अमेठी में 32 साल पुराने मारपीट मामले में तीन दोषियों को 3 साल की सजा, 36 हजार रुपये जुर्माना
रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा
अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में करीब 32 साल पुराने मारपीट के मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए तीन लोगों को तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों दोषियों पर कुल 36 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। पुलिस और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के चलते लंबे समय से लंबित इस मामले में फैसला आया है।
यह मामला अमेठी कोतवाली क्षेत्र के मोती का पुरवा मजरे बरेथा गांव से जुड़ा है। घटना के बाद वर्ष 1994 में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। अब न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस विभाग ने इसे अपराधियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान की महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
वर्ष 1994 में दर्ज हुआ था मारपीट का मुकदमा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 2 जुलाई 1994 को मोती का पुरवा मजरे बरेथा गांव में मारपीट की घटना हुई थी। इस मामले में लाठी-डंडों से हमला करने, गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। घटना के संबंध में अमेठी कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की। जांच के दौरान संबंधित साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई। इसके बाद 18 अगस्त 1994 को पुलिस ने न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था।
हालांकि, मुकदमे के अंतिम निस्तारण में लंबा समय लगा। लगभग तीन दशक से अधिक समय बाद इस मामले में न्यायालय का फैसला सामने आया है। यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि पुराने आपराधिक मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद न्यायालय के माध्यम से दोषियों को सजा दिलाई जा सकती है।
शिवलाल, शिवराम और केशवराम दोषी करार
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले में शिवलाल, शिवराम और केशवराम को न्यायालय ने दोषी पाया। सुल्तानपुर स्थित एएसजे/एफटीसी अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की गई।
ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत पुराने मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के उद्देश्य से पुलिस और अभियोजन पक्ष के बीच समन्वय स्थापित कर मुकदमों की पैरवी की जाती है। इसी क्रम में इस मामले में भी न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा गया।
सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं में अधिकतम तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त प्रत्येक दोषी पर 12 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस प्रकार तीनों दोषियों पर कुल 36 हजार रुपये का अर्थदंड निर्धारित किया गया है।
जुर्माना नहीं देने पर भुगतना होगा अतिरिक्त कारावास
न्यायालय के आदेश के अनुसार, प्रत्येक दोषी को निर्धारित अर्थदंड भी अदा करना होगा। पुलिस के मुताबिक, जुर्माने की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में संबंधित दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इस फैसले के बाद मामले में दोषियों की जिम्मेदारी तय हो गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ है कि पुराने आपराधिक मामलों में पुलिस की विवेचना, अभियोजन की पैरवी और न्यायालय की सुनवाई के बाद कानूनी परिणाम सामने आ सकते हैं।
हालांकि, किसी भी मामले में सजा का वास्तविक क्रियान्वयन न्यायालय के आदेश और लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होता है। इसलिए इस प्रकरण में भी आगे की कार्रवाई संबंधित आदेशों के अनुरूप की जाएगी।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस की पैरवी
उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान का उद्देश्य आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी के माध्यम से दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाने की प्रक्रिया को मजबूत करना है। इसके तहत पुराने और लंबित मामलों पर भी ध्यान दिया जाता है, ताकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
अमेठी के इस मामले में पुलिस की प्रभावी पैरवी के बाद तीनों दोषियों को सजा सुनाया जाना अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे पुलिस और अभियोजन पक्ष की समन्वित कार्रवाई का महत्व भी सामने आता है।
कुल मिलाकर, वर्ष 1994 में दर्ज मारपीट के इस मामले में न्यायालय का फैसला लंबे समय से चली आ रही कानूनी प्रक्रिया का अहम पड़ाव है। तीनों दोषियों को तीन वर्ष के साधारण कारावास और कुल 36 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। यह फैसला बताता है कि पुराने मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से दोष तय किए जा सकते हैं और न्यायालय कानून के अनुसार अपना निर्णय सुना सकता है।

