मथुरा में पॉक्सो के 14 मामलों में दोषियों को सजा, एसएसपी श्लोक कुमार के नेतृत्व में तेज हुई पैरवी

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रिपोर्ट: योगेश भारद्वाज

मथुरा। नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई और पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए मथुरा पुलिस द्वारा पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मामलों में पैरवी की जा रही है। उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच जिले में पॉक्सो से जुड़े 14 मामलों में न्यायालय ने दोषियों को सजा सुनाई है। इन मामलों में तीन वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा शामिल है। पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ पॉक्सो कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता अलका उपमन्यु की प्रभावी पैरवी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है।

एसएसपी के निर्देश पर मामलों की नियमित मॉनिटरिंग

एसएसपी श्लोक कुमार के नेतृत्व में पॉक्सो मामलों की विवेचना, साक्ष्य संकलन और न्यायालय में पैरवी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एसएसपी कार्यालय से इन मामलों की प्रगति की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नाबालिगों से जुड़े अपराधों की जांच में लापरवाही न हो और संबंधित मामलों में समयबद्ध तरीके से कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए।

इसके अलावा, पॉक्सो कोर्ट में 476 फाइलें लंबित होने की जानकारी भी सामने आई है। इन मामलों में तेजी लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, लंबित मामलों का निस्तारण न्यायालय की प्रक्रिया, उपलब्ध साक्ष्यों और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर होता है।

जनवरी और फरवरी में चार मामलों में सजा

उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2026 में दो मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। इनमें खुर्द निवासी प्रत्यय मल्लाह को आजीवन कारावास मिला, जबकि नौहझील क्षेत्र के राहुल आदि को 20 वर्ष छह माह की सजा सुनाई गई।

इसी क्रम में फरवरी में भी दो मामलों का फैसला आया। कोसीकलां के करन को तीन वर्ष दो माह और वृंदावन के नमन को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। इन फैसलों से स्पष्ट होता है कि पॉक्सो मामलों में अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्य और न्यायालय के निष्कर्षों के आधार पर अलग-अलग सजाएं निर्धारित की गईं।

मई में गैंगरेप के मामले में पांच दोषियों को सजा

मई माह में भी दो मामलों में न्यायालय ने फैसला सुनाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टाउनशिप क्षेत्र के टसी घाट से जुड़े एक मामले में तीन वर्ष की सजा हुई, जबकि कोसीकलां के रतन और रवि को भी तीन वर्ष का कारावास मिला।

इसके अतिरिक्त, कोसीकलां थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 470/2019 में पॉक्सो कोर्ट-2 के न्यायाधीश बृजेश कुमार ने पांच दोषियों को सजा सुनाई थी। इस मामले में रवि, रामू और पंकज को आजीवन कारावास तथा नीरज और आकिब को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा दी गई। साथ ही जुर्माना भी लगाया गया।

प्रस्तुत विवरण के अनुसार, इस मामले में पीड़िता के पिता, चिकित्सक और विवेचक सहित सात गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने फैसला सुनाया। यह मामला दर्शाता है कि ऐसे संवेदनशील अपराधों में गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण स्थान होता है।

जून और जुलाई में भी सुनाए गए अहम फैसले

जून माह में गोवर्धन क्षेत्र के नीरज सिंह को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। इसके बाद जुलाई में तीन मामलों में न्यायालय ने फैसले दिए।

सुरीर क्षेत्र के दिनेश को 20 वर्ष और इसी क्षेत्र के रिजवान को 20 वर्ष छह माह की सजा मिली। वहीं, टाउनशिप क्षेत्र के सुरजीत को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।

इन फैसलों के साथ पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से मामलों को न्यायालय तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के प्रयासों पर ध्यान गया। हालांकि, प्रत्येक मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और लागू कानून के अनुसार लिया जाता है।

अगस्त और सितंबर में भी दोषियों को सजा

अगस्त माह में वृंदावन क्षेत्र के इम्ताज आदि को पांच वर्ष तथा वृंदावन के ही यदुन शर्मा उर्फ यदराम शर्मा को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।

वहीं, सितंबर में बरसाना के बलराम को 10 वर्ष और कोसीकलां के राहुल को 20 वर्ष के कारावास की सजा मिली। उपलब्ध विवरण के अनुसार, बरसाना के मामले में नाबालिग का वीडियो प्रसारित करने का आरोप था, जबकि कोसीकलां के मामले में नाबालिग को अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म करने का अपराध न्यायालय में सामने आया।

इन मामलों में सुनाई गई सजाएं नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करती हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता अलका उपमन्यु की पैरवी का उल्लेख

पॉक्सो कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता अलका उपमन्यु ने इन मामलों में प्रभावी पैरवी की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने 14 मामलों में पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए न्यायालय में पक्ष रखा। ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष की ओर से कानूनी सहायता, साक्ष्यों की प्रस्तुति और न्यायालय में तथ्यों को स्पष्ट रूप से रखना महत्वपूर्ण होता है।

वहीं, पुलिस की जिम्मेदारी अपराध की निष्पक्ष जांच, साक्ष्य जुटाने और नियमानुसार आरोपपत्र दाखिल करने की होती है। इन दोनों प्रक्रियाओं के समन्वय से मामलों के न्यायिक निस्तारण में सहायता मिलती है।

नाबालिगों की सुरक्षा और समयबद्ध जांच पर जोर

एसएसपी श्लोक कुमार के निर्देशों के तहत पॉक्सो मामलों की प्रगति की समीक्षा किए जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस का उद्देश्य ऐसे मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई को समयबद्ध बनाना है, ताकि पीड़ित पक्ष को न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।

हालांकि, उपलब्ध विवरण में सभी मामलों की गिरफ्तारी, मेडिकल परीक्षण और आरोपपत्र दाखिल करने की समयसीमा का अलग-अलग सत्यापन उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन प्रक्रियाओं से जुड़े दावों का आकलन संबंधित केस रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।

 

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