कानपुर के घाटमपुर मां भद्रकाली धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, चौथे दिन होगा भव्य दीपदान
रिपोर्ट – शुभम साहू
कानपुर: शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मंगलवार को कानपुर नगर के घाटमपुर क्षेत्र स्थित प्राचीन सिद्धपीठ मां भद्रकाली धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भदरस गांव में स्थित इस मंदिर में सुबह से ही माता के दर्शन और पूजन के लिए भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में माथा टेककर चुनरी, नारियल और फूल-माला अर्पित की। साथ ही, परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। दिनभर मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंजता रहा और आसपास का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
नवरात्रि के अवसर पर मंदिर को फूलों, आकर्षक झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। इसके अलावा, मंदिर के आसपास पूजा सामग्री, प्रसाद, फूल-माला और खिलौनों की दुकानें भी सजी हुई हैं। इससे धाम में मेले जैसा माहौल दिखाई दे रहा है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, आगामी धार्मिक आयोजनों को लेकर भी भक्तों में उत्साह बना हुआ है।
चौथे दिन हजारों दीपों से जगमगाएगा मां भद्रकाली धाम
नवरात्रि के चौथे दिन मां भद्रकाली धाम में भव्य दीपदान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार, इस अवसर पर बड़ी संख्या में दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर को सजाने की तैयारी की जा रही है। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है।
दीपदान भारतीय धार्मिक परंपराओं में आस्था और शुभता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे आयोजनों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दीप जलाकर पूजा-अर्चना करते हैं। मां भद्रकाली धाम में भी दीपदान को लेकर तैयारियां की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालु धार्मिक वातावरण में शामिल हो सकें।
इसके साथ ही, दशहरे के अवसर पर मंदिर प्रांगण में रावण दहन का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है। इस आयोजन को देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। हालांकि, इस वर्ष के कार्यक्रमों के विस्तृत समय और अन्य व्यवस्थाओं की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर श्रद्धालुओं को उससे अवगत कराया जा सकता है।
करीब 200 वर्ष पुराना है मां भद्रकाली धाम
कानपुर नगर के घाटमपुर कस्बे से करीब एक किलोमीटर दूर भदरस गांव में स्थित मां भद्रकाली धाम को क्षेत्र के प्राचीन धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सिद्धपीठ करीब 200 वर्ष पुराना है। लंबे समय से यह मंदिर आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
ग्रामीणों के बीच प्रचलित मान्यता के अनुसार, यहां मां काली की प्रतिमा धरती से स्वयं प्रकट हुई थी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने इस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया। समय के साथ यह स्थान धार्मिक पहचान प्राप्त करता गया और नवरात्रि जैसे पर्वों पर यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है।
मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं स्थानीय लोगों की आस्था का हिस्सा हैं। हालांकि, मंदिर की स्थापना और प्रतिमा के प्रकट होने से जुड़ी कथाओं की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें स्थानीय परंपरा और मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मुख्य प्रतिमा के पीछे स्थापित हैं 12 देवी प्रतिमाएं
मां भद्रकाली धाम की एक विशेषता मुख्य प्रतिमा के पीछे स्थापित 12 देवी प्रतिमाएं भी हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालु मां भद्रकाली के दर्शन करने के साथ इन प्रतिमाओं के समक्ष भी पूजा-अर्चना करते हैं।
नवरात्रि के दौरान देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसी कारण मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्त श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं। धार्मिक पर्व के चलते मंदिर परिसर में सुबह से शाम तक चहल-पहल बनी हुई है।
वहीं, मंदिर के आसपास लगी दुकानों से श्रद्धालु पूजा सामग्री, प्रसाद और अन्य आवश्यक वस्तुएं खरीद रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। त्योहार के दौरान मंदिर आने वाले लोगों के लिए यह स्थान धार्मिक दर्शन के साथ पारंपरिक मेले जैसा अनुभव भी प्रदान करता है।
सुबह की पूजा और माता के स्वरूप को लेकर प्रचलित हैं मान्यताएं
मां भद्रकाली धाम से जुड़ी कई मान्यताएं क्षेत्र में लंबे समय से प्रचलित हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सुबह मंदिर की साफ-सफाई होने के बावजूद माता को फूल-माला चढ़ी हुई मिलती है। श्रद्धालु इसे माता की विशेष कृपा के रूप में देखते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, पहले गड़ी बाबा नाम के एक बाबा यहां पूजा-अर्चना किया करते थे। हालांकि, सुबह सबसे पहले पूजा होने से जुड़ी इस मान्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे स्थानीय लोगों के विश्वास और परंपरा के रूप में ही समझना उचित है।
इसके अलावा, श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता भी प्रचलित है कि मां दिन में तीन बार अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देती हैं। इन धार्मिक विश्वासों के चलते मंदिर का क्षेत्रीय महत्व बना हुआ है और नवरात्रि के दौरान यहां विशेष रूप से भक्त पहुंचते हैं।
नवरात्रि में बढ़ी श्रद्धालुओं की आवाजाही
शारदीय नवरात्रि के चलते मां भद्रकाली धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। मंदिर की सजावट, पूजा-अर्चना और आसपास सजी दुकानों के कारण परिसर में उत्सव जैसा माहौल है। इसके अलावा, चौथे दिन प्रस्तावित दीपदान कार्यक्रम को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं।
दशहरे पर होने वाला रावण दहन भी मंदिर परिसर के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। ऐसे में आगामी दिनों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। भक्तों के लिए यह समय पूजा-अर्चना, धार्मिक परंपराओं और सामूहिक आयोजनों में शामिल होने का अवसर है।
रिपोर्ट: शुभम साहू, घाटमपुर
कुल मिलाकर, भदरस गांव स्थित मां भद्रकाली धाम शारदीय नवरात्रि के दौरान आस्था और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अब श्रद्धालुओं की नजर चौथे दिन होने वाले भव्य दीपदान और दशहरे पर आयोजित होने वाले रावण दहन कार्यक्रम पर है।

