मेरठ: अंतिम युद्ध से पहले महादेव की शरण में पहुंचे रावण, नरेंद्र सैनी ने निभाया लंकेश का जीवंत किरदार
रिपोर्ट – मनीष पराशर
मेरठ: दशहरा पर्व के अवसर पर मेरठ के शारदा रोड स्थित प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव मंदिर में उस समय भक्ति और उत्सुकता का माहौल देखने को मिला, जब रामलीला में रावण की भूमिका निभा रहे कलाकार नरेंद्र सैनी अपनी सेना और दल-बल के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पहुंचे। राम-रावण के अंतिम युद्ध से पहले लंकेश के रूप में मंदिर पहुंचे नरेंद्र सैनी ने अपने आराध्य भगवान भोलेनाथ के समक्ष शीश नवाकर विजय और शक्ति का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान उनके रौबदार अंदाज और प्रभावशाली संवादों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
अंतिम युद्ध से पहले महादेव की शरण में रावण
मेरठ की प्रसिद्ध रामलीला में दशहरे का दिन विशेष महत्व रखता है। राम और रावण के बीच होने वाले अंतिम युद्ध से पहले रावण के रूप में सजे कलाकार नरेंद्र सैनी का नीलकंठ महादेव मंदिर पहुंचना रामलीला की परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ा आकर्षक दृश्य बना। मंदिर परिसर में उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और युद्ध में विजय प्राप्त करने की कामना की।
इस दौरान रावण के वेश में नरेंद्र सैनी ने अपनी बुलंद आवाज और दमदार संवाद अदायगी से लंकेश के चरित्र को जीवंत कर दिया। उनके अभिनय में रावण का आत्मविश्वास, क्रोध और अपने परिवार के सदस्यों को खोने का दुख स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वहीं, मंदिर में मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य रामलीला के अंतिम युद्ध से पहले की कथा को सजीव अनुभव करने जैसा रहा।
‘भाई कुंभकर्ण और बेटा मेघनाद मारा गया, अब बदला लेना है’
भगवान शिव की पूजा-अर्चना के बाद पत्रकारों से बातचीत में रावण की भूमिका निभा रहे नरेंद्र सैनी ने अपने किरदार के भावों को संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने रावण के दृष्टिकोण को सामने रखते हुए कहा कि आज अंतिम युद्ध का दिन है और वह अपने आराध्य महादेव की शरण में शक्ति प्राप्त करने आए हैं।
नरेंद्र सैनी ने रावण के संवादों को दोहराते हुए कहा कि उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद की मृत्यु हो चुकी है। वहीं, भाई विभीषण ने भी उसका साथ छोड़कर शत्रु पक्ष का साथ दिया है। ऐसे में रावण के मन में प्रतिशोध की भावना प्रबल हो गई है और वह अंतिम युद्ध के लिए स्वयं को तैयार कर रहा है।
उन्होंने अपने अभिनय के माध्यम से यह दर्शाने का प्रयास किया कि रावण का चरित्र केवल अहंकार और शक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि रामायण की कथा में उसके भीतर परिवार के प्रति लगाव, आहत स्वाभिमान और अपने निर्णयों के परिणामों से जुड़ी भावनाएं भी दिखाई देती हैं।
लक्ष्मण से रावण तक का सफर, अभिनय से बनाई पहचान
नरेंद्र सैनी मूल रूप से दिल्ली के शालीमार बाग के निवासी हैं। उन्हें बचपन से ही रंगमंच और थिएटर के प्रति गहरा लगाव रहा है। अभिनय के इसी शौक ने उन्हें रामलीला के मंच तक पहुंचाया। अपने शुरुआती दिनों में वह लक्ष्मण की भूमिका निभाया करते थे। हालांकि, कुछ समय तक रामलीला से दूरी बनाए रखने के बाद उन्होंने वर्ष 2024 में दोबारा मंच पर वापसी की।
इस बार उन्होंने रावण का किरदार निभाना शुरू किया। उनकी दमदार आवाज, संवादों पर पकड़, प्रभावशाली हाव-भाव और रौबदार प्रस्तुति ने दर्शकों के बीच उनकी अलग पहचान बनाई। धीरे-धीरे उनके अभिनय को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ने लगी।
इसके अतिरिक्त, नरेंद्र सैनी ने अभिनय की दुनिया में रामलीला से आगे भी काम किया है। वह ‘बिहार डायरी’, ‘लाइफ हिल गई’ और ‘काठमांडू कनेक्शन 2’ जैसे हिंदी मनोरंजन प्रोजेक्ट्स में भी नजर आ चुके हैं। इस तरह उनका सफर पारंपरिक मंचीय अभिनय से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक फैला हुआ है।
‘हर इंसान के भीतर राम और रावण’
आज के समाज और युवाओं के विषय में पूछे जाने पर नरेंद्र सैनी ने रामायण के पात्रों को वर्तमान जीवन से जोड़कर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हर इंसान के भीतर राम भी हैं और रावण भी। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह अपने भीतर किन गुणों को विकसित करता है।
उनके मुताबिक, जब तक इंसान के भीतर छल-कपट, लालच और अहंकार जैसी प्रवृत्तियां बनी रहेंगी, तब तक रावण के प्रतीकात्मक अंत का उद्देश्य पूरी तरह सार्थक नहीं हो पाएगा। दशहरा केवल एक पौराणिक प्रसंग का स्मरण नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन करने का अवसर भी है कि व्यक्ति अपने व्यवहार में किन बुराइयों को समाप्त कर सकता है।
उन्होंने युवाओं और नई पीढ़ी को लेकर भी अपनी बात रखी। नरेंद्र सैनी ने कहा कि परिवारों में बढ़ती दूरियों को लेकर केवल युवाओं को दोषी ठहराना उचित नहीं है। उनके अनुसार, परिवारों में बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों के बीच संवाद, आपसी सम्मान और प्रेम बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने पारिवारिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि पीढ़ियों के बीच अंतर को विवाद का कारण बनाने के बजाय आपसी समझ विकसित करने की जरूरत है।
रामलीला के अंतिम युद्ध के लिए रवाना हुआ रावण का दल
नीलकंठ महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद रावण की भूमिका निभा रहे नरेंद्र सैनी अपनी टीम के साथ रामलीला मैदान में होने वाले अंतिम युद्ध के लिए रवाना हो गए। दशहरा पर्व पर राम और रावण के बीच होने वाला यह प्रसंग रामलीला का प्रमुख आकर्षण माना जाता है। इसके साथ ही रावण दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश भी दिया जाता है।
अंतिम युद्ध के परिणाम को लेकर पूछे गए सवाल पर नरेंद्र सैनी ने मुस्कुराते हुए कहा कि आज अंतिम युद्ध है और इसका परिणाम क्या होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा। उनका यह जवाब रावण के किरदार की नाटकीयता को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, मेरठ के नीलकंठ महादेव मंदिर में रावण के रूप में नरेंद्र सैनी की पूजा-अर्चना ने दशहरा पर्व के माहौल को खास बना दिया। वहीं, उनके संवादों ने रामलीला की कथा के साथ-साथ अहंकार, छल-कपट, पारिवारिक संबंधों और आत्ममंथन जैसे सामाजिक विषयों पर भी ध्यान आकर्षित किया।

