बस्ती: साढ़े पांच महीने की गर्भवती किशोरी की हालत बिगड़ी, कथित अवैध अस्पताल में गर्भपात के प्रयास पर सवाल

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रिपोर्ट- राकेश गिरि
बस्ती, उत्तर प्रदेश।
बस्ती जिले में कथित अवैध अस्पताल में गर्भपात के प्रयास के दौरान एक साढ़े पांच महीने की गर्भवती किशोरी की हालत गंभीर होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कैली रोड स्थित बिना पंजीकरण वाले परम अस्पताल में गर्भपात कराने के दौरान किशोरी की आंत और बच्चेदानी को गंभीर नुकसान पहुंचा। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां से उसे गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां चिकित्सकों ने उसकी जान बचाने के लिए ऑपरेशन किया। इस घटना के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था, अवैध चिकित्सा गतिविधियों और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कथित अवैध अस्पताल में गर्भपात के प्रयास का आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, किशोरी बस्ती शहर के कचहरी क्षेत्र की रहने वाली है और एक इंटर कॉलेज में पढ़ती है। उसके पिता अयोध्या में भूसे की दुकान चलाते हैं। बताया जा रहा है कि पड़ोस में रहने वाले एक युवक से संबंध के बाद किशोरी गर्भवती हो गई थी। इसके बाद परिवार उसे गर्भपात कराने के लिए कथित तौर पर एक ऐसे व्यक्ति के पास ले गया, जिसकी चिकित्सकीय योग्यता और उपचार करने की वैधानिक पात्रता जांच का विषय है।

आरोप है कि कैली रोड स्थित परम अस्पताल में 9 अक्टूबर की रात गर्भपात कराने का प्रयास किया गया। इस दौरान किशोरी की हालत अचानक बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार, उसे पेट में तेज दर्द और रक्तस्राव की समस्या होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उसे तत्काल दूसरे अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी।

हालांकि, पूरे घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियों, संबंधित व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता और अस्पताल के पंजीकरण की स्थिति की आधिकारिक जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।

आंत और बच्चेदानी को नुकसान पहुंचने का आरोप

इस मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि गर्भपात के प्रयास के दौरान किशोरी की आंत और बच्चेदानी को नुकसान पहुंचा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उसकी हालत बिगड़ने के बाद परिजन उसे बस्ती के कैली मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने किशोरी की गंभीर स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन किया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसकी आंत का बड़ा हिस्सा निकालना पड़ा। हालांकि, ऑपरेशन से संबंधित विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी और वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की पुष्टि संबंधित अस्पताल के आधिकारिक बयान से होना आवश्यक है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किशोरी का उपचार जारी है। उसकी स्थिति को लेकर परिवार चिंतित है। यह घटना बताती है कि गर्भपात जैसी संवेदनशील चिकित्सकीय प्रक्रिया को बिना उचित योग्यता, आवश्यक सुविधाओं और कानूनी प्रावधानों के तहत कराना कितना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

बिना पंजीकरण अस्पताल कैसे कर रहा था इलाज?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कथित अस्पताल के पंजीकरण को लेकर है। यदि संबंधित अस्पताल वास्तव में बिना आवश्यक पंजीकरण के संचालित हो रहा था, तो वहां मरीजों का उपचार किस आधार पर किया जा रहा था? इसके अलावा, गर्भपात जैसी संवेदनशील प्रक्रिया करने की अनुमति और संबंधित व्यक्ति की योग्यता की भी जांच जरूरी है।

नियमानुसार, गर्भपात केवल निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत अधिकृत चिकित्सक द्वारा उचित चिकित्सा संस्थान में किया जाना चाहिए। विशेष रूप से गर्भावस्था की अधिक अवधि में गर्भपात के लिए कानून में निर्धारित शर्तों और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। इसलिए इस मामले में यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि उपचार किस परिस्थिति में किया गया और क्या संबंधित नियमों का पालन हुआ था।

इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई चिकित्सा केंद्र बिना आवश्यक अनुमति के संचालित हो रहा था, तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं मिली? क्या क्षेत्र में ऐसे अन्य केंद्र भी चल रहे हैं? इन सवालों का जवाब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।

स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की जांच पर टिकी निगाहें

मामले में बस्ती के मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजीव निगम की बाइट भी प्रस्तावित है। वहीं, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक दुर्गेश कुमार, पीड़िता के पिता और कैली मेडिकल कॉलेज के सर्जन डॉ. शैलेन्द्र सिंह के बयान भी इस घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण पक्ष सामने ला सकते हैं।

अब यह देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग संबंधित अस्पताल के पंजीकरण, वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और कथित तौर पर उपचार करने वाले व्यक्ति की योग्यता की जांच के लिए क्या कदम उठाता है। इसके साथ ही पुलिस की भूमिका भी अहम होगी, ताकि आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा सके और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई हो।

जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि किशोरी को किस प्रकार का उपचार दिया गया, उसकी आंत और बच्चेदानी को हुए नुकसान की चिकित्सकीय वजह क्या थी और घटना के लिए किसी की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।

सुरक्षित चिकित्सा सेवाओं की जरूरत फिर आई सामने

बस्ती की यह घटना केवल एक परिवार के संकट तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित और कानूनी चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता से भी जुड़ी है। खासकर गर्भावस्था और गर्भपात से संबंधित मामलों में प्रशिक्षित चिकित्सकों की देखरेख, उचित चिकित्सा सुविधाएं और समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण हैं।

इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग को कथित अवैध चिकित्सा केंद्रों की पहचान करने, नियमित निरीक्षण करने और आम लोगों को सुरक्षित उपचार के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। वहीं, किसी भी गंभीर चिकित्सकीय स्थिति में मरीज को बिना देरी किए योग्य चिकित्सक और मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान तक पहुंचाना जरूरी है।

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