इटावा: ग्राम पंचायत सचिव संजीव यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप, 10 किलोमीटर दूर बैठकर काम करने का दावा

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रिपोर्ट – रोहित सिंह चौहान

इटावा, उत्तर प्रदेश। इटावा जिले की ताखा तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कुदरैल ग्राम पंचायत में पंचायत सचिव को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत सचिव संजीव यादव पर भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव अपनी तैनाती वाली ग्राम पंचायत में बैठने के बजाय करीब 10 किलोमीटर दूर दूसरी ग्राम पंचायत में बैठकर सरकारी कार्य करते हैं। इससे स्थानीय लोगों को जरूरी दस्तावेज बनवाने और अन्य सरकारी कामकाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने और पंचायत सचिव के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित अधिकारियों की ओर से मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

10 किलोमीटर दूर जाना ग्रामीणों की मजबूरी

ग्रामीणों के मुताबिक, ग्राम पंचायत से जुड़े विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए पंचायत सचिव की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी सरकारी दस्तावेजों से संबंधित कार्यों के लिए लोगों को सचिव से संपर्क करना पड़ता है। ऐसे में यदि पंचायत सचिव अपनी तैनाती वाली ग्राम पंचायत में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते हैं, तो ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुदरैल ग्राम पंचायत में तैनात सचिव संजीव यादव दूसरी ग्राम पंचायत में बैठकर सरकारी कामकाज करते हैं। इसके चलते कुदरैल के लोगों को अपने ही पंचायत क्षेत्र से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और उन लोगों के लिए यह स्थिति कठिन हो सकती है, जिन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके अलावा, आने-जाने में समय और पैसे खर्च होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ जाती है।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले अवैध वसूली का आरोप

इस मामले में ग्रामीणों ने पंचायत सचिव पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों से संबंधित काम कराने के बदले कथित तौर पर अवैध वसूली की जाती है।

यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। हालांकि, फिलहाल ये आरोप ग्रामीणों की ओर से लगाए गए हैं। इनकी सत्यता निर्धारित करने के लिए संबंधित विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होगा।

सरकारी दस्तावेजों से संबंधित सेवाओं के लिए निर्धारित नियमों और शुल्क का पालन किया जाना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा नियमों के विपरीत धनराशि मांगे जाने की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जा सकती है।

ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग

कुदरैल ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। उनकी मांग है कि पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि वे अपनी तैनाती वाली ग्राम पंचायत में नियमित रूप से सरकारी कार्य करते हैं या नहीं।

इसके साथ ही ग्रामीणों ने कथित अवैध वसूली के आरोपों की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत से संबंधित सेवाएं स्थानीय लोगों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार और समय पर मिलनी चाहिए, ताकि किसी को अनावश्यक रूप से दूसरी ग्राम पंचायत तक न जाना पड़े।

ग्रामीणों की मांग है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित सचिव के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं मिलते हैं, तो जांच के निष्कर्षों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

पंचायत सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी

ग्राम पंचायतें ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण इकाई हैं। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सहित कई जरूरी सेवाओं के लिए ग्रामीण स्थानीय पंचायत व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। इसलिए पंचायत सचिव की उपलब्धता, कार्यों का समयबद्ध निस्तारण और निर्धारित नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।

इसके अलावा, शिकायतों के निस्तारण की पारदर्शी व्यवस्था होने से ग्रामीणों का प्रशासन पर भरोसा मजबूत होता है। यदि किसी पंचायत में सचिव की अनुपलब्धता या सरकारी कामकाज में अनियमितता की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों को तथ्यों के आधार पर उसकी जांच करनी चाहिए।

इटावा की कुदरैल ग्राम पंचायत का यह मामला भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों ने सचिव संजीव यादव पर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। अब संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जांच और आधिकारिक पक्ष से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है।

फिलहाल, ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि पंचायत से जुड़ी सरकारी सेवाएं उनके क्षेत्र में सुचारु रूप से उपलब्ध हों और किसी भी व्यक्ति को जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। मामले में प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।

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