बांदा में सड़क निर्माण के दौरान काले धुएं से हो रही परेशानी, PWD के काम और प्रदूषण नियंत्रण पर उठे सवाल

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रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा 

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा शहर में सड़क सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्य के दौरान उठे काले धुएं को लेकर स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने चिंता जताई है। अशोक की लाट से क्योटरा मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में डामर बिछाने के दौरान मशीनरी से धुआं निकलने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धुएं के कारण राहगीरों, दुकानदारों और आसपास मौजूद लोगों को परेशानी हुई। इस घटना ने सड़क निर्माण की प्रक्रिया, पर्यावरणीय सावधानियों और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय स्तर पर यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि नवरात्रि पर्व को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, धुएं में मौजूद प्रदूषकों की वास्तविक मात्रा, उनके स्रोत और नियमों के संभावित उल्लंघन की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

अशोक की लाट से क्योटरा मार्ग पर निर्माण के दौरान उठा धुआं

स्थानीय लोगों के अनुसार, रविवार को कलेक्ट्रेट के सामने, संकट मोचन मंदिर से अशोक की लाट और बार कार्यालय मार्ग की ओर चल रहे सड़क सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान काफी मात्रा में काला धुआं दिखाई दिया। बताया गया कि सड़क पर डामर या तारकोल की परत बिछाने के लिए सामग्री को गर्म किया जा रहा था। इस दौरान मशीनरी से निकलने वाले धुएं ने आसपास के क्षेत्र में लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि धुएं के कारण कुछ समय तक आसपास के वातावरण में परेशानी महसूस हुई। वहीं, सड़क किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों ने भी अपनी चिंता जताई। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान उड़ने वाले कण और धुआं खुले में रखे खाद्य पदार्थों पर जम सकते हैं। ऐसे में फल, सब्जी, मिठाई, चाय और पान की दुकानें चलाने वाले लोगों के लिए खाद्य सामग्री की स्वच्छता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, खाद्य पदार्थों पर प्रदूषक कणों की मात्रा या किसी स्वास्थ्य प्रभाव की पुष्टि के लिए निरीक्षण और आवश्यक परीक्षण की जरूरत होगी।

सांस और आंखों में परेशानी की शिकायत

स्थानीय लोगों के मुताबिक, निर्माण स्थल के आसपास मौजूद कुछ राहगीरों और दुकानदारों ने आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में असुविधा जैसी शिकायतें कीं। यदि निर्माण कार्य के दौरान धुआं अधिक मात्रा में निकलता है, तो वह आसपास के लोगों के लिए असुविधा पैदा कर सकता है। इसलिए ऐसे काम करते समय मशीनरी की स्थिति, तापमान नियंत्रण और धुएं को कम करने के उपायों पर ध्यान देना जरूरी है।

इसके साथ ही, निर्माण स्थल के आसपास खाद्य सामग्री बेचने वालों को भी आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए। खुले खाद्य पदार्थों को ढककर रखना और धूल-धुएं से बचाव के उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है। दूसरी ओर, निर्माण कार्य कराने वाली संस्था की जिम्मेदारी है कि काम के दौरान लोगों की सुरक्षा और आसपास के वातावरण को ध्यान में रखकर व्यवस्था की जाए।

डामर कार्य में पर्यावरणीय सावधानियों पर जोर

सड़क निर्माण में डामर और हॉट-मिक्स सामग्री का इस्तेमाल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, सामग्री को गर्म करने और मिश्रण तैयार करने के दौरान धुआं तथा अन्य उत्सर्जन हो सकते हैं। इनका स्तर इस्तेमाल की जा रही तकनीक, ईंधन, तापमान और मशीनरी के रखरखाव पर निर्भर करता है।

इसीलिए निर्माण कार्य में लागू पर्यावरणीय नियमों और तकनीकी मानकों का पालन महत्वपूर्ण है। यदि किसी स्थान पर सामग्री तैयार करने के दौरान अत्यधिक धुआं निकल रहा हो, तो संबंधित विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर मशीनरी की स्थिति, कार्यस्थल की व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों का निरीक्षण किया जा सकता है।

स्थानीय लोगों ने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने की अपेक्षा जताई है। हालांकि, संबंधित विभाग की ओर से निरीक्षण या कार्रवाई के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह कहना उचित नहीं होगा कि विभाग ने शिकायत पर कार्रवाई नहीं की या निर्माण कार्य में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित हो चुका है।

निर्माण की गुणवत्ता और बजट को लेकर भी नाराजगी

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने सड़क सौंदर्यीकरण कार्य की गुणवत्ता तथा निर्माण की गति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि काम अपेक्षित रफ्तार से नहीं हो रहा है और निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

हालांकि, निर्माण कार्य की वास्तविक लागत, बजट के उपयोग और सामग्री की गुणवत्ता से जुड़े आरोपों की पुष्टि के लिए विभागीय अभिलेखों, तकनीकी परीक्षण और आधिकारिक जानकारी की आवश्यकता होगी। यदि गुणवत्ता को लेकर शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण और सामग्री की जांच कराई जा सकती है।

पुरानी सड़कों की स्थिति पर भी उठ रहे सवाल

बांदा जिले में कुछ अन्य प्रमुख सड़कों की स्थिति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आती रही हैं। इनमें कालू कुआं चौराहा और बांदा-नरैनी-कालिंजर, नरैनी-अतर्रा तथा बांदा-कबरई मार्ग शामिल हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इन मार्गों के कुछ हिस्सों में गड्ढे और उखड़ी हुई गिट्टियां वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा करती हैं।

लोगों की मांग है कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की नियमित तकनीकी जांच हो, ताकि निर्धारित मानकों के अनुरूप काम सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि, इन सभी मार्गों की वर्तमान स्थिति, निर्माण की अवधि और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की पुष्टि के लिए अलग-अलग निरीक्षण रिपोर्ट तथा विभागीय रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

प्रशासन और PWD से पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा

बांदा में सड़क निर्माण के दौरान काले धुएं को लेकर उठे सवालों के बीच अब संबंधित विभागों से स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा की जा रही है। निर्माण स्थल पर धुआं निकलने के कारण, मशीनरी की स्थिति और पर्यावरणीय सावधानियों की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। साथ ही, यदि खाद्य दुकानों या आसपास के लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई कमी पाई जाती है, तो आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष: बांदा के अशोक की लाट से क्योटरा मार्ग पर सड़क निर्माण के दौरान धुएं की शिकायत ने निर्माण प्रक्रिया और जनस्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर ध्यान आकर्षित किया है। अब जरूरी है कि संबंधित विभाग तथ्यों के आधार पर जांच करें, निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण कराएं और यह सुनिश्चित करें कि शहर के विकास कार्यों के दौरान आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।

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