कानपुर देहात में मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत महिलाओं को किया जागरूक, साइबर अपराध से बचाव की दी जानकारी

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रिपोर्ट – विशाल मिश्रा 

कानपुर देहात: महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार के मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत शुक्रवार को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कार्यालय संयुक्त निदेशक अभियोजन में हुए इस कार्यक्रम में महिलाओं से संबंधित नए कानूनी प्रावधानों, विशाखा गाइडलाइंस, पॉक्सो अधिनियम और साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही, महिलाओं को अपने कानूनी अधिकारों को समझने और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में अपर जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक) दिग्विजय सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान अभियोजन विभाग के अधिकारियों ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों और सरकार की ओर से संचालित योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी देना और उन्हें सुरक्षा के उपलब्ध उपायों से परिचित कराना समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत महिलाओं को दी गई कानूनी जानकारी

मिशन शक्ति फेज-6.0 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को कानून, सुरक्षा और स्वावलंबन से जुड़े विषयों के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि महिला सुरक्षा से संबंधित कानूनों की जानकारी होने पर महिलाएं अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकती हैं और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

संयुक्त निदेशक अभियोजन कुशल पाल सिंह ने महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों से संबंधित नए कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में भी बताया।

उन्होंने महिलाओं को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में जागरूकता और विभागीय समन्वय की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

विशाखा गाइडलाइंस और महिला सुरक्षा पर चर्चा

कार्यक्रम में महिलाओं को विशाखा गाइडलाइंस के बारे में भी जानकारी दी गई। ये दिशा-निर्देश कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम और शिकायतों के निस्तारण से संबंधित महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने की जरूरत पर चर्चा की गई।

महिलाओं को बताया गया कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की स्थिति में उपलब्ध शिकायत व्यवस्था की जानकारी रखना जरूरी है। वहीं, संस्थानों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इस तरह की जागरूकता से महिलाओं को अपने अधिकारों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है। साथ ही, संस्थानों में सुरक्षित कार्य वातावरण बनाने के प्रति जिम्मेदारी भी मजबूत होती है।

साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपाय बताए

कार्यक्रम में ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी एवं मिशन शक्ति फेज-6.0 के नोडल अधिकारी अविनाश चन्द्र चतुर्वेदी ने महिलाओं के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है, क्योंकि व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में लापरवाही से आर्थिक और अन्य प्रकार के नुकसान की आशंका हो सकती है।

उन्होंने महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखने की सलाह दी। साथ ही, अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध संदेशों पर भरोसा करने और किसी के साथ ओटीपी, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने से बचने पर जोर दिया।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि किसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि या साइबर धोखाधड़ी का सामना होने पर संबंधित माध्यम से शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय रहते शिकायत करने और उपलब्ध डिजिटल सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करने से नुकसान को सीमित करने में मदद मिल सकती है।

आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराधों के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में महिलाओं और युवतियों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा से संबंधित जानकारी रखना विशेष रूप से उपयोगी है। कार्यक्रम के माध्यम से इसी प्रकार की सावधानियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।

पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों की दी जानकारी

अभियोजन अधिकारी मंजू प्रताप ने पॉक्सो अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने वाले इस कानून और ऐसे मामलों में अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।

उन्होंने महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनों के प्रति जागरूकता को आवश्यक बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार, समाज और संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस तरह के मामलों में कानून के प्रावधानों को समझना और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त करना जरूरी है।

कार्यक्रम में बाल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जानकारी देकर लोगों को कानूनी प्रक्रिया के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी को व्यापक स्तर तक पहुंचाना रहा।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए विभागीय समन्वय पर जोर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक) दिग्विजय सिंह ने महिला संबंधी मामलों में संवेदनशीलता, तत्परता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए संबंधित विभागों एवं अधिकारियों के बीच समन्वय जरूरी है।

उन्होंने मिशन शक्ति अभियान के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने और महिलाओं को जागरूक करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। साथ ही, महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करने और जरूरतमंदों को उचित सहायता उपलब्ध कराने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को कानूनों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा सकती है। इससे वे अपने अधिकारों के प्रति सजग होने के साथ ही जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता व्यवस्था का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।

अभियोजन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद

इस जागरूकता कार्यक्रम में अभियोजन अधिकारी राजेश कुमार, मो. नजमुद्दीन कादरी, अभिराम गौतम और पुष्पा रावत सहित कार्यालय के कर्मचारी एवं महिला पुलिसकर्मी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में महिला सुरक्षा, कानूनी अधिकारों, बाल संरक्षण और साइबर अपराधों से बचाव जैसे विषयों पर जानकारी साझा की गई।

कुल मिलाकर, कानपुर देहात में मिशन शक्ति फेज-6.0 के तहत आयोजित यह कार्यक्रम महिलाओं को कानूनी अधिकारों और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की पहल रहा। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं तक सही जानकारी पहुंचाने, शिकायत प्रक्रिया को समझाने और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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