बांदा में एससी-एसटी एक्ट के आरोपों के बीच युवक की मौत, वीडियो संदेश और सुसाइड नोट से उठे सवाल
रिपोर्ट- पंकज त्रिपाठी
बांदा, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक युवक की मौत का मामला सामने आया है। फतेहगंज थाना क्षेत्र के कर्माडाड़ी गांव निवासी आशीष ने कथित तौर पर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना से पहले युवक ने 51 सेकंड का एक वीडियो संदेश बनाया और फतेहगंज थानाध्यक्ष के नाम एक सुसाइड नोट भी छोड़ा। वीडियो में वह अपने माता-पिता और दो बहनों की जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए ग्राम प्रधान से परिवार की मदद करने की अपील करता दिखाई दे रहा है। वहीं, सुसाइड नोट में उसने खुद को निर्दोष बताते हुए एक मामले में झूठा फंसाए जाने का आरोप लगाया है।
इस घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। दूसरी ओर, मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में कार्रवाई के दबाव और कथित आर्थिक मांग के कारण आशीष मानसिक रूप से परेशान था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
वीडियो संदेश में परिवार की मदद की अपील
मृत्यु से पहले बनाए गए वीडियो में आशीष भावुक होकर ग्राम प्रधान से अपने पिता का साथ देने और दोनों बहनों की शादी में मदद करने की अपील करता सुनाई देता है। वह कहता है कि अब उसके सामने कोई रास्ता नहीं बचा है और उसे आशंका है कि वापस लौटने पर उसके पिता को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
वीडियो संदेश में युवक अपने परिवार की चिंता जाहिर करते हुए ग्राम प्रधान से कहता है कि उसके जाने के बाद उसके माता-पिता और बहनों का ध्यान रखा जाए। साथ ही, वह संबंधित महिला सोनम का जिक्र करते हुए कहता है कि उससे पूछताछ करने पर कथित विवाद की सच्चाई सामने आ सकती है।
इस वीडियो के सामने आने के बाद घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वीडियो में लगाए गए आरोपों को जांच के बिना अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
सुसाइड नोट में खुद को बताया निर्दोष
आशीष ने फतेहगंज थानाध्यक्ष को संबोधित सुसाइड नोट में दावा किया कि उसे गलत तरीके से मामले में फंसाया जा रहा है। उसने लिखा कि जिस दिन की घटना को लेकर उस पर आरोप लगाया गया, उस दिन वह कथित घटनास्थल पर मौजूद नहीं था, बल्कि भरतकूप थाना क्षेत्र के भगवतपुर में था।
युवक ने अपने मोबाइल नंबर की लोकेशन की जांच कराने की बात भी लिखी। उसका कहना था कि मोबाइल लोकेशन से उसकी मौजूदगी के संबंध में जानकारी मिल सकती है। इसके अलावा, उसने अपने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए सोनम को जिम्मेदार ठहराया है।
हालांकि, सुसाइड नोट में लिखी बातों और मोबाइल लोकेशन से संबंधित दावों की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों की जांच के बाद ही हो सकेगी। किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
बहन ने लगाया साढ़े चार लाख रुपये मांगने का आरोप
मृतक की बहन ने आरोप लगाया कि आशीष को एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में झूठा फंसाया जा रहा था। उसके मुताबिक, मामले को लेकर आशीष से कथित तौर पर साढ़े चार लाख रुपये की मांग की गई थी। बहन का दावा है कि आर्थिक स्थिति के कारण वह इतनी रकम नहीं दे सका।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस गांव पहुंची थी और आशीष का मोबाइल नंबर लेने के बाद उसे बार-बार फोन करके बुलाया जा रहा था। बहन के अनुसार, आशीष ने पुलिस के सामने पेश होने की बात कही थी, लेकिन लगातार फोन आने से वह कथित रूप से तनाव में आ गया।
परिवार का मानना है कि इन परिस्थितियों ने आशीष की मानसिक परेशानी बढ़ाई। हालांकि, रुपये मांगने, पुलिस के फोन और कथित प्रताड़ना से जुड़े आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं और किस स्तर पर कोई लापरवाही हुई या नहीं।
पुलिस के सामने जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की चुनौती
मामले में क्षेत्राधिकारी अमरनाथ गुप्ता का पक्ष भी सामने आया है। पुलिस की जांच और कार्रवाई से संबंधित विस्तृत निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत, आरोपों और मृतक के वीडियो संदेश में किए गए दावों की वास्तविक स्थिति क्या है।
जांच के दौरान मृतक का वीडियो, सुसाइड नोट, मोबाइल फोन की लोकेशन, संबंधित शिकायत और परिजनों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। इसके साथ ही, यदि आर्थिक मांग या पुलिस की ओर से अनुचित दबाव डालने के आरोप लगाए गए हैं, तो उनकी भी स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए।
वहीं, यह भी जरूरी है कि एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता और आरोपित, दोनों के कानूनी अधिकारों का सम्मान किया जाए। किसी भी मामले में आरोप लगने मात्र से व्यक्ति का दोष सिद्ध नहीं होता। इसी तरह, शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई भी जरूरी है।
घटना ने परिवार की सुरक्षा और संवेदनशील पुलिसिंग पर उठाए सवाल
आशीष की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वीडियो में अपनी दो बहनों की शादी और पिता की जिम्मेदारी को लेकर की गई उसकी अपील इस घटना के मानवीय पक्ष को सामने लाती है। साथ ही, मामला यह सवाल भी उठाता है कि कानूनी विवादों के दौरान तनाव से गुजर रहे लोगों की स्थिति को समझने और उन्हें उचित सहायता

