लखीमपुर के मथना गांव में किसान शिवसागर वर्मा की हत्या, शव उठाने को लेकर पुलिस और ग्रामीणों में झड़प
रिपोर्ट – शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित मथना गांव में शनिवार शाम एक 65 वर्षीय किसान की हत्या से इलाके में तनाव का माहौल बन गया। खेत से पशुओं के लिए चारा लेकर साइकिल से घर लौट रहे शिवसागर वर्मा पर अज्ञात हमलावरों ने चाकू से हमला कर दिया। हमले में उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों ने काफी देर तक शव उठाने नहीं दिया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक, धक्कामुक्की और झड़प की स्थिति बन गई। ग्रामीणों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि इसी साल जनवरी में मृतक के चचेरे भाई सुनील कुमार पर भी चाकू से हमला हुआ था, जिसका खुलासा अब तक नहीं होने का आरोप ग्रामीण लगा रहे हैं।
खेत से चारा लेकर लौट रहे किसान पर हमला
मथना गांव निवासी शिवसागर वर्मा शनिवार शाम पशुओं के लिए चारा लेने साइकिल से खेत गए थे। बताया जा रहा है कि शाम करीब 6:30 बजे वह चारा लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान गांव के पास रास्ते में अज्ञात हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और चाकू से हमला कर दिया।
हमले में शिवसागर वर्मा की मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। उनका शव सड़क पर पड़ा रहा और पास में उनकी साइकिल भी मिली। कुछ समय बाद ग्रामीणों को घटना की जानकारी हुई तो वे परिजनों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
दिनदहाड़े गांव के नजदीक हुई इस वारदात से ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश फैल गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।
पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर की जांच
घटना की सूचना मिलने पर एसएसपी डॉ. ख्याति गर्ग, एएसपी सुधीर कुमार और सीओ सिटी महक शर्मा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और घटना से संबंधित जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
हालांकि, घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीण पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका कहना था कि परिवार के एक सदस्य पर पहले भी इसी तरह का हमला हुआ था, लेकिन उस मामले में अब तक आरोपियों का पता नहीं चल पाया है। ऐसे में ग्रामीणों ने पहले की घटना का खुलासा करने और वर्तमान मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाने और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। इसके बावजूद ग्रामीण शव को मौके से हटाने देने के लिए तैयार नहीं हुए।
जनवरी में चचेरे भाई पर हुए हमले को लेकर नाराजगी
ग्रामीणों के आक्रोश की प्रमुख वजह जनवरी में हुई एक पुरानी घटना बताई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, शिवसागर वर्मा के चचेरे भाई सुनील कुमार पर भी चाकू से हमला किया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस मामले में अब तक घटना का खुलासा नहीं हुआ है।
ग्रामीणों को आशंका है कि पुरानी घटना और शिवसागर वर्मा की हत्या के बीच कोई संबंध हो सकता है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने मांग की कि पुलिस पहले की घटना को भी गंभीरता से लेते हुए उसकी जांच करे और शिवसागर वर्मा की हत्या में शामिल आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करे। इसी मांग को लेकर घटनास्थल पर काफी देर तक तनाव बना रहा।
शव उठाने को लेकर पुलिस और ग्रामीणों में झड़प
स्थिति को सामान्य करने के लिए पुलिस लगातार प्रयास करती रही, लेकिन ग्रामीणों का विरोध जारी रहा। इसी बीच सदर विधायक योगेश वर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाने और शव को हटाने देने की अपील की।
इसके बावजूद शव उठाने को लेकर सहमति नहीं बन सकी। बाद में पुलिस ने हंगामे के बीच शव को अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए भेज दिया। इस दौरान ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्कामुक्की और झड़प हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, शव ले जा रहे पुलिस वाहन को रोकने के लिए ग्रामीणों ने पीछा किया। कुछ लोगों ने पुलिस की गाड़ियों पर हाथों से प्रहार किया और पत्थर फेंके जाने की भी जानकारी सामने आई। इस दौरान सड़क किनारे खड़ी कुछ बाइकें गिरकर क्षतिग्रस्त हो गईं। धक्कामुक्की के बीच एक सिपाही का मोबाइल फोन भी गिर गया।
हालात को देखते हुए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल से स्थिति संभालने का प्रयास किया।
हत्या की वजह और आरोपियों की तलाश अहम
शिवसागर वर्मा की हत्या के बाद अब पुलिस के सामने आरोपियों की पहचान करना और वारदात के पीछे की वजह का पता लगाना महत्वपूर्ण चुनौती है। ग्रामीणों की ओर से जनवरी में हुए हमले का मामला उठाए जाने के कारण पुरानी घटना की जांच भी चर्चा में है।
हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। पुलिस जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही हत्या की वजह और संभावित आरोपियों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
इस घटना ने गांव में सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
फिलहाल, शिवसागर वर्मा की हत्या के बाद मथना गांव में तनाव की स्थिति पैदा होने और पुलिस-ग्रामीणों के बीच झड़प की घटना ने मामले को गंभीर बना दिया है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी पर टिकी हैं।

