यूपी में PCS अफसर अब AI और मैक्रो इकोनॉमिक्स भी सीखेंगे, 4 चरणों में होगी ट्रेनिंग – जानिए कब से,,,

417de56c-5f02-485a-ba66-1078aef3b59e

रिपोर्ट – अनुग्रह देवी 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के अधिकारियों की प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से नई प्रशिक्षण नीति निर्धारित की है। इसके तहत अधिकारियों को पारंपरिक प्रशासनिक विषयों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मैक्रो इकोनॉमिक्स जैसे आधुनिक विषयों की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अधिकारियों के प्रशिक्षण को उनकी सेवा अवधि और जिम्मेदारियों के अनुरूप अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को वर्तमान प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

चार चरणों में दिया जाएगा प्रशिक्षण

नई प्रशिक्षण व्यवस्था के तहत राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित नए PCS अधिकारियों को कुल 12 महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण चार चरणों में पूरा होगा। इसमें कक्षा आधारित पढ़ाई के साथ जिला प्रशासन के विभिन्न कार्यालयों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव भी शामिल रहेगा।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को सरकारी नियमों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, राजस्व व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विकास योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, AI जैसी तकनीक के इस्तेमाल से संबंधित विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।

इस व्यवस्था में केवल नए अधिकारियों पर ही ध्यान नहीं दिया गया है। बल्कि, सेवा में पांच और दस वर्ष पूरे कर चुके अधिकारियों के लिए भी मिड-कैरियर प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि वे अपने अनुभव और पद की जरूरतों के अनुसार नई क्षमताएं विकसित कर सकें।

पहले दो महीने होगा फाउंडेशन कोर्स

नई नियुक्ति के बाद PCS अधिकारियों का शुरुआती प्रशिक्षण लखनऊ स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रूपाम) में होगा। इसके अंतर्गत दो महीने का फाउंडेशन कोर्स निर्धारित किया गया है।

इस चरण में लोक प्रशासन, संविधान, प्रमुख कानून संहिताओं, राजस्व, निर्वाचन व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही अधिकारियों को सेवा नियमों, बजट, वित्तीय स्वीकृति और कोषागार से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी जाएगी।

आज के प्रशासनिक कामकाज में आंकड़ों का विश्लेषण भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। इसलिए प्रशिक्षण में डेटा विश्लेषण और AI से संबंधित जानकारी को शामिल करना अधिकारियों के लिए उपयोगी हो सकता है। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े आंकड़ों को समझने में मदद मिल सकती है।

व्यावसायिक प्रशिक्षण में कानून और राजस्व पर जोर

फाउंडेशन कोर्स के बाद अधिकारियों को दो महीने के व्यावसायिक प्रशिक्षण के पहले चरण से गुजरना होगा। इस दौरान राजस्व कानून, कानून-व्यवस्था, सरकारी योजनाओं और प्रबंधन से जुड़े विषयों पर जानकारी दी जाएगी।

इसके बाद छह महीने तक जिला प्रशासन के विभिन्न कार्यालयों में कार्य के दौरान प्रशिक्षण होगा। इस अवधि में अधिकारियों को प्रशासनिक कामकाज को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। जिला स्तर पर राजस्व, जनसमस्याओं के निस्तारण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन जैसी जिम्मेदारियों को समझना इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा।

इसके बाद अंतिम दो महीने के व्यावसायिक प्रशिक्षण में राजस्व वादों, न्यायिक आदेश लिखने, निर्वाचन प्रक्रिया और कानूनों के व्यावहारिक इस्तेमाल पर ध्यान दिया जाएगा। इस प्रकार प्रशिक्षण में सैद्धांतिक जानकारी के साथ वास्तविक प्रशासनिक परिस्थितियों से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।

पांच साल की सेवा पूरी करने वालों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

नई नीति में पांच वर्ष की सेवा पूरी कर चुके PCS अधिकारियों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है। जानकारी के अनुसार, सेवा के छठे से नौवें वर्ष के बीच अधिकारियों को चार सप्ताह का मिड-कैरियर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इसका उद्देश्य उन अधिकारियों को आगे की जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना है, जिन्हें नगर मजिस्ट्रेट, अपर जिलाधिकारी (ADM), अपर नगर आयुक्त या चीनी मिल के महाप्रबंधक जैसे पदों पर काम करना पड़ सकता है।

इस प्रशिक्षण में सार्वजनिक नीति, परियोजना प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण, वित्तीय प्रबंधन और ग्रामीण एवं शहरी विकास जैसे विषय शामिल होंगे। साथ ही, AI के उपयोग से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी। इन विषयों का उद्देश्य अधिकारियों को विभिन्न विभागों की प्रशासनिक और प्रबंधकीय जरूरतों से परिचित कराना है।

दस साल की सेवा के बाद भी होगा प्रशिक्षण

नई व्यवस्था के अंतर्गत दस वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों के लिए भी चार सप्ताह का एक अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। यह प्रशिक्षण सेवा के 11वें से 14वें वर्ष के बीच होगा।

इस चरण में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, उद्योग और कृषि से जुड़ी नीतियों का अध्ययन कराया जाएगा। इसके अलावा, तकनीकी नवाचारों और दूसरे राज्यों तथा देशों में अपनाई जाने वाली बेहतर कार्यप्रणालियों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

इस प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों, जैसे राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG) अथवा भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), के सहयोग का प्रावधान बताया गया है। इससे अधिकारियों को प्रशासनिक अनुभव के साथ नई नीतियों और प्रबंधन पद्धतियों को समझने का अवसर मिल सकता है।

AI और मैक्रो इकोनॉमिक्स की पढ़ाई क्यों अहम?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग डेटा विश्लेषण, दस्तावेजों के प्रबंधन और सरकारी सेवाओं की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। हालांकि, प्रशासनिक कामकाज में इसका उपयोग उचित निगरानी, डेटा सुरक्षा और जवाबदेही के साथ होना जरूरी है।

वहीं, मैक्रो इकोनॉमिक्स यानी समष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत महंगाई, रोजगार, आर्थिक विकास, सरकारी खर्च और अर्थव्यवस्था से जुड़े व्यापक विषयों का अध्ययन किया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए इन विषयों की समझ विकास योजनाओं, बजट और सार्वजनिक नीतियों के आर्थिक प्रभावों को समझने में मददगार हो सकती है।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश की नई PCS प्रशिक्षण व्यवस्था में नए अधिकारियों के साथ अनुभवी अधिकारियों की क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया है। अब इस नीति का वास्तविक प्रभाव प्रशिक्षण के क्रियान्वयन और अधिकारियों के दैनिक प्रशासनिक कार्यों में इसके उपयोग से सामने आएगा।

You may have missed