मेरठ के ऐतिहासिक विश्वनाथ महादेव मंदिर का होगा जीर्णोद्धार, डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने संभाली कमान

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रिपोर्ट – मनीष पाराशर 

मेरठ: 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में मेरठ के श्री विश्वनाथ महादेव मंदिर, छत्ता अनन्तराम, गुजरी बाजार के जीर्णोद्धार की पहल की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासनिक मुखिया के रूप में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के तहत मंदिर की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया गया है। वरिष्ठ नेता डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने इस पहल की जानकारी देते हुए कहा कि मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ-साथ यहां से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

मंदिर परिसर में आवश्यक मरम्मत, छत को ठीक कराने और रंगाई-पुताई का काम प्रारंभ कर दिया गया है। इसके अलावा, मंदिर के वर्तमान स्वरूप को अधिक व्यवस्थित और भव्य बनाने की योजना भी तैयार की जा रही है। डॉ. वाजपेयी के अनुसार, लगभग एक महीने के भीतर मंदिर की रूपरेखा और दशा में बदलाव लाने का लक्ष्य रखा गया है।

1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

मेरठ का श्री विश्वनाथ महादेव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था। खुदाई के दौरान भूगर्भ से शिवलिंग प्रकट होने की मान्यता के कारण इसे मेरठ के पांच प्रमुख प्राचीन शिवालयों में विशिष्ट स्थान प्राप्त है।

इस मंदिर का संबंध 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम की घटनाओं से भी जोड़ा जाता है। बताया जाता है कि महान क्रांतिकारी नाना साहब पेशवा धुंधु पंत के संगठन और योजना से जुड़ी गतिविधियों में इस स्थान की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। मंदिर के पुजारी पंडित हरिदास जी के बारे में भी उल्लेख मिलता है कि वे साधु के वेश में रहकर क्रांति का संदेश फैलाते थे।

इस प्रकार, मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि मेरठ की ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल भी है। इसी विरासत को ध्यान में रखते हुए जीर्णोद्धार के साथ ऐतिहासिक जानकारी को संरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।

ऐतिहासिक पीपल के पेड़ से जुड़ी हैं स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियां

मंदिर परिसर में मौजूद एक प्राचीन पीपल के पेड़ का उल्लेख भी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में किया जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस पेड़ का संबंध उस दौर में क्रांतिकारियों को फांसी दिए जाने की घटनाओं से रहा है। हालांकि, इस ऐतिहासिक विवरण की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अभिलेखीय या पुरातात्विक स्रोतों का उल्लेख उपलब्ध नहीं कराया गया है।

आज भी प्रत्येक वर्ष 10 मई को मंदिर परिसर में प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। इस अवसर पर स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करने के साथ उनके संघर्ष और बलिदान से जुड़ी स्मृतियों को जीवित रखने का प्रयास किया जाता है।

डॉ. वाजपेयी ने भी मंदिर के जीर्णोद्धार को ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि इस पहल के माध्यम से धार्मिक स्थल को व्यवस्थित करने के साथ स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को याद करने का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार, ऐसे ऐतिहासिक स्थान युवाओं को देश के अतीत और स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में जानने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

1973 में गठित हुई थी मंदिर जीर्णोद्धार समिति

मंदिर के संरक्षण और विकास के प्रयास पहले भी किए जा चुके हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1973 में श्री विश्वनाथ महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार के उद्देश्य से मंदिर समिति का गठन किया गया था। इसके बाद वर्ष 1974 में अनंत श्री विभूषित ज्योतिषीपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज ने मेरठ के अपने प्रथम आगमन के दौरान इसी शिवालय में भगवान शिव की आराधना की थी।

यह प्रसंग मंदिर की धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण विवरण माना जाता है। अब नई पहल के तहत मंदिर की मरम्मत और सौंदर्यीकरण के माध्यम से परिसर को बेहतर स्वरूप देने की योजना बनाई गई है।

इसके साथ ही, मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को व्यवस्थित रूप से सामने लाने और स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे मंदिर की धार्मिक पहचान के साथ उसकी ऐतिहासिक भूमिका को भी प्रमुखता मिल सकती है।

मंदिर के शिखर को भव्य बनाने की योजना

डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के अंतर्गत वर्तमान शिखर को अधिक ऊंचा और भव्य स्वरूप देने की योजना है। उन्होंने कहा कि लगभग एक महीने के भीतर मंदिर की दशा और रूपरेखा में बदलाव लाने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर परिसर में साल में एक या दो बार स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इन आयोजनों के माध्यम से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े नायकों के योगदान को याद किया जाएगा और लोगों को उनके इतिहास से परिचित कराया जाएगा।

डॉ. वाजपेयी ने कहा कि मंदिर का जीर्णोद्धार दो उद्देश्यों को पूरा करेगा। एक ओर धार्मिक स्थल की मरम्मत और विकास होगा, वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों की स्मृतियों को सम्मान देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने उस दौर के वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों की पहचान से ऊपर देश की आजादी का लक्ष्य था।

जीर्णोद्धार के शुभारंभ पर मौजूद रहे कई गणमान्य लोग

मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के शुभारंभ के अवसर पर राजकिशोर रस्तोगी, विवेक वाजपेयी, नरेंद्र उपाध्याय, संजय शर्मा, रिजवान, राजीव काले, बलराज गुप्ता, आकाश धवन, रविंद्र कौशिक, कुलदीप वाल्मीकि, संदीप रेवड़ी, गौरव शर्मा, निशांत धवन, विजय गुप्ता, आदित्य नागर, शादाब, विकास मित्तल, नितिन गोस्वामी, शिवा वैद्य और राकेश ठाकुर सहित कई कार्यकर्ता तथा गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, मेरठ के श्री विश्वनाथ महादेव मंदिर का प्रस्तावित जीर्णोद्धार धार्मिक स्थल के रखरखाव और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक पहल है। मंदिर की मरम्मत, शिखर के विकास और स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना के जरिए स्थानीय इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। अब इस योजना की समयबद्ध प्रगति और ऐतिहासिक तथ्यों के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।

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