मेरठ में 50 लाख की रंगदारी मांगने वाले पांच फर्जी अफसर गिरफ्तार, एंटी करप्शन के नाम पर चला रहे थे गिरोह

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रिपोर्ट – मनीष पराशर

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में खुद को एंटी करप्शन विभाग का अधिकारी बताकर कथित तौर पर अपहरण और रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के झब्बालपुर गांव में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन लोगों ने एक युवक को उसके घर के पास से अगवा किया और उसके चाचा से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। साथ ही, रकम नहीं देने पर युवक को फर्जी एनकाउंटर में फंसाने की धमकी भी दी गई। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एंटी करप्शन लिखा हुआ बोर्ड लगी बोलेरो गाड़ी, वॉकी-टॉकी और पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मोनू, आशीष, मुरसलीन, इकबाल और फिरोज के रूप में हुई है। सभी आरोपी मेरठ के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, उनके खिलाफ दर्ज मामलों और उनकी वर्तमान स्थिति से संबंधित विस्तृत जानकारी पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

एंटी करप्शन के नाम पर लोगों पर जमाते थे रौब

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने और लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए एंटी करप्शन विभाग के नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल किया। वे सादे कपड़ों में एक बोलेरो गाड़ी से घूमते थे। गाड़ी पर एंटी करप्शन लिखा हुआ बोर्ड लगा था, जिससे लोगों को उनके अधिकारी होने का भ्रम हो सकता था।

इसके अलावा, आरोपियों के पास वॉकी-टॉकी और महंगे मोबाइल फोन भी थे। इन चीजों के जरिए वे खुद को प्रभावशाली अधिकारी के रूप में पेश करते थे। आरोप है कि इसी तरीके का इस्तेमाल करके उन्होंने युवक को निशाना बनाया और उसके परिवार को डराकर रकम वसूलने की कोशिश की।

दरअसल, सरकारी विभागों और जांच एजेंसियों के नाम का दुरुपयोग करके लोगों को डराना एक गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में आम नागरिकों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में किसी सरकारी विभाग से जुड़ा है या नहीं। इसलिए किसी भी व्यक्ति के पद और पहचान की पुष्टि करना जरूरी है।

युवक को अगवा कर चाचा से मांगे 50 लाख रुपये

मामले में आरोप है कि पांचों लोगों ने झब्बालपुर गांव में एक युवक को उसके घर के पास से अगवा कर लिया। इसके बाद युवक के चाचा को फोन करके 50 लाख रुपये की मांग की गई। आरोपियों ने कथित तौर पर रकम नहीं देने पर युवक को फर्जी एनकाउंटर में फंसाने की धमकी दी।

इस धमकी के जरिए परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के चलते कथित रंगदारी का यह मामला सामने आ गया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपियों की तलाश शुरू की।

इस तरह के मामलों में अपहरण और रंगदारी के आरोपों की जांच के दौरान पुलिस के लिए पीड़ित की सुरक्षा, आरोपियों की पहचान और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों को जुटाना महत्वपूर्ण होता है। मेरठ के इस मामले में भी पुलिस बरामद सामान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

पुलिस ने पांचों आरोपियों को किया गिरफ्तार

मेरठ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से वह बोलेरो गाड़ी भी बरामद की, जिस पर एंटी करप्शन लिखा हुआ बोर्ड लगा था। इसके अलावा, वॉकी-टॉकी और पांच मोबाइल फोन भी पुलिस के कब्जे में लिए गए हैं।

बरामद सामान की जांच से घटना में इस्तेमाल किए गए साधनों और आरोपियों की भूमिका के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिलने की संभावना है। वहीं, मोबाइल फोन की जांच से कथित रंगदारी के लिए किए गए संपर्कों और अन्य संभावित गतिविधियों के बारे में भी सुराग मिल सकते हैं।

पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर सकती है कि आरोपी इससे पहले भी इसी तरह किसी व्यक्ति को निशाना बना चुके हैं या नहीं। साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि एंटी करप्शन के नाम का इस्तेमाल करके उन्होंने किसी अन्य स्थान पर लोगों को गुमराह तो नहीं किया।

फर्जी अधिकारियों से सतर्क रहने की जरूरत

मेरठ में सामने आया यह मामला नागरिकों के लिए सतर्कता का संदेश भी देता है। किसी व्यक्ति के पास सरकारी विभाग के नाम का बोर्ड, वॉकी-टॉकी या अन्य उपकरण होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि वह सरकारी अधिकारी है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति अधिकारी बनकर धमकी देता है, पैसे मांगता है या किसी पर अनुचित दबाव बनाता है, तो उसकी पहचान की पुष्टि करना और पुलिस को सूचना देना जरूरी है।

विशेष रूप से, किसी कथित अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी, एनकाउंटर या अन्य कार्रवाई का भय दिखाकर पैसे मांगने की स्थिति में परिवार को घबराकर रकम देने के बजाय तत्काल पुलिस से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, फोन पर मिली धमकियों, संदेशों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखना जांच में मददगार हो सकता है।

एसपी ग्रामीण ने दी मामले की जानकारी

इस मामले में मेरठ के एसपी ग्रामीण अभिजीत सिंह की बाइट भी सामने आई है। पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के बाद पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी को मामले की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फिलहाल, पुलिस की जांच में आरोपियों की कथित भूमिका, रंगदारी मांगने के तरीके और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पीड़ित युवक के अपहरण और परिवार को दी गई धमकी से संबंधित सभी तथ्यों की पुष्टि की जाए।

कुल मिलाकर, मेरठ के परीक्षितगढ़ क्षेत्र में सामने आया यह मामला बताता है कि फर्जी सरकारी पहचान का इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करने और उनसे अवैध रूप से पैसे वसूलने की कोशिश कितनी गंभीर हो सकती है। पुलिस की कार्रवाई से पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अब आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मामले से जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

 

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