मथुरा में विजयादशमी पर होगी रावण की महा आरती, लंकेश भक्त मंडल करेगा पुतला दहन का विरोध

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा। विजयादशमी के अवसर पर मथुरा में इस बार रावण दहन की परंपरा को लेकर वैचारिक बहस देखने को मिलेगी। यमुनापार स्थित जय श्री लंकेश्वर महादेव मंदिर में महापंडित रावण की महा आरती आयोजित की जाएगी। वहीं, लंकेश भक्त मंडल ने रावण का पुतला जलाने की परंपरा का विरोध करने की बात कही है। आयोजकों के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य रावण के विद्वान स्वरूप, भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति और उनके ज्ञान को सामने लाना है।

लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को सुबह 10 बजे यमुनापार स्थित जय श्री लंकेश्वर महादेव मंदिर में महा आरती का आयोजन किया जाएगा। यह मंदिर श्मशान घाट के निकट यमुना तलहटी में स्थित है। कार्यक्रम में भगवान शिव के अनन्य भक्त और महापंडित रावण के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाएगी। इसके साथ ही रावण दहन की परंपरा के विरोध में आयोजक अपनी बात रखेंगे।

रावण के विद्वान स्वरूप को सामने लाने की पहल

ओमवीर सारस्वत ने कहा कि रावण को सामान्यतः रामायण में भगवान श्रीराम के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता है, लेकिन उनके व्यक्तित्व का एक पक्ष उनकी विद्वत्ता, शास्त्रों के ज्ञान और भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति से भी जुड़ा है। उनका कहना है कि विजयादशमी पर रावण के पुतले का दहन करने के बजाय उनके ज्ञान और धार्मिक अध्ययन से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि रावण का पुतला जलाने की परंपरा से ब्राह्मण समाज के कुछ लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। उनके अनुसार, रावण को ब्राह्मण शिरोमणि और वेदों का ज्ञाता माना जाता है। इसलिए उनके व्यक्तित्व के विद्वतापूर्ण पक्ष को समझना भी आवश्यक है। हालांकि, रावण दहन विजयादशमी पर प्रचलित एक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जिसे भगवान श्रीराम की विजय तथा बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

भगवान शिव के परम भक्त के रूप में रावण की पहचान

लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ने रावण की भगवान शिव के प्रति भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि रावण को धार्मिक ग्रंथों और लोकपरंपराओं में महान शिवभक्त के रूप में याद किया जाता है। उनके मुताबिक, रावण की विद्वत्ता और शास्त्रों के ज्ञान को भी समाज में उचित स्थान मिलना चाहिए।

उन्होंने भगवान श्रीराम और रावण से जुड़े उस प्रसंग का भी उल्लेख किया, जिसमें युद्ध के अंतिम चरण में श्रीराम लक्ष्मण को रावण से ज्ञान प्राप्त करने के लिए भेजते हैं। आयोजकों का कहना है कि इस प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि किसी व्यक्ति के गुणों और ज्ञान का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।

साथ ही, इस विषय पर धार्मिक दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकते हैं। रामायण की विभिन्न परंपराओं में रावण के व्यक्तित्व को अलग-अलग ढंग से प्रस्तुत किया गया है। जहां एक ओर उन्हें विद्वान और शिवभक्त माना जाता है, वहीं दूसरी ओर सीता हरण और भगवान श्रीराम के साथ युद्ध के कारण उनका चरित्र अधर्म तथा अहंकार के परिणामों से भी जोड़ा जाता है।

सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक होगा महामंत्र जाप

आयोजकों के मुताबिक, मंदिर परिसर में मंगलवार को सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक महामंत्र का संगीतमय जाप किया जाएगा। संगीत मंडली द्वारा निरंतर ‘हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे’ महामंत्र का जाप किया जाएगा।

इसके बाद महापंडित रावण की महा आरती की जाएगी और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण होगा। कार्यक्रम में भगवान शिव के भक्तों, ब्राह्मण समाज के सदस्यों और अन्य धर्मप्रेमियों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है।

मंडल का कहना है कि वह पिछले कई वर्षों से रावण दहन की परंपरा का विरोध करता आ रहा है। संगठन की मांग है कि रावण के पुतले का दहन करने की परंपरा पर पुनर्विचार किया जाए और उनके विद्वतापूर्ण तथा धार्मिक पक्ष को भी महत्व दिया जाए।

मथुरा-वृंदावन के श्रद्धालुओं से शामिल होने की अपील

लंकेश भक्त मंडल ने मथुरा, वृंदावन और आसपास के क्षेत्रों के लोगों से कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की है। विशेष रूप से ब्राह्मण समाज, शिवभक्तों और धर्मप्रेमियों से महा आरती में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाने का आग्रह किया गया है।

विजयादशमी का पर्व देशभर में भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन अनेक स्थानों पर रामलीला के मंचन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। इसके माध्यम से बुराई पर अच्छाई, अन्याय पर न्याय और अहंकार पर मर्यादा की विजय का संदेश दिया जाता है।

हालांकि, मथुरा में प्रस्तावित महा आरती के माध्यम से लंकेश भक्त मंडल रावण के व्यक्तित्व के दूसरे पक्ष को सामने लाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में विजयादशमी पर आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक पात्रों की व्याख्या और परंपराओं को लेकर एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगा।

कार्यक्रम का विवरण

  • स्थान: जय श्री लंकेश्वर महादेव मंदिर, यमुनापार, मथुरा
  • अवसर: विजयादशमी
  • महामंत्र जाप: सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक
  • महा आरती: आयोजकों के अनुसार सुबह 10 बजे कार्यक्रम का आयोजन
  • अन्य आयोजन: आरती के बाद प्रसाद वितरण