सोनभद्र में मिशन शक्ति के तहत मधुलता कुमारी बनीं एक दिन की प्रधानाध्यापिका, छात्राओं ने संभाली विद्यालय की कमान
रिपोर्ट – ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी
सोनभद्र: महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने तथा नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से कम्पोजिट विद्यालय मूड़ीसेमर में मिशन शक्ति फेज-6 के अंतर्गत विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कक्षा आठ की मेधावी छात्रा मधुलता कुमारी को एक दिन के लिए प्रधानाध्यापिका की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं, विद्यालय की अन्य छात्राओं को शिक्षिका बनकर शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें नेतृत्व, निर्णय लेने और जिम्मेदारी निभाने का व्यावहारिक अनुभव देना था। इस पहल के माध्यम से बालिकाओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि शिक्षा और आत्मविश्वास के बल पर वे भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकती हैं।
मिशन शक्ति के तहत छात्राओं को मिला नेतृत्व का अवसर
मिशन शक्ति फेज-6 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मधुलता कुमारी ने एक दिन की प्रधानाध्यापिका के रूप में विद्यालय की जिम्मेदारियां संभालीं। इस भूमिका के माध्यम से उन्हें विद्यालय के दैनिक संचालन और विभिन्न गतिविधियों को समझने का अवसर मिला।
विद्यालय में नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाना छात्राओं के लिए एक अलग अनुभव रहा। सामान्य दिनों में जिन कार्यों को वे शिक्षकों और विद्यालय प्रशासन के माध्यम से देखती थीं, उन्हें इस दिन स्वयं करने और समझने का अवसर मिला। इससे उनमें आत्मविश्वास के साथ-साथ कार्यों को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने की भावना को प्रोत्साहन मिला।
मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना है। इसी क्रम में विद्यालय स्तर पर इस तरह की गतिविधियां छात्राओं को अपनी क्षमताएं पहचानने और भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करने में मदद कर सकती हैं।
आठ छात्राओं ने शिक्षिका बनकर संभाली जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान रेणु कुमारी, संध्या, बेबी कुमारी, सुप्रिया, प्रिया, सुषमा, साक्षी और नैना कुमारी को शिक्षिका के रूप में कार्य करने का अवसर दिया गया। इन छात्राओं ने विद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक और दैनिक गतिविधियों में भाग लेकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
छात्राओं ने प्रार्थना सभा आयोजित करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने और शिक्षण कार्य सहित विद्यालय की दिनचर्या से जुड़े कार्यों में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्हें अनुशासन बनाए रखने, समय का ध्यान रखने और अन्य विद्यार्थियों के साथ समन्वय स्थापित करने का अनुभव भी मिला।
दरअसल, विद्यालय में इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों को जिम्मेदारी का महत्व समझाने का एक व्यावहारिक माध्यम बन सकती हैं। जब छात्राओं को किसी कार्य की जिम्मेदारी दी जाती है, तो उन्हें योजना बनाने, निर्णय लेने और अपने कार्यों के प्रति जवाबदेह रहने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही, उनमें सहयोग और टीम भावना भी विकसित हो सकती है।
डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती हैं मधुलता
एक दिन की प्रधानाध्यापिका बनीं मधुलता कुमारी ने अपने भविष्य के सपने साझा करते हुए कहा कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती हैं। उन्होंने देश और समाज की सेवा करने को अपना लक्ष्य बताया।
मधुलता की यह आकांक्षा शिक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए नियमित पढ़ाई, मेहनत और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। ऐसे में विद्यालय में मिली यह जिम्मेदारी उनके लिए प्रेरणादायी अनुभव हो सकती है।
वहीं, कार्यक्रम ने अन्य छात्राओं को भी अपने भविष्य के बारे में सोचने और अपने लक्ष्य निर्धारित करने का अवसर दिया। बालिकाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे वे अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं।
प्रभारी प्रधानाध्यापक ने समझाया विद्यालय संचालन का महत्व
कार्यक्रम के दौरान प्रभारी प्रधानाध्यापक राजकमल ने छात्राओं को विद्यालय संचालन से जुड़ी आवश्यक जानकारियां दीं। उन्होंने विभिन्न दायित्वों के निर्वहन और विद्यालय की गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के बारे में समझाया।
इस मार्गदर्शन से छात्राओं को यह जानने का अवसर मिला कि विद्यालय के सुचारु संचालन में अनुशासन, समय प्रबंधन और जिम्मेदारी की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अलावा, शिक्षण कार्य के साथ विद्यार्थियों की उपस्थिति और दैनिक गतिविधियों का प्रबंधन भी विद्यालय की दिनचर्या का अहम हिस्सा है।
इस तरह का अनुभव छात्राओं को शिक्षकों की भूमिका और उनके कार्यों के प्रति समझ विकसित करने में भी मदद कर सकता है। साथ ही, यह उन्हें भविष्य में नेतृत्व से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार होने की प्रेरणा देता है।
पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने विद्यालय परिसर में एक फलदार पौधा भी लगाया। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया गया।
पौधारोपण जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को पर्यावरण के महत्व से जोड़ती हैं। फलदार पौधे भविष्य में छाया और फल देने के साथ परिसर को हरा-भरा बनाने में भी योगदान दे सकते हैं। हालांकि, पौधे के विकास के लिए नियमित देखभाल और समय-समय पर पानी देना आवश्यक है।
इस पहल ने कार्यक्रम को नेतृत्व और शिक्षा के साथ पर्यावरण जागरूकता से भी जोड़ा। इससे छात्राओं को यह संदेश मिला कि समाज के प्रति जिम्मेदारी केवल पढ़ाई या करियर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति की रक्षा करना भी सामूहिक दायित्व है।
शिक्षकों की मौजूदगी में संपन्न हुआ कार्यक्रम
इस अवसर पर शिक्षिका वर्षा मौर्या, मोनिका जैसवाल, सुनीता पाल, अनिल कुमार और अमरेश वर्मा उपस्थित रहे। शिक्षकों की मौजूदगी में छात्राओं ने विद्यालय की गतिविधियों में भाग लिया और विभिन्न जिम्मेदारियों को समझा।
कम्पोजिट विद्यालय मूड़ीसेमर में आयोजित यह पहल बालिकाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास रही। मिशन शक्ति फेज-6 के तहत इस प्रकार के कार्यक्रम छात्राओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, शिक्षा के प्रति प्रेरित होने और भविष्य के लक्ष्यों को लेकर जागरूक बनने का अवसर देते हैं।
कुल मिलाकर, मधुलता कुमारी को एक दिन की प्रधानाध्यापिका बनाना और अन्य छात्राओं को शिक्षिका की भूमिका देना केवल प्रतीकात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि विद्यालयी जीवन में नेतृत्व का अनुभव प्रदान करने का प्रयास है। ऐसे अवसर बालिकाओं को आगे बढ़ने, अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

