कानपुर राष्ट्रीय शर्करा संस्थान का 91वां स्थापना दिवस 15 अक्टूबर को, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल होंगी मुख्य अतिथि

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रिपोर्ट- अनुग्रह देवी

कानपुर। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (NSI), कानपुर में 15 अक्टूबर 2026 को 91वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विकास एवं शर्करा उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। समारोह के दौरान प्रगतिशील गन्ना किसानों, संस्थान के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही जल संरक्षण और औद्योगिक प्रदूषण की रोकथाम पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी भी आयोजित होगी।

15 अक्टूबर को सुबह 11 बजे शुरू होगा समारोह

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 91वें स्थापना दिवस का आयोजन संस्थान परिसर स्थित ‘शर्करा सौध’ में किया जाएगा। यह स्थान छात्रावास संख्या-1 के सामने स्थित है। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे होगी। समारोह में संस्थान की ऐतिहासिक उपलब्धियों, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी शिक्षा और भारतीय चीनी उद्योग के विकास में इसके योगदान को रेखांकित किया जाएगा।

संस्थान की निदेशक डॉ. सीमा परोहा ने स्थापना दिवस की तैयारियों और संस्थान की ऐतिहासिक यात्रा के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह आयोजन संस्थान की गौरवशाली विरासत को याद करने के साथ-साथ भविष्य की तकनीकी जरूरतों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करेगा।

1936 में हुई थी राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की स्थापना

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान का इतिहास वर्ष 1936 से जुड़ा है। अक्टूबर 1936 में हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (HBTI) के शर्करा अनुभाग को अलग करके ‘इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ शुगर टेक्नोलॉजी’ की स्थापना की गई थी। स्वतंत्रता के बाद इसका नाम बदलकर ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ शुगर टेक्नोलॉजी’ कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 1957 में संस्थान को वर्तमान नाम ‘राष्ट्रीय शर्करा संस्थान’ मिला।

इसके अतिरिक्त, वर्ष 1963 में संस्थान को कल्याणपुर स्थित अपने विस्तृत परिसर में स्थानांतरित किया गया। यह परिसर 525 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है। समय के साथ संस्थान ने शर्करा प्रौद्योगिकी, औद्योगिक अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

चीनी, एथेनॉल और जैव-ऊर्जा क्षेत्र में अहम योगदान

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अधीन संचालित होता है। यह देश के प्रमुख शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों में शामिल है तथा एशिया के अग्रणी शर्करा प्रौद्योगिकी संस्थानों में इसकी पहचान रही है।

संस्थान लंबे समय से चीनी उद्योग के लिए कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने का कार्य कर रहा है। इसके साथ ही एथेनॉल उत्पादन, चीनी उद्योग से प्राप्त सह-उत्पादों और जैव-ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी अनुसंधान एवं परामर्श सेवाएं प्रदान की जाती हैं।

आज चीनी उद्योग के सामने उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा दक्षता में सुधार करने और पर्यावरणीय मानकों का पालन करने जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे में संस्थान की तकनीकी शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके माध्यम से उद्योगों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलती है।

प्रगतिशील गन्ना किसानों और वैज्ञानिकों को मिलेगा सम्मान

स्थापना दिवस समारोह के दौरान प्रगतिशील गन्ना किसानों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। ऐसे किसानों के योगदान को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिन्होंने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों और उन्नत गन्ना किस्मों को अपनाकर प्रति हेक्टेयर उल्लेखनीय पैदावार प्राप्त की है।

दरअसल, गन्ने की खेती में बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत बीज, संतुलित पोषण, सिंचाई की उचित व्यवस्था और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, पानी की बचत और खेती की लागत को नियंत्रित करना भी किसानों के लिए जरूरी है। ऐसे में प्रगतिशील किसानों के अनुभव दूसरे किसानों को आधुनिक पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

इसी क्रम में संस्थान की शैक्षणिक, वैज्ञानिक और अनुसंधान परंपराओं को मजबूत बनाने में योगदान देने वाले पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान संस्थान के विकास में उनके कार्यों और उपलब्धियों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर होगा।

जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

91वें स्थापना दिवस समारोह का एक प्रमुख आकर्षण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के व्यापक चार्टर-2.0 के अंतर्गत ‘जल संरक्षण एवं प्रदूषण की रोकथाम’ विषय पर आयोजित होने वाली एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी।

इस संगोष्ठी में चीनी एवं आसवनी उद्योगों से जुड़े अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों (ETP) के प्रभावी संचालन, जल संरक्षण, उपचारित जल के पुनः उपयोग और शून्य तरल-निष्कासन (ZLD) जैसी व्यवस्थाओं पर चर्चा की जाएगी।

इसके अलावा, औद्योगिक इकाइयों में पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और प्रदूषण को कम करने के व्यावहारिक उपायों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। चीनी मिलों और आसवनी उद्योगों में पानी का उपयोग उत्पादन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए अपशिष्ट जल का उचित उपचार और उसका सुरक्षित पुनः उपयोग जल संसाधनों पर दबाव कम करने में सहायक हो सकता है।

संगोष्ठी का उद्देश्य औद्योगिक प्रदूषण को कम करना, जल संसाधनों का संरक्षण करना और चीनी एवं आसवनी उद्योगों में सतत विकास को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से उद्योगों को पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाने और बेहतर तकनीकी प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

वैज्ञानिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा जोर

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान का 91वां स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि संस्थान की ऐतिहासिक यात्रा, तकनीकी उपलब्धियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को सामने रखने का अवसर भी होगा। एक ओर जहां प्रगतिशील किसानों और वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण पर केंद्रित संगोष्ठी उद्योगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

कुल मिलाकर, यह आयोजन कृषि, तकनीकी शिक्षा, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में संस्थान की भूमिका को रेखांकित करेगा।

 

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