कानपुर: जामिया तुत तय्येबात में ‘अपना मुकाम पैदा कर’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित
रिपोर्ट – सुहैल अंसारी
कानपुर, 15 अक्टूबर 2026। कानपुर के दलेल पुरवा स्थित जामिया तुत तय्येबात अरबी कॉलेज में छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों के मार्गदर्शन के लिए ‘अपना मुकाम पैदा कर’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को शिक्षा और करियर के प्रति जागरूक करना, शिक्षकों की शिक्षण क्षमता को विकसित करना तथा अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराना था। कार्यशाला में शिक्षा को बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्राओं के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए तीन अलग-अलग प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में प्रत्येक वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी जिम्मेदारियों को समझने, सकारात्मक सोच विकसित करने और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
पवित्र कुरआन के पाठ से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यशाला का शुभारंभ जामिया की छात्रा इकरा इज़हार द्वारा पवित्र कुरआन के पाठ से हुआ। इसके बाद संस्थान के शिक्षक मौलाना शादाब सलीम फलाही ने उद्घाटन संबोधन दिया। उन्होंने जामिया तुत तय्येबात के शैक्षिक उद्देश्यों, नैतिक मूल्यों और छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों को सही दिशा देना, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी को प्रभावी शिक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया।
मौलाना शादाब सलीम फलाही ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला से छात्राओं को अपने भविष्य की योजना बनाने में सहायता मिलेगी। वहीं, शिक्षकों को शिक्षण के नए और प्रभावी तरीकों को समझने का अवसर प्राप्त होगा तथा अभिभावक बच्चों की शिक्षा और संस्कारों के विकास में अपनी भूमिका को अधिक बेहतर ढंग से निभा सकेंगे।
सैयद सईद अहमद ने दिया शिक्षा और करियर का मार्गदर्शन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और प्रमुख वक्ता जनाब सैयद सईद अहमद रहे। वह पुणे स्थित राब्ता फाउंडेशन के अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता हैं। उन्हें शैक्षिक मार्गदर्शन, शिक्षक प्रशिक्षण तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वह विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
उन्होंने कार्यशाला के तीनों सत्रों को संबोधित करते हुए प्रतिभागियों की आवश्यकताओं के अनुरूप महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उनके संबोधन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना और छात्राओं, शिक्षकों तथा अभिभावकों को अपनी भूमिका अधिक प्रभावी ढंग से निभाने के लिए प्रेरित करना रहा।
छात्राओं को भविष्य की योजना बनाने के लिए किया प्रेरित
छात्राओं के लिए आयोजित सत्र में सैयद सईद अहमद ने शिक्षा, करियर चयन और भविष्य की योजना बनाने के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने छात्राओं को अपनी रुचियों, क्षमताओं और लक्ष्यों को पहचानने की दिशा में प्रेरित किया। साथ ही, शिक्षा के माध्यम से अपने लिए बेहतर अवसर तैयार करने और जीवन में एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला के दौरान यह संदेश दिया गया कि सफलता प्राप्त करने के लिए केवल शैक्षिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, निरंतर प्रयास, सही मार्गदर्शन और समय का उचित उपयोग भी महत्वपूर्ण हैं। छात्राओं को अपनी शिक्षा को गंभीरता से लेने और भविष्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण तकनीकों की दी जानकारी
शिक्षकों के लिए आयोजित प्रशिक्षण सत्र में शिक्षण कौशल को बेहतर बनाने और पढ़ाने के प्रभावी तरीकों पर चर्चा की गई। सैयद सईद अहमद ने शिक्षकों को विद्यार्थियों की जरूरतों को समझने तथा कक्षा में सकारात्मक और सहयोगपूर्ण वातावरण बनाने के महत्व से अवगत कराया।
इसके अलावा, शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने, विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने और शिक्षा को रुचिकर बनाने जैसे पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया गया। इस सत्र का उद्देश्य शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता को मजबूत करना और उन्हें विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना था।
अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा और संस्कारों के प्रति किया जागरूक
अभिभावकों के लिए आयोजित सत्र में बच्चों की शिक्षा, संस्कार निर्माण और उनके साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के महत्व को रेखांकित किया गया। वक्ता ने समझाया कि बच्चों के विकास में परिवार का वातावरण और अभिभावकों का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बच्चों की बातों को ध्यान से सुनना, उनकी समस्याओं को समझना, पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराना और उन्हें सकारात्मक प्रोत्साहन देना उनके व्यक्तित्व विकास में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही, अभिभावकों को बच्चों की शैक्षिक प्रगति में रुचि लेने और शिक्षकों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।
शिक्षा के साथ व्यक्तित्व विकास पर दिया गया जोर
इस एक दिवसीय कार्यशाला का व्यापक उद्देश्य शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित न रखना था। कार्यक्रम के माध्यम से इस बात पर जोर दिया गया कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षिक ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास भी आवश्यक है।
इसके अलावा, छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने को भी महत्वपूर्ण बताया गया। जब शिक्षण संस्थान, शिक्षक और परिवार मिलकर बच्चों के विकास के लिए प्रयास करते हैं, तो शिक्षा की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकती है।
प्राचार्या ने मुख्य अतिथि के प्रति व्यक्त किया आभार
कार्यक्रम के समापन पर कॉलेज की प्राचार्या मोहतरमा स्वालेहा सालेहाती साहिबा ने समापन वक्तव्य दिया। उन्होंने मुख्य अतिथि जनाब सैयद सईद अहमद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला को उपयोगी और महत्वपूर्ण पहल बताया।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्राओं की शैक्षिक प्रगति, शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता और अभिभावकों की सकारात्मक भागीदारी को बढ़ावा देने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही, उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर कॉलेज के निदेशक जनाब अहमद फ़राज़ असलम, जनाब आदिल अहसन फलाही तथा तैय्यबात प्राइमरी स्कूल की प्राचार्या मोहतरमा ज़ैनबुल ग़ज़ाली तैय्यबाती साहिबा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, जामिया तुत तय्येबात में आयोजित यह कार्यशाला छात्राओं को अपने लक्ष्य निर्धारित करने, शिक्षकों को शिक्षण प्रक्रिया बेहतर बनाने और अभिभावकों को बच्चों के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक पहल रही।

