बांदा में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता शिविर, नुक्कड़ नाटक और पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित
रिपोर्ट – शानू वर्मा
बांदा। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर बांदा के पैरामेडिकल कॉलेज में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम की ओर से जागरूकता शिविर, नुक्कड़ नाटक और पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही, मानसिक रोगों से जुड़े भ्रम, सामाजिक भेदभाव और झिझक को दूर करने का संदेश दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक तनाव, चिंता या भावनात्मक परेशानी महसूस होती है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उचित परामर्श और विशेषज्ञों की सहायता लेनी चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना कार्यक्रम का उद्देश्य
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना और मानसिक समस्याओं के बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन समस्याओं को कमजोरी समझना या उनसे पीड़ित व्यक्ति के साथ भेदभाव करना उचित नहीं है।
इसके अलावा, लोगों को यह संदेश दिया गया कि मानसिक परेशानी होने पर समय रहते मदद लेना महत्वपूर्ण है। परिवार, मित्रों और समाज का सहयोग किसी व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से उबरने में मदद कर सकता है। इसी क्रम में विद्यार्थियों को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और अपने आसपास के लोगों की भावनाओं को समझने के लिए प्रेरित किया गया।
योग, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या पर दिया जोर
कार्यक्रम में जिला नोडल अधिकारी एनसीडी डॉ. मुकेश पहाड़ी ने मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि योग और प्राणायाम को जीवन का हिस्सा बनाने से तनाव प्रबंधन में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताना और अपनी दिनचर्या में सकारात्मक गतिविधियों को शामिल करना भी जरूरी है।
डॉ. मुकेश पहाड़ी ने मोबाइल फोन के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि तकनीक का जरूरत के अनुसार उपयोग करना चाहिए और अपने दैनिक जीवन में परिवार, सामाजिक गतिविधियों तथा व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए भी पर्याप्त समय निकालना चाहिए।
वर्तमान समय में पढ़ाई, कामकाज और अन्य जिम्मेदारियों के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नियमित व्यायाम, पर्याप्त आराम, सामाजिक मेलजोल और तनाव को नियंत्रित करने के प्रयास मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
मानसिक रोग छिपाएं नहीं, विशेषज्ञ से लें परामर्श
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक गुप्ता ने मानसिक रोगों के प्रति समाज में मौजूद झिझक को दूर करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी को छिपाने के बजाय उसके बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर बिना किसी संकोच के काउंसलिंग करानी चाहिए और विशेषज्ञ से उपचार लेना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मानसिक समस्याओं को समय पर पहचानना और उचित सहायता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। कई बार लोग सामाजिक प्रतिक्रिया या दूसरों की राय के डर से अपनी परेशानी साझा नहीं करते। इसके कारण उन्हें जरूरी मदद मिलने में देरी हो सकती है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य के विषय में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
तनाव प्रबंधन और मानसिक रोगों के लक्षणों की जानकारी
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. रिजवाना हाशमी ने मानसिक रोगों के संभावित लक्षणों, तनाव प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि व्यक्ति के व्यवहार, भावनाओं और दैनिक गतिविधियों में लंबे समय तक बने रहने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से सलाह लेने का संदेश दिया। साथ ही, तनावपूर्ण परिस्थितियों में अपनी भावनाओं को समझने, भरोसेमंद लोगों से बातचीत करने और सकारात्मक गतिविधियों के लिए समय निकालने जैसे उपायों के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल केवल समस्या उत्पन्न होने पर ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनचर्या के दौरान भी जरूरी है। नियमित दिनचर्या और भावनात्मक सहयोग इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आत्महत्या रोकथाम में संवेदनशीलता और सहयोग जरूरी
अनुश्रवण एवं मूल्यांकन अधिकारी नरेंद्र कुमार मिश्रा ने आत्महत्या रोकथाम के विषय पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भावनात्मक परेशानी से गुजर रहे व्यक्ति की बात को संवेदनशीलता के साथ सुनना और उसे सहयोग देना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने लोगों को दूसरों की समस्याओं को गंभीरता से लेने और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित सहायता तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया। किसी व्यक्ति की परेशानी को छोटा समझकर टालने के बजाय उसकी बात ध्यान से सुनना और बिना आलोचना किए सहयोग देना सकारात्मक कदम हो सकता है।
इसके साथ ही कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के विषय में समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया। परिवार, शिक्षण संस्थान और समुदाय मिलकर ऐसा वातावरण तैयार कर सकते हैं, जहां लोग अपनी भावनात्मक परेशानियों को साझा करने में सहज महसूस करें।
टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान साइकियाट्रिक नर्स त्रिभुवन नाथ ने टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सहायता के लिए उपलब्ध इस सुविधा के प्रति जागरूक किया।
टेली-मानस के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता की उपलब्धता के प्रति जागरूक होना जरूरी है। जरूरत के समय उचित माध्यम से मदद लेने की जानकारी होने से लोग समय पर परामर्श प्राप्त करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के प्रति जागरूक रहने और जरूरतमंद व्यक्तियों को उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी देने का संदेश भी दिया गया।
पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मकता
जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, सकारात्मक सोच और सामाजिक सहयोग जैसे विषयों को सामने लाने का प्रयास किया गया।
पोस्टर प्रतियोगिता में स्वस्तिका, शालिनी, खुशी, दिव्यांशी, पलक, काजल निषाद, दीपिका और चांदनी सहित अन्य प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को रचनात्मक गतिविधियों के जरिए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझने और उसका संदेश दूसरों तक पहुंचाने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का संचालन ज्ञान प्रकाश ने किया, जबकि अध्यक्षता पैरामेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष मकबूल अली खान ने की। इस दौरान कॉलेज की डायरेक्टर जरीना खातून, प्रधानाचार्या मोना लिसा होरो, डीपीएम बृजेंद्र साहू, सुपरवाइजर मुन्नालाल, अशोक कुमार, वशी खान और आमिर हाशमी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल, समय पर परामर्श और सामाजिक सहयोग का महत्व समझाया गया। विशेषज्ञों ने जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ मानसिक रोगों से जुड़े भेदभाव को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

