घाटमपुर के ईटर्रा गांव में आम के हरे पेड़ों की कथित अवैध कटान, वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
रिपोर्ट- शुभम साहू
घाटमपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर क्षेत्र में हरे पेड़ों की कथित अवैध कटान का मामला सामने आया है। पतारा विकासखंड के ईटर्रा गांव में एक किसान के खेत में खड़े आम के हरे पेड़ों को काटे जाने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि पेड़ों की कटान के बाद लकड़ी को भी मौके से हटा दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और अवैध लकड़ी कटान पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मामले में किसान मोहित अवस्थी, पुत्र टीर्रा अवस्थी, के खेत में खड़े आम के पेड़ों को काटे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, अभी तक पेड़ों की वास्तविक संख्या, कटान की तारीख और घटना में शामिल लोगों के संबंध में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना जरूरी है।
ईटर्रा गांव में किसान के खेत में काटे गए आम के हरे पेड़
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पतारा विकासखंड के ईटर्रा गांव में किसान के खेत में आम के कई पेड़ खड़े थे। आरोप है कि इन पेड़ों को काट दिया गया। इसके बाद काटी गई लकड़ी को भी मौके से हटा दिया गया, जिससे घटना से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों और लकड़ी के परिवहन की जांच का सवाल उठ रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह पता लगाने की मांग की जा सकती है कि आखिर खेत में खड़े पेड़ों को किसने काटा और लकड़ी को कहां ले जाया गया। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पेड़ों की कटान के लिए संबंधित विभाग से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
यदि बिना जरूरी अनुमति के हरे पेड़ों की कटान की गई है, तो मामला संबंधित नियमों के तहत जांच और कार्रवाई का विषय बन सकता है। इसलिए मौके का निरीक्षण कर पेड़ों की स्थिति, कटान के निशान और लकड़ी के परिवहन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करना महत्वपूर्ण होगा।
वन विभाग की निगरानी के बावजूद कटान कैसे?
क्षेत्र में हरे पेड़ों की कथित कटान का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि यदि अवैध कटान रोकने के लिए निगरानी की जा रही है, तो खेतों में खड़े पेड़ों को काटे जाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक कैसे लगेगी।
हालांकि, इस मामले में विभागीय लापरवाही की पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किस समय हुई, संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं और किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
इसके अलावा, यह भी जांच का विषय है कि पेड़ों की कटान किसी व्यक्ति ने निजी स्वार्थ में कराई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। तथ्यों की पुष्टि किए बिना किसी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
हरे पेड़ों की कटान से पर्यावरण को नुकसान
आम के पेड़ केवल फल देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेड़ वायु की गुणवत्ता सुधारने, पक्षियों और अन्य जीवों को आश्रय देने तथा स्थानीय वातावरण को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। ऐसे में हरे पेड़ों की अनावश्यक कटान पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और उनके आसपास मौजूद पेड़ प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए पेड़ों की कटान से जुड़े मामलों में संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इसके साथ ही, किसानों और ग्रामीणों को भी पेड़ों की कटान से संबंधित नियमों तथा आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार के कानूनी विवाद से बचा जा सके।
लकड़ी कहां गई, इसकी भी होनी चाहिए जांच
ईटर्रा गांव के इस मामले में पेड़ों की कथित कटान के साथ लकड़ी को मौके से हटाए जाने का आरोप भी महत्वपूर्ण है। यदि लकड़ी को वहां से ले जाया गया है, तो उसके परिवहन और गंतव्य के संबंध में जानकारी जुटाना जांच का हिस्सा हो सकता है।
संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण करके यह पता लगाना चाहिए कि कितने पेड़ काटे गए, उनकी स्थिति क्या थी और क्या कटान से संबंधित कोई अनुमति या दस्तावेज उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाकर घटना से जुड़े तथ्यों का सत्यापन भी किया जा सकता है।
इससे न केवल मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी, बल्कि यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कटान के संबंध में लागू नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल ईटर्रा गांव में आम के हरे पेड़ों की कथित कटान के मामले में संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि कटान अवैध रूप से की गई या इसमें किसी अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति की लापरवाही रही है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग और संबंधित अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर जांच करते हैं या नहीं। यदि जांच में बिना अनुमति पेड़ों की कटान की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

