कानपुर में राम किशन को मिली जान से मारने की धमकी, पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगने का लगाया आरोप, पुलिस आयुक्त से की शिकायत

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रिपोर्ट – सुहैल अंसारी 

कानपुर: कानपुर में संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में पांच लाख रुपये की कथित रंगदारी मांगने और परिवार को जान से मारने की धमकी देने का आरोप सामने आया है। इस संबंध में एक व्यक्ति ने पुलिस आयुक्त, कानपुर नगर को लिखित शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विवाद के दौरान उन्हें डराने-धमकाने के साथ उनके इकलौते बेटे को भी निशाना बनाने की बात कही गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और मामले में पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने आना शेष है।

संपत्ति विवाद के बीच धमकी देने का आरोप

शिकायत पत्र के अनुसार, आवेदक रामकिशन गुप्ता, स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण गुप्ता के पुत्र हैं और कानपुर नगर के कलेक्टरगंज थाना क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में हर्षित महेश्वरी नामक व्यक्ति पर कथित रूप से अवैध वसूली करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

आवेदक के मुताबिक, विवाद कानपुर नगर के बिरहाना रोड स्थित एक आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्ति से संबंधित है। शिकायत में जनवरी 2013 में हुए बिल्डर एग्रीमेंट का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि इस समझौते में प्रदीप महेश्वरी, आलोक महेश्वरी, ललित महेश्वरी और अजय महेश्वरी का नाम शामिल था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि बिल्डर एग्रीमेंट में दर्ज शर्तों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया। इसी संबंध में उन्होंने सिविल प्रक्रिया के तहत न्यायालय में मुकदमे दायर किए हैं। शिकायत के अनुसार, संबंधित मामले वर्तमान में सक्षम न्यायालय में विचाराधीन हैं। आवेदक का आरोप है कि पहले भी उन पर और उनके परिवार पर समझौता करने के लिए दबाव बनाया गया था, लेकिन सहमति नहीं बनने के बाद विवाद बढ़ गया।

दूध लेने जाते समय हुई कथित घटना

रामकिशन गुप्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में घटना की तारीख 13 अक्टूबर 2026 बताई है। उनके अनुसार, मंगलवार सुबह लगभग नौ बजे वह अपने घर से स्कूटी पर दूध लेने के लिए निकले थे। इसी दौरान चितामणि दूध की दुकान के सामने हर्षित महेश्वरी कथित तौर पर वहां पहुंच गए।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और उन्हें रोकने का प्रयास किया। जब वह अपनी स्कूटी लेकर आगे बढ़ने लगे, तो कथित तौर पर उनकी स्कूटी के सामने वाहन लगाकर रास्ता रोक दिया गया। इसके बाद पांच लाख रुपये की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया है।

प्रार्थना पत्र के मुताबिक, शिकायतकर्ता को कथित तौर पर तीन दिन के भीतर पांच लाख रुपये देने के लिए कहा गया। ऐसा नहीं करने पर उनके इकलौते बेटे को उनके सामने जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है। इस घटना से शिकायतकर्ता ने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

हालांकि, यह पूरा घटनाक्रम शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

प्रत्यक्षदर्शी और सीसीटीवी फुटेज का भी किया उल्लेख

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में पवन खन्ना नामक परिचित का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि वह घटना के दौरान वहां मौजूद थे और उन्होंने कथित घटनाक्रम देखा। इसके अतिरिक्त, आवेदक का कहना है कि आसपास के मकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी घटना से संबंधित दृश्य रिकॉर्ड हुए हो सकते हैं।

यदि उपलब्ध फुटेज की जांच होती है, तो उससे घटना के समय, स्थान और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है। इसी तरह, कथित प्रत्यक्षदर्शी का बयान भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज की उपलब्धता और उसमें घटना रिकॉर्ड होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इस मामले में निष्पक्ष जांच के लिए शिकायत में उल्लिखित साक्ष्यों की पड़ताल करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों के संबंध में अधिक स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

पुलिस को शिकायत देने के बाद कार्रवाई नहीं होने का आरोप

आवेदक रामकिशन गुप्ता के अनुसार, कथित घटना के बाद उन्होंने क्षेत्रीय पुलिस चौकी सिरकी मोहाल, कानपुर नगर पहुंचकर शिकायत की जानकारी दी। उनका कहना है कि उन्होंने लिखित शिकायत भी भेजी, लेकिन क्षेत्रीय पुलिस ने उन्हें लगभग चार घंटे बाद थाने आने की बात कहकर तत्काल कार्रवाई नहीं की।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके बाद वह शाम को थाना कलेक्टरगंज पहुंचे। हालांकि, उनके आरोप के अनुसार, वहां भी घटना के संबंध में कोई अग्रिम कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। इसी के बाद उन्होंने 14 अक्टूबर 2026 को पुलिस आयुक्त, कानपुर नगर के नाम प्रार्थना पत्र देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

आवेदक ने पुलिस प्रशासन से अनुरोध किया है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जाए और आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, उन्होंने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने तथा अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

संपत्ति विवाद की जांच भी हो सकती है अहम

इस पूरे मामले में संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में वर्ष 2013 के बिल्डर एग्रीमेंट और उसके बाद न्यायालय में चल रहे मुकदमों का उल्लेख किया है। ऐसे में जांच के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों, समझौते की शर्तों और न्यायालय में लंबित मामलों की प्रकृति को समझना भी जरूरी होगा।

इसके अलावा, कथित रूप से पांच लाख रुपये मांगने, तीन दिन की समयसीमा देने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी से जुड़े आरोपों की अलग से जांच की आवश्यकता होगी। पुलिस शिकायत में बताए गए घटनास्थल, संभावित सीसीटीवी फुटेज और कथित प्रत्यक्षदर्शी से जानकारी जुटाकर मामले की परिस्थितियों का सत्यापन कर सकती है।

फिलहाल, शिकायतकर्ता ने पुलिस आयुक्त से कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या जांच की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों को जांच के निष्कर्ष आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी। शिकायतकर्ता को उम्मीद है कि पुलिस प्रशासन उनकी शिकायत पर संज्ञान लेकर आवश्यक कानूनी कदम उठाएगा और उनके परिवार की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान देगा।

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