संत कबीर नगर में जानलेवा हमले के मामले में दो दोषियों को 7 साल की सजा

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रिपोर्ट- शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी

संत कबीर नगर। उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में करीब आठ वर्ष पुराने जानलेवा हमले के एक मामले में सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। महुली थाना क्षेत्र के सिकरी गांव में पोखरे पर मछली मारने को लेकर हुए विवाद और मारपीट के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। सत्र न्यायालय ने राम नरेश और राम दरश को 7-7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 11-11 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहे इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया के तहत निर्णय सामने आया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में प्रस्तुत किए गए गवाहों के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी माना।

पोखरे पर मछली मारने को लेकर हुआ था विवाद

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, घटना 3 जनवरी 2018 की शाम करीब 7 बजे की है। सिकरी गांव निवासी राजकुमार पुत्र रामसागर अपने कुछ साथियों के साथ बाजार से वापस घर लौट रहा था। इसी दौरान वह गांव के पोखरे के पास पहुंचा, जहां मछली मारने को लेकर उसका गांव के ही राम नरेश पुत्र भागी और राम दरश पुत्र नरेश से विवाद हो गया।

बताया गया कि शुरुआत में विवाद कहासुनी तक सीमित था, लेकिन बाद में स्थिति गंभीर हो गई। अभियोजन के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर दोनों आरोपियों ने राजकुमार पर हमला कर दिया। इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

हमले में राजकुमार को आई थीं गंभीर चोटें

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के दौरान राजकुमार के सिर, कान, सीने और पीठ सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोटें आई थीं। गंभीर रूप से घायल होने के बाद वह मौके पर गिर गया। घटना की जानकारी मिलने पर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल राजकुमार को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

पहले उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। इसके बाद चिकित्सकों ने उसकी स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया। हालत गंभीर होने पर उसे आगे बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर भेजा गया, जहां उसका कई दिनों तक उपचार चला।

इस घटना के बाद पीड़ित परिवार की ओर से पुलिस को सूचना दी गई और मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

पिता की तहरीर पर दर्ज हुआ था मुकदमा

जानकारी के अनुसार, घायल राजकुमार के पिता रामसागर की तहरीर के आधार पर थाना महुली में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने घटना से जुड़े साक्ष्यों और बयानों को संकलित किया और विवेचना पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया।

मामला सत्र न्यायालय पहुंचने के बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत इसकी सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए कुल 8 गवाहों के बयान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। इसके अलावा घायल के उपचार से संबंधित चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत में रखे गए।

गवाहों और चिकित्सीय साक्ष्यों पर अदालत ने किया विचार

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना की परिस्थितियों, घायल को आई चोटों और आरोपियों की भूमिका से संबंधित तथ्य न्यायालय के समक्ष रखे। वहीं, अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों, चिकित्सीय साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का विस्तृत अध्ययन किया।

सत्र न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद राम नरेश और राम दरश को मामले में दोषी पाया। इसके बाद न्यायालय ने दोनों को 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर 11-11 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। न्यायालय के आदेश के अनुसार, यदि दोनों दोषी निर्धारित अर्थदंड की राशि जमा करने में असमर्थ रहते हैं, तो उन्हें इसके अतिरिक्त 6-6 माह का कारावास भी भुगतना होगा।

आठ साल पुराने मामले में आया फैसला

यह मामला वर्ष 2018 का है और घटना के लगभग आठ वर्ष बाद सत्र न्यायालय का फैसला सामने आया है। इस दौरान मामले की जांच, आरोप-पत्र दाखिल करने और न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हुई। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों और चिकित्सीय दस्तावेजों को सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर रखा गया।

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि अभियोजन की ओर से मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

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