है।
16,726 निर्माणों को लेकर बढ़ी चिंता
मेरठ में निर्माणों की सीलिंग और ध्वस्तीकरण का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। सेंट्रल मार्केट में हुई कार्रवाई के बाद इस विषय को लेकर शहर के अन्य इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों को आशंका है कि यदि कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो उनकी दुकानों और आवासीय संपत्तियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
इसी बीच, जोन-ए में 16,726 निर्माणों को चिह्नित किए जाने की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। हालांकि, इन निर्माणों की स्थिति, संबंधित संपत्तियों की श्रेणी और प्रस्तावित कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी स्पष्ट होना आवश्यक है। ऐसे में व्यापारियों की मांग है कि प्रशासन सभी संबंधित निर्माणों की स्पष्ट सूची सार्वजनिक करे और प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।
अधिकारियों के साथ बैठक में नहीं निकला समाधान
आंदोलन को टालने और विवाद का समाधान तलाशने के उद्देश्य से प्रशासनिक अधिकारियों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों के बीच संवाद बैठक आयोजित की गई थी। उम्मीद थी कि इस बैठक के माध्यम से सीलिंग की कार्रवाई से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा होगी और प्रभावित लोगों को राहत देने का कोई रास्ता निकलेगा।
हालांकि, व्यापारियों के अनुसार बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति और स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे नहीं बढ़ सकी। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि अपर जिलाधिकारी (एडीएम) और मुख्य अभियंताओं जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के स्थान पर छोटे अधिकारियों तथा निचले स्तर के इंजीनियरों को भेजा गया।
व्यापारियों का यह भी कहना है कि बैठक में चिह्नित निर्माणों की कोई स्पष्ट और ठोस सूची उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे लोगों के मन में सवाल बने हुए हैं कि किन संपत्तियों पर कार्रवाई प्रस्तावित है और प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
रविंद्र गुर्जर ने प्रशासन के रवैये पर जताई नाराजगी
व्यापारी नेता रविंद्र गुर्जर ने बैठक के बाद अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मेरठ के व्यापारियों और आम नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जब लोगों के घरों और दुकानों पर सीलिंग की आशंका बनी हुई है, तब अधिकारियों को स्पष्ट जानकारी के साथ संवाद करना चाहिए।
रविंद्र गुर्जर ने आरोप लगाया कि पहले व्यापारियों को आश्वासन दिए गए, लेकिन बैठक के समय वरिष्ठ अधिकारियों के नहीं पहुंचने से लोगों में असंतोष बढ़ा। उन्होंने कहा कि मेरठ की जनता की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारियों का उद्देश्य अपनी दुकानों और घरों को संभावित कार्रवाई से बचाने के लिए समाधान प्राप्त करना है। इसलिए सरकार और प्रशासन को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हुए प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
24 तारीख के बजाय अब 15 तारीख को होगा आंदोलन
रविंद्र गुर्जर के मुताबिक, पहले आंदोलन की तारीख 24 निर्धारित की गई थी, लेकिन अब इसे बदलकर 15 तारीख कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन में मेरठ के चारों जोन के व्यापारी और स्थानीय नागरिक शामिल होंगे।
व्यापारी नेता ने कहा कि यदि सरकार या प्रशासन निर्धारित तारीख से पहले कोई व्यावहारिक समाधान निकाल लेता है, तो उसका स्वागत किया जाएगा। हालांकि, समाधान नहीं निकलने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी भी दी गई है।
उन्होंने कहा कि व्यापारी चाहते हैं कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए और किसी भी कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों की स्थिति को समझा जाए। व्यापारियों का दावा है कि इस मुद्दे पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से उन्हें समर्थन मिल रहा है।
सीलिंग की कार्रवाई रोकने और अध्यादेश लाने की मांग
व्यापारी नेता ने सरकार से मेरठ के प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए अध्यादेश लाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले में ऐसा कानूनी और प्रशासनिक समाधान तलाशना चाहिए, जिससे व्यापारियों तथा आम नागरिकों को अनिश्चितता से राहत मिल सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन के दौरान यदि किसी घर या दुकान पर सीलिंग की कार्रवाई की जाती है, तो विरोध और तेज हो सकता है। हालांकि, किसी भी विरोध प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रखना आवश्यक है। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच संवाद बना रहना भी इस स्थिति में महत्वपूर्ण होगा।
व्यापारियों को समाधान का इंतजार
मेरठ में सीलिंग का मुद्दा अब केवल निर्माणों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे व्यापार, आवास और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ओर प्रशासन को न्यायालय के आदेशों और लागू नियमों के अनुरूप कार्रवाई करनी है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोगों की शिकायतों और समस्याओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
ऐसे में सभी पक्षों के बीच पारदर्शी बातचीत, चिह्नित संपत्तियों की स्पष्ट जानकारी और कानूनी स्थिति की उचित व्याख्या विवाद को कम करने में मदद कर सकती है। फिलहाल व्यापारियों ने 15 तारीख को महा-आंदोलन की घोषणा की है और सरकार से राहत की मांग की है। अब देखना होगा कि आंदोलन की निर्धारित तारीख से पहले प्रशासन और सरकार इस मामले में कोई समाधान निकाल पाते हैं या नहीं।

