फतेहपुर में मिशन शक्ति फेज-6: मेधावी छात्रा शालू द्विवेदी बनीं एक दिन की हेड टीचर

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रिपोर्ट – अशोक सिंह 

असोथर/फतेहपुर: उत्तर प्रदेश में बालिका सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिशन शक्ति फेज-6 के तहत परिषदीय विद्यालयों में विशेष गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में फतेहपुर जिले के असोथर विकासखंड स्थित सिधांव विद्यालय की मेधावी छात्रा शालू द्विवेदी को एक दिन के लिए हेड टीचर बनने का अवसर दिया गया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की व्यवस्थाओं का संचालन किया और शैक्षणिक गतिविधियों को करीब से समझा।

यह पहल छात्राओं को केवल पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नेतृत्व करने, निर्णय लेने और अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। विद्यालय में एक दिन की प्रधानाध्यापक बनीं शालू द्विवेदी ने विभिन्न व्यवस्थाओं को समझने के साथ ही शिक्षकों और विद्यार्थियों से संवाद भी किया। कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मबल, जिम्मेदारी और भविष्य में आगे बढ़ने का विश्वास विकसित करना है।

मिशन शक्ति फेज-6 के तहत बालिकाओं को मिला नेतृत्व का अवसर

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रिंसी मौर्या के निर्देशन और खंड शिक्षा अधिकारी गौरव मिश्र के मार्गदर्शन में असोथर विकासखंड के विभिन्न परिषदीय विद्यालयों में यह गतिविधि आयोजित की गई। इसके तहत मेधावी छात्राओं को एक दिन के लिए विद्यालय प्रमुख की भूमिका निभाने का अवसर दिया गया।

इस गतिविधि के माध्यम से छात्राओं को विद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक कामकाज को समझने का मौका मिला। सामान्य तौर पर विद्यार्थी विद्यालय में पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में भाग लेते हैं, लेकिन इस पहल के जरिए उन्हें विद्यालय संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियों को नजदीक से देखने का अवसर भी मिला।

इसके अलावा, छात्राओं को यह समझने में मदद मिली कि विद्यालय की व्यवस्था बनाए रखने, अभिलेखों का रखरखाव करने और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी में किस तरह की जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इस तरह की गतिविधियां बच्चों को जिम्मेदारी लेने और अपने विचार स्पष्ट रूप से रखने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।

शालू द्विवेदी ने समझीं विद्यालय संचालन की जिम्मेदारियां

सिधांव विद्यालय की मेधावी छात्रा शालू द्विवेदी ने एक दिन की हेड टीचर की भूमिका निभाते हुए विद्यालय की विभिन्न व्यवस्थाओं का संचालन किया। इस दौरान उन्होंने अभिलेखों के रखरखाव, शैक्षणिक व्यवस्था के निरीक्षण और शिक्षकों व अन्य विद्यार्थियों से संवाद जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया।

विद्यालय संचालन से जुड़ी इन गतिविधियों के जरिए शालू को यह समझने का अवसर मिला कि एक विद्यालय प्रमुख को प्रतिदिन किन कार्यों पर ध्यान देना होता है। साथ ही, विद्यार्थियों के साथ संवाद बनाए रखना, शैक्षणिक गतिविधियों को व्यवस्थित रखना और विद्यालय के कामकाज पर नजर रखना भी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

इस अवसर पर बालिका शिक्षा और सुरक्षा के महत्व पर भी विचार साझा किए गए। मिशन शक्ति के उद्देश्य के अनुरूप छात्राओं को शिक्षा के प्रति जागरूक रहने, अपनी क्षमता पहचानने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।

प्रधानाध्यापक ने बताया छात्राओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल

सिधांव विद्यालय की प्रधानाध्यापक वसुंधरा सिंह ने बताया कि छात्रा शालू द्विवेदी शुरू से ही मेधावी रही हैं। उन्हें एक दिन के लिए विद्यालय प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपना छात्राओं को नेतृत्व का अनुभव देने की पहल का हिस्सा है।

उन्होंने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियों से छात्राओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने और जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलता है। जब विद्यार्थियों को किसी कार्य का नेतृत्व करने का मौका दिया जाता है, तो वे अपनी बात रखने, समस्याओं को समझने और दूसरों के साथ मिलकर काम करने का अनुभव प्राप्त करते हैं।

हालांकि, नेतृत्व क्षमता का विकास एक निरंतर प्रक्रिया है। ऐसे में विद्यालयों में समय-समय पर आयोजित गतिविधियां छात्राओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास विकसित करने और भविष्य के लक्ष्यों को लेकर सकारात्मक सोच बनाने में भी मदद मिल सकती है।

असोथर विकासखंड के कई विद्यालयों में हुए कार्यक्रम

मिशन शक्ति फेज-6 के तहत यह गतिविधि केवल सिधांव विद्यालय तक सीमित नहीं रही। खंड शिक्षा अधिकारी गौरव मिश्र के मार्गदर्शन में असोथर विकासखंड के कई परिषदीय विद्यालयों में बालिका सशक्तीकरण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इनमें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, असोथर के साथ घाटमपुर, मवइया, प्रेममऊ कटरा, लिलरा, हरनवा, मैकुवापुर, सिधांव, ललौली, कैंथनपुर, जमेनी और कीर्तिखेड़ा के विद्यालय शामिल रहे।

विभिन्न विद्यालयों में आयोजित इन गतिविधियों का प्रमुख उद्देश्य बालिकाओं को नेतृत्व करने का अवसर देना और उनमें शिक्षा, सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इसके साथ ही, छात्राओं को विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया।

बालिका शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर जोर

मिशन शक्ति फेज-6 के तहत आयोजित इस तरह के कार्यक्रम बालिकाओं को अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने और भविष्य में जिम्मेदार भूमिकाएं निभाने के लिए प्रेरित करने का माध्यम हैं। शिक्षा के साथ नेतृत्व, संवाद और निर्णय लेने की क्षमता का विकास भी विद्यार्थियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विद्यालयों में छात्राओं को जिम्मेदारी देने से उन्हें यह समझने का अवसर मिलता है कि वे भी विभिन्न व्यवस्थाओं का संचालन कर सकती हैं। इसके साथ ही, बालिका सुरक्षा और शिक्षा पर चर्चा से उन्हें अपने अधिकारों तथा उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक होने में मदद मिलती है।

कुल मिलाकर, फतेहपुर के असोथर विकासखंड में मिशन शक्ति फेज-6 के तहत आयोजित इस पहल ने बालिका सशक्तीकरण और नेतृत्व विकास पर ध्यान केंद्रित किया। सिधांव विद्यालय की छात्रा शालू द्विवेदी का एक दिन की हेड टीचर बनना इसी प्रयास का हिस्सा रहा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रिंसी मौर्या के निर्देशन और खंड शिक्षा अधिकारी गौरव मिश्र के मार्गदर्शन में विभिन्न विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों का उद्देश्य छात्राओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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