राधाकुंड, श्यामकुंड और अष्टसखी कुंड का होगा कायाकल्प, 12.19 करोड़ रुपये से शुरू हुआ विकास कार्य
रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज
ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में स्थित राधाकुंड, श्यामकुंड और अष्टसखी कुंड का अब कायाकल्प किया जाएगा। इन तीनों पवित्र कुंडों के संरक्षण, सफाई और सौंदर्यीकरण के लिए टाटा फाउंडेशन के सहयोग से 12.19 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रविवार को विधिविधान के साथ भूमि पूजन कर विकास कार्यों का शुभारंभ किया गया। इस परियोजना के तहत कुंडों की सफाई के साथ जल संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा।
यह पहल ब्रज की प्राचीन धार्मिक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना के तहत विकास कार्य हार्टफुलनेस के माध्यम से कराए जाएंगे, जबकि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद इसकी निगरानी करेगी।
12.19 करोड़ रुपये से बदलेगा तीनों कुंडों का स्वरूप
राधाकुंड, श्यामकुंड और अष्टसखी कुंड ब्रज क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हैं। इन कुंडों से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन, स्नान और परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इन पवित्र जलस्रोतों का संरक्षण और बेहतर रखरखाव लंबे समय से महत्वपूर्ण आवश्यकता रहा है।
इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और टाटा फाउंडेशन के सहयोग से विकास परियोजना तैयार की गई है। इसके लिए कुल 12.19 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। परियोजना के अंतर्गत तीनों कुंडों की मौजूदा स्थिति को बेहतर बनाने के साथ उनके धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा, विकास कार्यों के दौरान कुंडों की पारंपरिक पहचान और धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि आधुनिक सुविधाओं के साथ उनकी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रह सके।
डी-वाटरिंग और डी-सिल्टिंग से होगा कुंडों का संरक्षण
परियोजना के अंतर्गत कुंडों में डी-वाटरिंग, डी-सिल्टिंग और सौंदर्यीकरण के कार्य कराए जाएंगे। डी-वाटरिंग के तहत आवश्यकतानुसार कुंडों से पानी निकालने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जबकि डी-सिल्टिंग के माध्यम से तल में जमा गाद और अन्य अवांछित सामग्री को हटाने का काम किया जाएगा।
इन कार्यों का उद्देश्य कुंडों की सफाई और संरक्षण को बेहतर बनाना है। साथ ही, श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाओं का विकास भी किया जाएगा।
हालांकि, ऐसे धार्मिक जलस्रोतों के संरक्षण में केवल सफाई ही पर्याप्त नहीं है। जल की गुणवत्ता, आसपास के पर्यावरण और पारंपरिक संरचनाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है। इसलिए परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विकास कार्यों के साथ कुंडों की प्राकृतिक और धार्मिक विशेषताओं को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाता है।
सर्वपक्षीय बैठक में संरक्षण और स्वच्छता पर जोर
विकास कार्यों के शुभारंभ से पहले रविवार को राधाकुंड स्थित मीरा मनोरंजन धर्मशाला में सर्वपक्षीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि राधाकुंड, श्यामकुंड और अष्टसखी कुंड केवल जलस्रोत नहीं हैं, बल्कि ब्रज की प्राचीन धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक हैं। इसलिए इनका संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन पवित्र स्थलों का बेहतर रखरखाव ब्रज की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करेगा।
इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय लोगों से इस कार्य में सहयोग करने और कुंडों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने में प्रशासन के साथ स्थानीय समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
विधायक ने मुख्यमंत्री और परिषद का जताया आभार
क्षेत्रीय विधायक ठाकुर मेघश्याम सिंह ने कुंडों के विकास की पहल के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष दूर-दराज के क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु राधाकुंड और श्यामकुंड में स्नान करने तथा परिक्रमा करने पहुंचते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और इन धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है।
वहीं, श्री पाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी के पीठाधीश्वर महंत केशव दास महाराज ने तीनों कुंडों के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इनके संरक्षण को ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
दो वर्षों की चर्चा के बाद मिली परियोजना को मंजूरी
बैठक का संचालन करते हुए ईको-रेस्टोरेशन प्रभारी मुकेश शर्मा ने परियोजना की पृष्ठभूमि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और टाटा फाउंडेशन के बीच ब्रज के कुंडों के विकास को लेकर पिछले दो वर्षों से बातचीत चल रही थी। इस दौरान तकनीकी स्तर पर भी कई दौर की चर्चा हुई।
लंबी प्रक्रिया के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप गोवर्धन क्षेत्र के इन तीनों कुंडों के विकास के लिए 12.19 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि विकास कार्य हार्टफुलनेस के माध्यम से कराए जाएंगे और परिषद उनकी निगरानी करेगी।
इस प्रक्रिया में संबंधित पक्षों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। परियोजना को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने के लिए इस्कॉन से जुड़ीं और बरसाना क्षेत्र में सात कुंडों पर कार्य कर रहीं हरनीत हरिहरन भी समन्वय में सहयोग करेंगी।
भूमि पूजन में प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी रहे मौजूद
सर्वपक्षीय बैठक के बाद तीनों कुंडों के विकास कार्यों का विधिवत शुभारंभ भूमि पूजन के साथ किया गया। आचार्य ब्रज किशोर गोस्वामी ने वैदिक विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया।
इस अवसर पर ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, विधायक ठाकुर मेघश्याम सिंह, जिलाधिकारी सीपी सिंह, परिषद की मुख्य कार्यपालक अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन, एडीएम प्रशासन डॉ. अमरेश कुमार, चेयरमैन रामफल मुंशी, एसडीएम सलोनी गौतम और अधिशासी अधिकारी कल्पना वाजपेयी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त हार्टफुलनेस का लगभग दो दर्जन सदस्यों वाला तकनीकी दल भी कार्यक्रम में शामिल हुआ।
कार्यक्रम में पर्यावरण सलाहकार दिवाकर वशिष्ठ, चंद्रिका राय, स्वदेश दास, प्रह्लाद दास, वासुदेव, कृष्णा दुबे, सतीश वशिष्ठ, डॉ. हर्षवर्धन गोस्वामी और ब्रज बिहारी मिश्रा सहित कई लोग मौजूद रहे।
नुक्कड़ नाटक से दिया स्वच्छता का संदेश
कुंडों के संरक्षण के साथ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए हार्टफुलनेस की ओर से नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक सरोवरों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, कूड़ा न फैलाने और जलस्रोतों को स्वच्छ रखने का संदेश दिया गया।
नाटक के जरिए यह समझाने का प्रयास किया गया कि पवित्र कुंडों की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्थानीय निवासियों और प्रत्येक श्रद्धालु का भी कर्तव्य है।

