मेरठ में दुर्गा पूजा महोत्सव की धूम, महा अष्टमी पर 56वें आयोजन में भव्य संधि पूजा
रिपोर्ट- मनीष पराशर
मेरठ। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मेरठ में दुर्गा पूजा महोत्सव की रौनक देखने को मिल रही है। शहर के मुकुंदी देवी धर्मशाला में बंगाली समिति की ओर से आयोजित 56वें श्री श्री दुर्गा पूजा महोत्सव में महा अष्टमी के अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां दुर्गा के दर्शन, पुष्पांजलि, चंडी पाठ और शंखनाद के बीच पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। सुबह से ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में धर्मशाला पहुंचे और मां दुर्गा के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण महा अष्टमी पर संपन्न हुई पारंपरिक संधि पूजा रही। इस विशेष अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की आराधना की। वहीं, देर रात आयोजित माता की चौकी, पारंपरिक खेलों और बंगाली नृत्य प्रतियोगिताओं ने कार्यक्रम की रौनक को और बढ़ा दिया। इस आयोजन में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
संधि पूजा में 108 दीपों से जगमगाया मुकुंदी देवी धर्मशाला परिसर
महा अष्टमी के दौरान आयोजित संधि पूजा दुर्गा पूजा महोत्सव का प्रमुख धार्मिक आकर्षण रही। धार्मिक परंपरा के अनुसार, संधि पूजा अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट के संधिकाल में की जाती है। मान्यता है कि इसी विशेष समय में मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण कर चंड और मुंड नामक असुरों का वध किया था। इसी मान्यता के आधार पर संधि पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
मुकुंदी देवी धर्मशाला में इस अवसर पर 108 दीप प्रज्वलित किए गए। दीपों की रोशनी और वैदिक मंत्रोच्चार ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। इसके साथ ही चंडी पाठ और शंखनाद की गूंज से परिसर में भक्ति का माहौल बन गया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की आराधना करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इसके अलावा, पूजा में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। महोत्सव के दौरान धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की गई। इस तरह संधि पूजा ने श्रद्धालुओं को बंगाली दुर्गा पूजा की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
माता की चौकी में भजनों पर झूमे श्रद्धालु
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी विशेष आयोजन किया गया। देर रात आयोजित माता की चौकी में मां दुर्गा की महिमा का गुणगान किया गया। भक्ति गीतों और भजनों की प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालु माता की भक्ति में लीन नजर आए। कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर भक्ति और उल्लास से भर गया।
वहीं, बंगाली समिति की ओर से आयोजित पारंपरिक खेलों और बंगाली नृत्य प्रतियोगिताओं ने महोत्सव को सांस्कृतिक रूप से और समृद्ध बनाया। इन गतिविधियों में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपनी कला और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को बंगाली संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं और सामूहिक उत्सव की परंपरा से परिचित होने का अवसर मिला।
दरअसल, दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेलजोल, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से परिवारों को एक साथ आने और अपनी परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
56 वर्षों से जारी है बंगाली दुर्गा पूजा की परंपरा
बंगाली समिति के अध्यक्ष मनोज मंडल ने महोत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन समाज की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और आपसी सौहार्द का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि मुकुंदी देवी धर्मशाला में दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन पिछले 56 वर्षों से किया जा रहा है। इस लंबी परंपरा को बनाए रखने और हर वर्ष आयोजन को भव्य स्वरूप देने में बंगाली परिवारों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
मनोज मंडल के अनुसार, महोत्सव में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक खेलों और बंगाली नृत्य को भी विशेष स्थान दिया गया है। इन आयोजनों में बच्चे और बड़े समान उत्साह के साथ हिस्सा लेते हैं। इससे समाज के लोगों को एक-दूसरे के करीब आने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि समिति का प्रयास है कि दुर्गा पूजा की पारंपरिक गरिमा बनी रहे और आने वाली पीढ़ियां भी इन सांस्कृतिक मूल्यों को समझें। सामूहिक सहयोग से आयोजित यह महोत्सव हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है।
भक्ति और संस्कृति के संगम से उत्सवमय हुआ मेरठ
मुकुंदी देवी धर्मशाला में आयोजित 56वां श्री श्री दुर्गा पूजा महोत्सव मेरठ की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में विशेष स्थान रखता है। महा अष्टमी पर संधि पूजा, 108 दीपों का प्रज्वलन, चंडी पाठ और शंखनाद ने आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। वहीं, माता की चौकी और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं ने इसमें उत्सव का रंग भर दिया।
कुल मिलाकर, यह महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश दे रहा है। बंगाली समिति और स्थानीय परिवारों के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम मेरठ में दुर्गा पूजा की वर्षों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

