बस्ती में NHM संविदा कर्मचारी संघ के मंडल अध्यक्ष डॉ. वीके वर्मा नजरबंद, लखनऊ जा रहे थे आंदोलन में शामिल होने
रिपोर्ट – राकेश गिरी
बस्ती: उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) संविदा कर्मचारी संघ के मंडल अध्यक्ष डॉ. वीके वर्मा और डॉ. दिनेश सिंह कुशवाहा को सोमवार को नगर पुलिस ने गोटवा स्थित पटेल एसएमएच हॉस्पिटल में नजरबंद कर दिया। दोनों स्वास्थ्यकर्मी अपनी मांगों के समर्थन में लखनऊ में आयोजित आंदोलन में हिस्सा लेने जा रहे थे। इस कार्रवाई के बाद संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की मांगों और आंदोलन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
डॉ. वीके वर्मा के अनुसार, संविदा स्वास्थ्यकर्मी लंबे समय से नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा समेत अन्य मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इन मांगों को लेकर जनपद के लगभग 1,100 संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने तीन दिनों तक कार्य बहिष्कार किया और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। इसके बावजूद जब उनकी मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया।
लखनऊ में आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे स्वास्थ्यकर्मी
संघ के मंडल अध्यक्ष डॉ. वीके वर्मा और डॉ. दिनेश सिंह कुशवाहा सोमवार को लखनऊ में प्रस्तावित आंदोलन में भाग लेने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान नगर पुलिस ने उन्हें गोटवा स्थित पटेल एसएमएच हॉस्पिटल में नजरबंद कर दिया। संघ की ओर से इस कार्रवाई को आंदोलन में शामिल होने से रोकने के रूप में देखा जा रहा है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि संविदा कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सेवा सुरक्षा और वेतन संबंधी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसलिए वे अपनी मांगों के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि, पुलिस की ओर से नजरबंदी की कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में कार्रवाई के कारणों और संबंधित प्रशासनिक निर्देशों की पुष्टि के लिए पुलिस का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
तीन दिन तक कार्य बहिष्कार और सीएमओ कार्यालय पर धरना
डॉ. वीके वर्मा के मुताबिक, बस्ती जनपद के करीब 1,100 संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर तीन दिनों तक कार्य बहिष्कार किया था। इस दौरान कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर अपनी समस्याओं को उठाया।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन और सेवा सुरक्षा शामिल हैं। इसके अलावा, वे अपनी अन्य लंबित मांगों पर भी निर्णय चाहते हैं। संघ का कहना है कि संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी की स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं बनी रहती हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में संविदा कर्मियों की भूमिका को देखते हुए कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करे। उनका तर्क है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के भविष्य और कार्य परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
12 अक्टूबर को लखनऊ में धरना देने की बात
डॉ. वर्मा ने बताया कि स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार के बावजूद मांगों पर समाधान नहीं होने के कारण 12 अक्टूबर को लखनऊ में धरना दिया गया। संघ के अनुसार, प्रदेश स्तर पर आंदोलन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
संघ की रणनीति के तहत कर्मचारी अपनी मांगों को चरणबद्ध तरीके से उठाना चाहते हैं। डॉ. वर्मा का कहना है कि आंदोलन को प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा। उनका दावा है कि जब तक मांगों पर न्यायोचित निर्णय नहीं होता, तब तक कर्मचारियों का संघर्ष जारी रहेगा।
इस बीच, नजरबंदी की घटना ने आंदोलन में शामिल होने जा रहे कर्मचारियों की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारी पक्ष का कहना है कि उन्हें अपनी मांगें रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर, नजरबंदी से जुड़े पुलिस के आधिकारिक कारण सामने आने के बाद ही इस कार्रवाई की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
डॉ. वीके वर्मा बोले—समस्याओं का समाधान करे सरकार
डॉ. वीके वर्मा ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उन्हें आंदोलन करने से रोकने जैसी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग दोहराते हुए कहा कि कर्मचारी अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
उनके अनुसार, संविदा स्वास्थ्यकर्मी अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में सरकार और संबंधित विभागों को कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर समाधान का रास्ता निकालना चाहिए। इससे कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
डॉ. वर्मा ने स्पष्ट किया कि जब तक कर्मचारियों की न्यायोचित मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक प्रदेश नेतृत्व के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।
संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की मांगों पर फैसले का इंतजार
बस्ती में हुई इस घटना के बाद अब संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की मांगों पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग के रुख पर नजर रहेगी। कर्मचारियों की प्रमुख अपेक्षा है कि नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन और सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
फिलहाल, डॉ. वीके वर्मा और डॉ. दिनेश सिंह कुशवाहा को नजरबंद किए जाने की घटना तथा संविदा कर्मचारियों की मांगें इस पूरे मामले के प्रमुख पहलू हैं। आगे आंदोलन की दिशा क्या होगी, यह प्रदेश नेतृत्व के फैसले और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। वहीं, नजरबंदी की कार्रवाई पर पुलिस का पक्ष सामने आने से घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

