हरदोई के सलेमपुर में 900 मीटर सड़क का इंतजार, ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

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रिपोर्ट – संजीव आनंद

हरदोई, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद के विकासखंड अहिरोरी की ग्राम पंचायत डही के मजरा सलेमपुर में ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नहर पर पुल बनने के बावजूद गांव तक पहुंचने वाला करीब 900 मीटर का मार्ग बदहाल है। बरसात के दौरान यह रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है, जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी होती है। समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से सड़क निर्माण कराने की गुहार लगाई है। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आगामी चुनाव में मतदान के बहिष्कार पर विचार किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और किसानों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्या को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराई जाए।

नहर पर पुल बना, लेकिन गांव तक पहुंचने का रास्ता अब भी बदहाल

सलेमपुर के ग्रामीणों को उम्मीद थी कि नहर पर पुल बनने के बाद गांव तक पहुंचने का रास्ता आसान हो जाएगा। हालांकि, पुल से गांव तक जाने वाला लगभग 900 मीटर का मार्ग अब भी दुरुस्त नहीं हो सका है। इसके चलते पुल बनने के बावजूद ग्रामीणों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, सामान्य दिनों में भी इस मार्ग से गुजरना आसान नहीं है। वहीं, बारिश होने पर रास्ते पर कीचड़ और फिसलन बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में पैदल चलने वाले लोगों के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार रास्ते की खराब स्थिति के कारण लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव उनके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। उनका मानना है कि यदि गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाले इस छोटे मार्ग का निर्माण करा दिया जाए तो आवागमन की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।

गर्भवती महिलाओं और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी

खराब सड़क का असर गांव के उन लोगों पर अधिक पड़ता है, जिन्हें नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता होती है। ग्रामीणों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते की खराब स्थिति के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह, किसी मरीज की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे समय से स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

इसके अतिरिक्त, बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों के आवागमन पर भी इस समस्या का असर पड़ता है। बरसात के दिनों में रास्ता अधिक खराब हो जाने से लोगों को आने-जाने में अतिरिक्त समय लगाना पड़ता है। ग्रामीण चाहते हैं कि गांव तक सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध हो, ताकि जरूरी कामों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।

दो किलोमीटर की दूरी के लिए तय करना पड़ रहा करीब 10 किलोमीटर का चक्कर

ग्रामीणों के मुताबिक, सलेमपुर से फतेहपुर होते हुए नया गांव बाजार तक की दूरी लगभग दो किलोमीटर है। यदि गांव तक जाने वाला मार्ग ठीक हो जाए तो लोग कम समय में बाजार और मुख्य सड़क तक पहुंच सकते हैं। लेकिन वर्तमान में रास्ता खराब होने के कारण ग्रामीणों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ता है।

इस वजह से उन्हें लालपुर, सादिक मऊ और अन्य रास्तों से होकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों का दावा है कि इस वैकल्पिक रास्ते से दूरी बढ़कर करीब 10 किलोमीटर हो जाती है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि लोगों को अतिरिक्त मेहनत भी करनी पड़ती है।

विशेष रूप से किसानों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर है। कृषि कार्यों के दौरान खेतों तक उपकरण पहुंचाने और उपज को बाहर ले जाने में परेशानी होती है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि 900 मीटर के मार्ग का निर्माण होने से किसानों सहित पूरे गांव को राहत मिल सकती है।

वर्षों से मांग, ग्रामीणों को अब ठोस कार्रवाई का इंतजार

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उनका कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली एक ऐसी सड़क चाहते हैं, जिसका उपयोग बच्चे, बुजुर्ग, किसान और मरीज आसानी से कर सकें।

इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरदोई से हस्तक्षेप करने की अपील की है। ग्रामीणों ने ‘जिलाधिकारी हरदोई, सलेमपुर में सड़क बनवाइए’ के नारे लगाकर अपनी समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।

इसके साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क निर्माण को लेकर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे आगामी चुनाव में मतदान के बहिष्कार का निर्णय ले सकते हैं। हालांकि, उनकी प्रमुख मांग गांव तक सड़क का निर्माण कराकर आवागमन को सुगम बनाना है।

जिलाधिकारी से निरीक्षण कराकर निर्माण शुरू कराने की मांग

अब सलेमपुर के ग्रामीणों की निगाहें जिलाधिकारी हरदोई और संबंधित विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कराकर मार्ग की वास्तविक स्थिति का आकलन करे। इसके बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराई जाए, ताकि लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो सके।

सड़क का निर्माण होने से ग्रामीणों को बाजार, मुख्य मार्ग और जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। साथ ही, किसानों के कृषि कार्यों और बच्चों की पढ़ाई में आने वाली बाधाएं भी कम हो सकती हैं।

फिलहाल, सलेमपुर के ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है कि गांव तक पहुंचने वाले करीब 900 मीटर मार्ग को जल्द दुरुस्त कराया जाए। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस मांग पर कब तक कार्रवाई करते हैं और ग्रामीणों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।