कानपुर में रोटरी क्लब ऑफ कानपुर ग्रेटर की पहल, AI फंडोस्कोपी से डायबिटीज मरीजों की आंखों की होगी जांच

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रिपोर्ट- हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर नगर। डायबिटीज के मरीजों की आंखों की रोशनी सुरक्षित रखने और समय रहते आंखों से जुड़ी बीमारियों की पहचान करने के उद्देश्य से रोटरी क्लब ऑफ कानपुर ग्रेटर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। क्लब ने रीजेंसी हॉस्पिटल के सहयोग से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित फंडोस्कोपी प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के माध्यम से डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की आंखों की तस्वीर लेकर तकनीक की मदद से उनकी जांच की जाएगी। यदि किसी मरीज में आंखों से संबंधित बीमारी के संकेत मिलते हैं, तो उसे आगे की जांच और उपचार के लिए नेत्र विशेषज्ञ के पास भेजा जाएगा।

क्लब की यह पहल पिछले 12 वर्षों से संचालित निःशुल्क डायबिटीज क्लीनिक की सेवाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए मरीजों को न केवल मधुमेह की नियमित जांच और दवाइयों की सुविधा मिलेगी, बल्कि डायबिटीज के कारण आंखों पर पड़ने वाले प्रभावों की पहचान करने में भी सहायता मिलेगी।

12 वर्षों से मरीजों को मिल रही निःशुल्क चिकित्सा सेवा

रोटरी क्लब ऑफ कानपुर ग्रेटर पिछले 12 वर्षों से लगातार निःशुल्क डायबिटीज क्लीनिक का संचालन कर रहा है। इस क्लीनिक में प्रत्येक शनिवार को मरीजों की डायबिटीज की जांच की जाती है। इसके साथ ही जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

मधुमेह एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें नियमित जांच, संतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय सलाह का विशेष महत्व होता है। यदि रक्त में शुगर का स्तर लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहता, तो इसका असर शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ सकता है। आंखें भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए क्लब ने अपनी मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं में आंखों की जांच को शामिल करने की पहल की है।

क्लब का उद्देश्य है कि आर्थिक कारणों से कोई भी मरीज जरूरी जांच और प्राथमिक चिकित्सा सहायता से वंचित न रहे। नियमित क्लीनिक के माध्यम से मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह और उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों का मिल रहा सहयोग

निःशुल्क डायबिटीज क्लीनिक के संचालन में कई चिकित्सक अपना योगदान दे रहे हैं। इनमें डॉ. अतुल कपूर, डॉ. पंकज टंडन और डॉ. मधु टंडन शामिल हैं। वहीं, प्रत्येक शनिवार को डॉ. दीपक याग्निक मरीजों का उपचार करते हैं।

चिकित्सकों के सहयोग से मरीजों को नियमित जांच और इलाज की सुविधा मिल रही है। इसके अतिरिक्त, एआई फंडोस्कोपी कार्यक्रम शुरू होने से डायबिटीज के मरीजों की देखभाल में आंखों के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जा सकेगी।

दरअसल, मधुमेह के मरीजों के लिए केवल ब्लड शुगर की निगरानी करना ही पर्याप्त नहीं है। समय-समय पर आंखों, गुर्दों, हृदय और अन्य अंगों के स्वास्थ्य की जांच भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में क्लब की नई पहल मरीजों को बीमारी से जुड़ी संभावित जटिलताओं के प्रति जागरूक करने में सहायक हो सकती है।

क्या है एआई फंडोस्कोपी प्रोग्राम?

एआई फंडोस्कोपी कार्यक्रम में आंख के पर्दे यानी रेटिना की तस्वीर लेकर उसकी जांच की जाती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक इन तस्वीरों का विश्लेषण करके डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसे रोगों के संभावित संकेतों की पहचान करने में सहायता कर सकती है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह से जुड़ी आंखों की एक बीमारी है। इसमें लंबे समय तक रक्त में शुगर का स्तर अधिक रहने के कारण रेटिना की रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो सकती हैं। शुरुआती अवस्था में कई बार मरीज को स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। इसलिए नियमित नेत्र जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत मरीजों की आंखों की तस्वीर लेकर एआई तकनीक से उसका विश्लेषण किया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की असामान्यता या बीमारी के संकेत दिखाई देते हैं, तो मरीज को आगे की चिकित्सकीय जांच के लिए नेत्र विशेषज्ञ के पास भेजा जाएगा।

हालांकि, एआई आधारित जांच प्रारंभिक पहचान में मदद करती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक होगा। समय पर बीमारी की पहचान होने से उपचार शुरू करने और दृष्टि को सुरक्षित रखने की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।

रीजेंसी हॉस्पिटल के सहयोग से हुई शुरुआत

रोटरी क्लब ऑफ कानपुर ग्रेटर ने इस नए कार्यक्रम की शुरुआत रीजेंसी हॉस्पिटल के सहयोग से की है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शरद बाजपेई के वंशीधर चिकित्सा सेवा संस्थान द्वारा किया जाएगा।

इस सहयोग का उद्देश्य डायबिटीज के मरीजों तक आंखों की जांच की सुविधा पहुंचाना और संभावित नेत्र रोगों की समय रहते पहचान करने में सहायता करना है। विशेष रूप से उन मरीजों के लिए यह पहल उपयोगी हो सकती है, जो नियमित रूप से आंखों की जांच नहीं करा पाते हैं।

इसके साथ ही, इस तरह की जांच से मरीजों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि मधुमेह का नियंत्रण और आंखों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। मरीजों को चिकित्सकों की सलाह के अनुसार समय-समय पर अपनी आंखों की जांच कराते रहना चाहिए।

क्लब अध्यक्ष ने बताया कार्यक्रम का उद्देश्य

रोटरी क्लब ऑफ कानपुर ग्रेटर के अध्यक्ष विकास जायसवाल ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह के मरीजों में दृष्टि प्रभावित होने का एक प्रमुख कारण है। हालांकि, समय रहते जांच और उचित उपचार से इसके गंभीर प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि नए कार्यक्रम के तहत मरीजों की आंखों की तस्वीर लेकर एआई तकनीक की मदद से जांच की जाएगी। यदि किसी मरीज में बीमारी के संभावित संकेत मिलते हैं, तो उसे तत्काल आगे की जांच के लिए नेत्र विशेषज्ञ के पास भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

क्लब की इस पहल का मुख्य उद्देश्य मरीजों को बीमारी के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच को प्रोत्साहित करना और जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है।

कार्यक्रम में क्लब के सदस्य रहे उपस्थित

एआई फंडोस्कोपी कार्यक्रम की शुरुआत के अवसर पर राजीव अग्रवाल, रोटरी क्लब ऑफ कानपुर ग्रेटर के अध्यक्ष विकास जायसवाल, सचिव अनूप केसरवानी, विकास अरोड़ा और संगीता गर्ग सहित क्लब के अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

क्लब की 12 वर्षों से जारी निःशुल्क डायबिटीज क्लीनिक सेवा और अब एआई आधारित नेत्र जांच की शुरुआत सामाजिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस पहल से डायबिटीज के मरीजों को नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ आंखों की संभावित समस्याओं की पहचान कराने के प्रति प्रोत्साहन मिलेगा।

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