हरदोई में गोवंश संरक्षण योजना की समीक्षा, CDO ने हरे चारे और आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने पर दिया जोर

2bc2e466-35ea-4397-8d0d-33c3d2038171

रिपोर्ट – संजीव आनंद 

हरदोई: जनपद में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और गोवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को विकास भवन स्थित स्वर्ण जयंती सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) श्रीमती नेहा ब्याडवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गोवंश के भरण-पोषण, हरे चारे की उपलब्धता, चिकित्सा सुविधाओं, डीबीटी और सहभागिता योजना के तहत भुगतान की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही, गोवंश आश्रय स्थलों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और निर्माणाधीन स्थलों का काम समय पर पूरा कराने पर विशेष जोर दिया गया।

मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश की जरूरतों का ध्यान रखा जाए। इसके लिए पर्याप्त हरा चारा, भूसा, स्वच्छ पेयजल और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

स्थायी और अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों की हुई समीक्षा

बैठक में हरदोई जनपद में संचालित स्थायी और अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश की संख्या, उपलब्ध व्यवस्थाओं और संबंधित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई।

इसके अलावा, गोवंश आश्रय स्थलों से जुड़े प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) की प्रगति तथा सहभागिता योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को किए जा रहे भुगतान की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन नियमानुसार किया जाए और भुगतान संबंधी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी न होने पाए।

दरअसल, गोवंश संरक्षण योजना के प्रभावी संचालन के लिए केवल आश्रय स्थल बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां नियमित देखभाल, भोजन, पानी और चिकित्सा की व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए बैठक में व्यवस्थाओं की निगरानी और कमियों को दूर करने पर जोर दिया गया।

चारागाह की भूमि पर हरे चारे की बुवाई के निर्देश

गोवंश आश्रय स्थलों में हरे चारे की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए कि आश्रय स्थलों से संबद्ध चारागाह की भूमि पर उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत हरे चारे की बुवाई कराई जाए।

उन्होंने कहा कि आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश की संख्या और उनकी आवश्यकता के अनुसार चारे की उपलब्धता का आकलन किया जाना चाहिए। इसके बाद उसी आधार पर हरे चारे की बुवाई और आपूर्ति की व्यवस्था की जाए, ताकि पशुओं को नियमित रूप से पर्याप्त पोषण मिल सके।

इसके साथ ही भूसे और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए। गोवंश के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और आश्रय स्थलों में साफ-सफाई बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

हरे चारे की स्थानीय स्तर पर व्यवस्था होने से आश्रय स्थलों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे चारे की उपलब्धता को नियमित बनाए रखने और बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा सकते हैं।

गोबर से खाद और गो-काष्ठ उत्पादन को बढ़ावा

समीक्षा बैठक में गोवंश आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोवंश से प्राप्त उत्पादों के बेहतर उपयोग पर भी चर्चा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने आश्रय स्थलों में उपलब्ध कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत और गो-काष्ठ के उत्पादन की स्थिति की जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन उत्पादों के उत्पादन और उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया, ताकि आश्रय स्थलों में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके।

कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट जैसे उत्पादों का उपयोग जैविक खेती में किया जा सकता है। वहीं, गोबर से तैयार अन्य उत्पादों के व्यवस्थित उत्पादन और उपयोग से स्थानीय स्तर पर संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव है। हालांकि, इसके लिए उत्पादन की गुणवत्ता, उचित भंडारण, उपयोग और संभावित बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बनाना आवश्यक है।

मुख्य विकास अधिकारी का जोर इस बात पर रहा कि गोवंश आश्रय स्थल केवल संरक्षण केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने वाली इकाइयों के रूप में भी विकसित हों। इससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासों को गति मिल सकती है।

निर्माणाधीन आश्रय स्थलों का काम समय पर पूरा करने के निर्देश

बैठक के दौरान निर्माणाधीन गोवंश आश्रय स्थलों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए।

उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों को तय समयसीमा के भीतर पूरा कराया जाए, ताकि जरूरत के अनुसार गोवंश संरक्षण की व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा सके। इसके लिए निर्माण की प्रगति की निगरानी और निर्धारित मानकों के पालन पर ध्यान देना जरूरी है।

साथ ही, निर्माण पूरा होने के बाद आश्रय स्थलों में पानी, चारा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा। इससे नए आश्रय स्थलों का उपयोग व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

नियमित निरीक्षण और निगरानी पर जोर

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि निराश्रित गोवंश का संरक्षण शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए संबंधित अधिकारी गोवंश आश्रय स्थलों का नियमित निरीक्षण करें और वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी रखें।

उन्होंने निर्देश दिए कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों को तत्काल दूर कराया जाए। इसके अलावा, गोवंश के संरक्षण, संवर्धन और कल्याण से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें।

बैठक में पशुपालन विभाग के अधिकारियों, संबंधित खंड विकास अधिकारियों और अन्य विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया।

कुल मिलाकर, हरदोई में आयोजित इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य गोवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना, हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करना रहा। अब संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार व्यवस्थाओं में सुधार करें और गोवंश के संरक्षण तथा देखभाल को प्रभावी बनाएं।

You may have missed