चूरू में धूमधाम से हुआ संकल्पित रजत शिला पूजन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण का लिया संकल्प

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

चूरू, राजस्थान। राजस्थान के चूरू में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ रजत शिला पूजन कार्यक्रम धूमधाम से आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्थानीय सनातन धर्मावलंबियों ने ढोल-नगाड़ों, डीजे और पुष्पवर्षा के साथ रजत शिला का स्वागत किया। कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखने को मिला। आयोजकों ने इस पूजन कार्यक्रम को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के संकल्प से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन बताया।

शिकागो से आए श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अंतरराष्ट्रीय प्रभारी प्रशांत त्यागी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में कैलिफोर्निया से जुड़े आचार्य बालमुकुंद शास्त्री ने पूजन की व्यवस्था संभाली। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित संतों, धार्मिक प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने रजत शिला का विधि-विधान से पूजन किया तथा श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित अपने धार्मिक संकल्प को दोहराया।

चूरू पहुंचने पर रजत शिला का भव्य स्वागत

रजत शिला के चूरू पहुंचने पर स्थानीय सनातन हिंदुओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, डीजे और पुष्पवर्षा के बीच श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में भाग लिया। इस दौरान वातावरण भक्तिमय नजर आया और लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं का कहना था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से उनका गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। इसी भावना के साथ रजत शिला पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं को जोड़ना और मंदिर निर्माण के संकल्प के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

अयोध्या की तरह मथुरा में भी मंदिर निर्माण की मांग

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अंतरराष्ट्रीय प्रभारी प्रशांत त्यागी ने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर स्थापित हुआ है, उसी प्रकार मथुरा में भी भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर से संबंधित धार्मिक आकांक्षाओं को पूरा किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों की इच्छा है कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बने और वहां श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर सकें। उन्होंने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद के न्यायिक समाधान की अपेक्षा जताई।

प्रशांत त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रद्धालु चाहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाया जाए और जन्मभूमि परिसर में धार्मिक परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना हो। उन्होंने इस विषय को श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा बताते हुए न्यायालय के माध्यम से समाधान की उम्मीद व्यक्त की।

हालांकि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित विवाद न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। इसलिए इससे जुड़े दावों, अधिकारों और अंतिम निर्णय का निर्धारण संबंधित न्यायालयों की कार्यवाही के अनुसार ही होगा।

रजत शिला पूजन को लेकर आचार्य बालमुकुंद शास्त्री ने जताई प्रसन्नता

कार्यक्रम की व्यवस्थाएं संभाल रहे आचार्य बालमुकुंद शास्त्री ने कहा कि रजत शिला का पूजन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु इस आयोजन को भविष्य में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के संकल्प से जोड़कर देख रहे हैं।

आचार्य बालमुकुंद शास्त्री के अनुसार, आयोजकों की योजना है कि न्यायालय का निर्णय आने के बाद रजत शिला का उपयोग मंदिर निर्माण में किया जाए। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक पहल से जुड़े लोगों में उत्साह है और वे अपनी आस्था के अनुसार कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

उन्होंने आयोजन को श्रद्धालुओं की सामूहिक भावना का प्रतीक बताते हुए कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित मामले के न्यायिक समाधान की उम्मीद भी जताई।

एक लाख स्थानों पर पूजन कराने का लक्ष्य

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर-मस्जिद प्रकरण में हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी महाराज ने कार्यक्रम के दौरान रजत शिला पूजन अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस रजत शिला का एक लाख स्थानों पर पूजन कराने का लक्ष्य रखा गया है।

दिनेश फलाहारी महाराज के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों में रहने वाले श्रद्धालु भी रजत शिला पूजन कार्यक्रम में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं। उनके पास लगातार फोन आ रहे हैं और लोग अपने क्षेत्र में रजत शिला लाकर पूजन कराने का अनुरोध कर रहे हैं।

हालांकि, समय की सीमाओं और व्यवस्थागत कठिनाइयों के कारण प्रत्येक स्थान तक पहुंचना संभव नहीं है। इसी वजह से अभियान के तहत देश के प्रमुख स्थानों पर रजत शिला पूजन कराने की योजना बनाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि इस पहल को लेकर सनातन धर्मावलंबियों में उत्साह है। श्रद्धालु चाहते हैं कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले का समाधान न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से हो और उनकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाए।

संतों और गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति

चूरू में आयोजित रजत शिला पूजन कार्यक्रम में कई संतों, धार्मिक प्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर राधानंद गिरी, संयोजक आचार्य राजेश पाठक, राजेश शास्त्री, कान्हा कौशिक, राजेश कुमार, आकाश सिंह, प्रमोद शर्मा, बालमुकुंद शास्त्री, रजनी तिवारी, डिंपल उपाध्याय, नीरज शर्मा और विष्णु कटरा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान धार्मिक अनुष्ठान के साथ श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के संकल्प पर चर्चा की गई। आयोजकों ने बताया कि रजत शिला पूजन अभियान के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालुओं को जोड़ने का प्रयास जारी रहेगा।

आस्था और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है अभियान

चूरू में संपन्न हुआ यह आयोजन श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण की मांग और उससे जुड़ी धार्मिक भावनाओं को सामने लाने वाला कार्यक्रम रहा। आयोजकों का उद्देश्य रजत शिला पूजन के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ाना है।

वहीं, मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित विवाद का समाधान न्यायालय की प्रक्रिया और उसके अंतिम निर्णय के अधीन है। ऐसे में आयोजन से जुड़े लोगों ने अपनी आस्था और अपेक्षाएं व्यक्त करते हुए न्यायिक समाधान की उम्मीद जताई।

इस प्रकार चूरू में आयोजित रजत शिला पूजन कार्यक्रम धार्मिक आस्था, सामूहिक सहभागिता और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के संकल्प के रूप में सामने आया। अब आयोजकों की योजना देश के अन्य प्रमुख स्थानों पर भी इसी तरह पूजन कार्यक्रम आयोजित करने की है।

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