वाराणसी में सीएम योगी का सपा पर निशाना, बोले- गिरगिट भी सोचता होगा कि इंसान के भेष में हमारी प्रजाति है!
रिपोर्ट – धर्मेंद्र पांडेय
वाराणसी: उत्तर प्रदेश में शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी में आयोजित शिक्षक-स्नातक सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखे राजनीतिक कटाक्ष किए और पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने सपा की तुलना गिरगिट से करते हुए कहा, “गिरगिट भी सोचता होगा कि इंसान के भेष में धरती पर हमारी प्रजाति है!” इसके साथ ही उन्होंने सपा के PDA नारे की नई व्याख्या करते हुए परिवारवाद का आरोप लगाया और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में मतदान करने की अपील की।
सपा की कार्यशैली पर मुख्यमंत्री ने साधा निशाना
वाराणसी में आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के दौरान सपा की राजनीति को निशाने पर रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अपना रुख बदलती है। इसी बात पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने गिरगिट का उदाहरण दिया।
मुख्यमंत्री का यह बयान सपा की राजनीतिक कार्यशैली पर उनकी टिप्पणी के रूप में सामने आया। सम्मेलन में उन्होंने पार्टी की नीतियों, राजनीतिक बयानों और विपक्ष की भूमिका से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उनके संबोधन का प्रमुख उद्देश्य शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं के बीच भाजपा का पक्ष रखना और पार्टी प्रत्याशियों के लिए समर्थन जुटाना रहा।
हालांकि, सपा की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई, यह संबंधित पक्ष के आधिकारिक बयान के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।
माफिया और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी घेरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा पर माफिया तत्वों के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा के नेता माफियाओं के जनाजों पर फातिहा पढ़ते हैं। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने विपक्षी दल की राजनीति को कानून-व्यवस्था के मुद्दे से जोड़ने की कोशिश की।
सीएम योगी ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में अराजकता का माहौल था और लोगों को अपने काम कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने कानून का राज स्थापित करने और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने की दिशा में काम किया है।
मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करते हुए इसे प्रदेश के विकास और आम लोगों के भरोसे से जोड़ा। उनके मुताबिक, सुरक्षित वातावरण विकास कार्यों और नागरिकों के हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
PDA को बताया ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’
मुख्यमंत्री के संबोधन का एक प्रमुख हिस्सा सपा के PDA नारे पर केंद्रित रहा। सपा आम तौर पर PDA का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों से जोड़ती है। वहीं, योगी आदित्यनाथ ने इस संक्षिप्त नाम की अपनी राजनीतिक व्याख्या प्रस्तुत करते हुए इसे ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ बताया।
इस टिप्पणी के जरिए मुख्यमंत्री ने सपा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के हितों की बात करती है, लेकिन टिकट वितरण के दौरान परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता देने का आरोप उस पर लगता रहा है।
सीएम योगी ने सपा की कथनी और करनी में अंतर होने की बात भी कही। उनके इस बयान का उद्देश्य विपक्षी दल के सामाजिक न्याय से जुड़े राजनीतिक दावों पर सवाल उठाना था। यह ध्यान रखना जरूरी है कि PDA को लेकर दोनों दलों की राजनीतिक व्याख्याएं अलग-अलग हैं और मुख्यमंत्री की टिप्पणी उनके राजनीतिक आरोप के संदर्भ में देखी जानी चाहिए।
‘बांटोगे तो बिखरोगे’ का संदेश देकर एकता पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि समाज में विभाजन होने पर उसका नुकसान सभी को उठाना पड़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘बांटोगे तो बिखरोगे’ का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश और समाज के विकास के लिए एकता आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच सहयोग और सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने इस संदेश को चुनावी संदर्भ से जोड़ते हुए शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करने की अपील की। सम्मेलन के जरिए उन्होंने मतदाताओं को पार्टी की नीतियों और सरकार के कामकाज के बारे में अपना पक्ष बताया।
भाजपा सरकार में विकास और प्रतिनिधित्व का दावा
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा सरकार समाज के विभिन्न वर्गों के विकास के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाने और उन्हें प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है।
इसके अलावा, उन्होंने पिछली सरकारों पर शिक्षकों और स्नातकों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार इन वर्गों के हितों को प्राथमिकता देती है।
शिक्षक और स्नातक वर्ग का विधान परिषद चुनाव में विशेष महत्व है। ऐसे में इन मतदाताओं से संवाद करना राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जाता है। इसी वजह से सम्मेलन में शिक्षा, प्रतिनिधित्व, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई।
शिक्षक-स्नातक चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज
वाराणसी में आयोजित सम्मेलन को शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव के मद्देनजर भाजपा के जनसंपर्क अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री के संबोधन में जहां सपा की राजनीति और परिवारवाद पर सवाल उठाए गए, वहीं भाजपा सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख भी किया गया।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण के माध्यम से विपक्ष पर राजनीतिक हमला करने के साथ शिक्षक-स्नातक मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में मतदान करने का संदेश दिया। अब चुनावी प्रक्रिया के दौरान विभिन्न दलों की ओर से मतदाताओं तक पहुंचने और अपने मुद्दे सामने रखने की गतिविधियां आगे बढ़ने की संभावना है।

