मिशन शक्ति फेज-6: घाटमपुर में छात्राओं ने संभाली एसडीएम और तहसीलदार की जिम्मेदारी, सुनीं जनसमस्याएं
रिपोर्ट- शुभम साहू
महिला सशक्तीकरण और बालिका नेतृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कानपुर नगर के घाटमपुर में मिशन शक्ति फेज-6 के तहत पिंक तहसील दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान कक्षा 12वीं की छात्राओं को प्रशासनिक कार्यप्रणाली का अनुभव कराने के लिए एक दिन की सांकेतिक प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई। छात्रा दीक्षा शर्मा ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) की भूमिका निभाई, जबकि दिव्या साहू ने तहसीलदार के रूप में जिम्मेदारी संभाली। दोनों छात्राओं ने तहसील दिवस में पहुंचे फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित मामलों के शीघ्र एवं प्रभावी निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।
इस पहल के माध्यम से छात्राओं को न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर मिला, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का संदेश भी दिया गया।
मिशन शक्ति फेज-6 के तहत आयोजित हुआ पिंक तहसील दिवस
घाटमपुर तहसील सभागार में शनिवार को आयोजित पिंक तहसील दिवस का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाना तथा उन्हें प्रशासनिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना रहा। मिशन शक्ति फेज-6 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं को प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली से परिचित कराने पर विशेष जोर दिया गया।
आमतौर पर तहसील दिवस में राजस्व, भूमि विवाद, प्रमाणपत्र, सरकारी योजनाओं और अन्य जनसमस्याओं से संबंधित शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में छात्राओं को इन समस्याओं की सुनवाई की प्रक्रिया समझने का अवसर मिला। उन्होंने जाना कि प्रशासनिक स्तर पर किसी शिकायत को सुनना, उसके तथ्यों को समझना और संबंधित विभाग तक पहुंचाकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करना कितना महत्वपूर्ण होता है।
इसके साथ ही कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि बालिकाएं यदि अवसर और मार्गदर्शन प्राप्त करें, तो वे प्रशासनिक नेतृत्व सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन कर सकती हैं।
दीक्षा शर्मा ने निभाई एसडीएम की भूमिका
कार्यक्रम के दौरान कक्षा 12वीं की छात्रा दीक्षा शर्मा को एक दिन के लिए उपजिलाधिकारी (एसडीएम) की सांकेतिक जिम्मेदारी सौंपी गई। इस भूमिका के माध्यम से उन्हें तहसील स्तर पर होने वाले प्रशासनिक कार्यों और जनशिकायतों की सुनवाई की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।
एसडीएम की भूमिका निभाते हुए दीक्षा शर्मा ने तहसील दिवस में पहुंचे फरियादियों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने शिकायतों से संबंधित मामलों को समझने का प्रयास किया और उनके निस्तारण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस गतिविधि के जरिए उन्हें यह जानने का अवसर मिला कि प्रशासनिक अधिकारी आम नागरिकों की समस्याओं को दूर करने के लिए किस प्रकार कार्य करते हैं।
दरअसल, प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारियों को व्यावहारिक रूप से समझना विद्यार्थियों के लिए एक उपयोगी अनुभव साबित हो सकता है। इससे उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया, जनहित को प्राथमिकता देने और समस्याओं के समाधान के लिए समन्वय स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी मिलती है।
दिव्या साहू ने संभाली तहसीलदार की जिम्मेदारी
इसी क्रम में छात्रा दिव्या साहू को तहसीलदार की सांकेतिक जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने भी तहसील दिवस में आने वाले फरियादियों की समस्याओं को सुना और राजस्व प्रशासन से जुड़े कार्यों को समझा।
तहसीलदार की भूमिका के माध्यम से दिव्या साहू को राजस्व संबंधी मामलों, शिकायतों की सुनवाई और प्रशासनिक प्रक्रिया की जानकारी हासिल करने का अवसर मिला। कार्यक्रम में उनकी भागीदारी ने यह दर्शाया कि छात्राओं को शुरुआती स्तर से ही नेतृत्व और जिम्मेदारी निभाने के अवसर दिए जाएं, तो उनमें भविष्य के लिए बेहतर दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है।
इसके अलावा, इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक परिस्थितियों को समझने में सहायता करती हैं। प्रशासनिक कार्यों का अनुभव उन्हें यह भी सिखाता है कि किसी भी पद की जिम्मेदारी निभाते समय धैर्य, निष्पक्षता, संवेदनशीलता और जवाबदेही जैसे गुण कितने आवश्यक हैं।
महिला सशक्तीकरण के साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर
मिशन शक्ति अभियान का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उनकी सुरक्षा से जुड़े विषयों की जानकारी देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसी व्यापक उद्देश्य के तहत छात्राओं को प्रशासनिक भूमिकाओं से जोड़ने जैसी पहल महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पिंक तहसील दिवस में छात्राओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि बालिकाओं को केवल शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें नेतृत्व, निर्णय लेने और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने के अवसर भी दिए जाने चाहिए।
जब छात्राएं प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारियों को करीब से देखती हैं, तो उनके सामने भविष्य में उपलब्ध करियर विकल्पों की समझ भी व्यापक होती है। इससे वे प्रशासनिक सेवाओं, कानून, शिक्षा, सामाजिक कार्य और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो सकती हैं।
वहीं, इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में बालिकाओं की क्षमताओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी सहायक हो सकते हैं। यह जरूरी है कि बेटियों को आगे बढ़ने के लिए समान अवसर, उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाए।
सरकारी कार्यप्रणाली को समझने का मिला अवसर
पिंक तहसील दिवस के दौरान छात्राओं ने जनसमस्याओं की सुनवाई और उनके समाधान से जुड़ी प्रक्रिया को समझा। इस अनुभव से उन्हें यह जानने का अवसर मिला कि प्रशासनिक व्यवस्था में आम नागरिकों की शिकायतों का महत्व क्या है और उनके निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों की भूमिका किस प्रकार निर्धारित होती है।
इसके साथ ही, छात्राओं को यह समझने में मदद मिली कि जनसेवा केवल पद संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना और समाधान की दिशा में जिम्मेदारी के साथ काम करना भी आवश्यक है।
हालांकि, छात्राओं को सौंपी गई जिम्मेदारियां सांकेतिक थीं, फिर भी इस पहल का शैक्षिक और प्रेरणात्मक महत्व रहा। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति समझ विकसित करने और प्रशासनिक सेवाओं के बारे में जानकारी बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं।
बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल
घाटमपुर में मिशन शक्ति फेज-6 के तहत आयोजित पिंक तहसील दिवस ने महिला सशक्तीकरण और बालिका नेतृत्व को बढ़ावा देने का संदेश दिया। दीक्षा शर्मा और दिव्या साहू को क्रमशः एसडीएम तथा तहसीलदार की भूमिका सौंपकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
इस पहल से छात्राओं को अपनी क्षमता पहचानने, आत्मविश्वास बढ़ाने और भविष्य के लक्ष्यों के प्रति जागरूक होने का अवसर मिला। साथ ही, यह संदेश भी सामने आया कि बेटियों को उचित अवसर प्रदान करके उन्हें समाज और प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

