विजयादशमी पर कानपुर के खत्री हॉल में शस्त्र पूजन, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने दिया न्याय और धर्म रक्षा का संदेश

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रिपोर्टर – हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर नगर: विजयादशमी यानी दशहरा के पावन अवसर पर कानपुर में सनातन संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों की झलक देखने को मिली। शहर के बिरहाना रोड स्थित खत्री हॉल में खत्री समाज की ओर से प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार भव्य शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया और समाज के लोगों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए धर्म, न्याय, साहस और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।

कार्यक्रम में खत्री समाज के पदाधिकारियों, गणमान्य नागरिकों और स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शस्त्र पूजन में सहभागिता की। इसके साथ ही आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपराओं और सामाजिक एकजुटता को बनाए रखने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा का निर्वहन

विजयादशमी भारतीय संस्कृति के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और अहंकार पर मर्यादा की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए दशहरा केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, न्याय और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देने वाला पर्व भी है।

इसी सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए बिरहाना रोड स्थित खत्री हॉल में शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। खत्री समाज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में परंपरा के अनुसार शस्त्रों की पूजा-अर्चना की गई। आयोजन ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति में शस्त्र पूजन का उद्देश्य शक्ति का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि शक्ति के सदुपयोग और समाज की रक्षा के संकल्प को मजबूत करना है।

इसके अलावा, ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक मूल्यों से परिचित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सतीश महाना ने दिया न्याय और धर्म की रक्षा का संदेश

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मीडिया से बातचीत के दौरान विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों और समाज के लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस पर्व को भगवान श्रीराम और उनकी सेना की विजय से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि दशहरा अहंकार, अन्याय और सामाजिक बुराइयों के अंत का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्य, सत्य और न्याय के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। वहीं, विजयादशमी का पर्व समाज को यह याद दिलाता है कि अहंकार और अन्याय चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।

विधानसभा अध्यक्ष ने नारी के सम्मान को भी भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं का अनादर करने वाली प्रवृत्तियों का अंत होना चाहिए। उनके संदेश का मूल भाव यह रहा कि समाज में सम्मान, समानता, नैतिकता और न्याय की स्थापना के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि त्योहारों का वास्तविक महत्व तभी है, जब उनसे मिलने वाली सीख को दैनिक जीवन में अपनाया जाए। इस प्रकार विजयादशमी लोगों को अपनी कमियों पर विजय पाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देती है।

शास्त्र और शस्त्र दोनों का है विशेष महत्व

सतीश महाना ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति में शास्त्र और शस्त्र के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शास्त्र ज्ञान, विवेक और सही मार्गदर्शन का प्रतीक हैं, जबकि शस्त्र का संबंध समाज की सुरक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति से है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि शस्त्रों का उपयोग हमेशा न्याय की रक्षा और अत्याचार को रोकने के उद्देश्य से होना चाहिए। शक्ति का इस्तेमाल किसी के साथ अन्याय करने या दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार, शास्त्र व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की दृष्टि प्रदान करते हैं। वहीं, शस्त्र समाज की सुरक्षा के प्रति उत्तरदायित्व का प्रतीक हैं। इसलिए दोनों का महत्व तभी सार्थक होता है, जब ज्ञान के साथ विवेक और शक्ति के साथ मर्यादा बनी रहे।

विजयादशमी के अवसर पर दिया गया यह संदेश वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक है। समाज में शांति, सद्भाव और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि लोग अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझें। साथ ही, किसी भी परिस्थिति में न्याय और नैतिकता के मूल्यों से समझौता न किया जाए।

खत्री समाज के लोगों ने उत्साह के साथ लिया भाग

खत्री हॉल में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में समाज के अनेक गणमान्य लोग, पदाधिकारी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। आयोजन के दौरान पारंपरिक वातावरण देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन किया और विजयादशमी की शुभकामनाएं एक-दूसरे के साथ साझा कीं।

कार्यक्रम ने समाज में एकता, विनम्रता, साहस और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने का संदेश दिया। इसके साथ ही आयोजन के माध्यम से यह विचार भी सामने आया कि किसी भी समाज की मजबूती उसकी परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ उसके सदस्यों के नैतिक आचरण और आपसी सहयोग पर निर्भर करती है।

ऐसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम लोगों को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे आपसी संवाद बढ़ता है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने का मौका मिलता है।

परंपरा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संकल्प

कानपुर के बिरहाना रोड स्थित खत्री हॉल में आयोजित यह कार्यक्रम विजयादशमी की धार्मिक मान्यताओं और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को समर्पित रहा। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की उपस्थिति और उनके संबोधन ने आयोजन को विशेष महत्व दिया।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शस्त्र पूजन केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि शक्ति, विवेक और जिम्मेदारी के संतुलन को समझने का अवसर भी है। शास्त्र से प्राप्त ज्ञान और शस्त्र से जुड़ी सुरक्षा की भावना का उद्देश्य समाज में न्याय और मर्यादा को मजबूत करना होना चाहिए।

अंततः विजयादशमी का पर्व यही प्रेरणा देता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, सदाचार और न्याय को महत्व दे। साथ ही, समाज में महिलाओं के सम्मान, आपसी सद्भाव और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बने। यही इस पर्व की भावना और परंपराओं का वास्तविक संदेश है।

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