इटावा में अपनों की बेरुखी के बीच 6 दिन तक रहा शव, ‘रक्तदाता समूह’ ने यमुना घाट पर कराया रेखा देवी का अंतिम संस्कार
रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान
इटावा/सैफई। रिश्तों पर सामाजिक धारणाओं और वर्षों पुरानी दूरी का असर कभी-कभी इतना गहरा हो जाता है कि इंसानी संवेदनाएं भी पीछे छूट जाती हैं। इटावा के सैफई से सामने आया रेखा देवी का मामला इसी तरह की एक मर्मस्पर्शी घटना है। 55 वर्षीय रेखा देवी ने उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद भी उन्हें अपने परिजनों का साथ नहीं मिल सका।
बताया गया कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान छह दिनों तक उनका इलाज चला। इसके बाद 7 सितंबर 2026 को दोपहर 12:16 बजे उनका निधन हो गया। पुलिस ने परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन पति, तीन बेटों और बाद में मायके पक्ष की ओर से भी शव की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया गया। ऐसी स्थिति में सामाजिक संस्था ‘रक्तदाता समूह’ के सदस्यों ने आगे बढ़कर रेखा देवी के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद हुई मौत
घटनाक्रम के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को एंबुलेंस कर्मियों ने गंभीर अवस्था में रेखा देवी को उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में भर्ती कराया था। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया गया। हालांकि, कई दिनों तक चले उपचार के बावजूद 7 सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया।
रेखा देवी की मृत्यु के बाद सैफई थाना पुलिस ने उनके परिवार से संपर्क साधने की कोशिश की। पुलिस ने उनके पति शिवनाथ, निवासी ग्राम कनमऊ, थाना दिबियापुर, जनपद औरैया को सूचना दी। उम्मीद थी कि परिवार अंतिम समय में अपने मतभेद भुलाकर उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचेगा। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ।
15 साल पुरानी दूरी बनी बड़ी वजह
परिजनों की ओर से बताया गया कि रेखा देवी करीब 15 वर्ष पहले गांव के ही संजू यादव नामक एक व्यक्ति के साथ घर छोड़कर चली गई थीं। संजू यादव पहले से शादीशुदा बताए गए। इसके बाद रेखा देवी लंबे समय तक परिवार से अलग रहीं।
परिवार के अनुसार, कुछ समय पहले संजू यादव की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद रेखा देवी कहां रह रही थीं और किस परिस्थिति में थीं, इसकी जानकारी उनके पति और बेटों को नहीं थी। वर्षों से चली आ रही इस दूरी और पारिवारिक मतभेद के कारण परिजनों ने उनकी मृत्यु के बाद भी शव स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
जब 10 सितंबर तक परिवार का कोई सदस्य अस्पताल नहीं पहुंचा, तब मामले की जानकारी समाजसेवा से जुड़े ‘रक्तदाता समूह’ तक पहुंची। संस्था के सदस्यों ने परिवार को समझाने और अंतिम संस्कार के लिए आगे आने का अनुरोध किया।
पति और तीनों बेटों ने शव लेने से किया इनकार
रक्तदाता समूह की टीम ने कनमऊ गांव के वर्तमान प्रधान अनमोल यादव से संपर्क किया। प्रधान के माध्यम से रेखा देवी के पति शिवनाथ और उनके तीन बेटों आशीष, गोलू और राधे से संपर्क साधकर उन्हें समझाने का प्रयास किया गया।
बताया गया कि आशीष की उम्र करीब 30 वर्ष, गोलू की 25 वर्ष और राधे की 23 वर्ष है। संस्था के सदस्यों ने परिवार से आग्रह किया कि चाहे जो परिस्थितियां रही हों, लेकिन अंतिम समय में मानवीय संवेदना के नाते रेखा देवी का अंतिम संस्कार परिजनों द्वारा किया जाए। इसके बावजूद पति और तीनों बेटों ने शव स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
मायके पक्ष ने भी नहीं ली अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी
जब ससुराल पक्ष से कोई आगे नहीं आया तो रक्तदाता समूह के सदस्यों ने रेखा देवी के मायके पक्ष से संपर्क किया। जालौन जिले के कुठौंद थाना क्षेत्र के ग्राम बड़ी मड़ैया में रहने वाले उनके पिता महादेव और भाई विजेंद्र को घटना की जानकारी दी गई।
हालांकि, मायके पक्ष ने भी शव लेने से इनकार कर दिया। इस तरह रेखा देवी के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन और समाजसेवियों के सामने आ गई।
इसके बाद सैफई थाना पुलिस ने 10 सितंबर को शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। नियमानुसार शव को 72 घंटे के लिए मोर्चरी में सुरक्षित रखा गया, ताकि यदि कोई वैध परिजन सामने आए तो शव सौंपा जा सके।
परिजनों की तलाश में पुलिस भी पहुंची घर
परिजनों को खोजने के लिए दिबियापुर थाना पुलिस ने भी प्रयास किया। पुलिस जब शिवनाथ के घर पहुंची तो वहां ताला लगा मिला। बताया गया कि उनका मोबाइल फोन भी बंद था। वहीं, रेखा देवी के तीनों बेटों के मोबाइल नंबर भी बंद पाए गए।
इस दौरान रक्तदाता समूह के सदस्यों ने अंतिम स्तर तक परिवार से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया। संस्था के संचालक शरद तिवारी ने वीडियो कॉल के माध्यम से परिजनों को अंतिम संस्कार में शामिल होने का अवसर देने की कोशिश की। हालांकि, परिजनों की ओर से वीडियो कॉल के जरिए भी अंतिम संस्कार में शामिल होने की इच्छा नहीं जताई गई।
72 घंटे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हुआ अंतिम संस्कार
13 सितंबर को शव को सुरक्षित रखने की निर्धारित 72 घंटे की अवधि पूरी हो गई। इस दौरान कोई भी विधिक वारिस शव लेने के लिए सामने नहीं आया। ऐसे में पुलिस और समाजसेवियों ने मिलकर रेखा देवी के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाने का निर्णय लिया।
सैफई थाने की महिला कांस्टेबल नीलम यादव और होमगार्ड कमलेश कुमार की मौजूदगी में रक्तदाता समूह के सदस्यों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। संस्था के सदस्यों ने धार्मिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान के अनुसार रेखा देवी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार इटावा स्थित यमुना घाट पर कराया।
इस दौरान राजीव लोचन दीक्षित, पंकज भदौरिया, विमलेश तिवारी, डॉ. रोहित तिवारी, राजीव नरुका, राजेश दुबे, गोपाल शुक्ला, आदित्य प्रताप, राजेश, सौरभ परिहार और शरद तिवारी समेत संस्था के अन्य सदस्यों ने जिम्मेदारी निभाई।
खून का रिश्ता नहीं, इंसानियत का रिश्ता आया काम
रेखा देवी की कहानी कई सवाल छोड़ जाती है। जीवन में परिस्थितियां कैसी भी रही हों, लेकिन मृत्यु के बाद अंतिम सम्मान हर व्यक्ति का अधिकार है। इस मामले में जब परिवार के सदस्यों ने दूरी बनाए रखी, तब समाजसेवियों ने आगे आकर मानवीय जिम्मेदारी निभाई।
‘रक्तदाता समूह’ के सदस्यों की यह पहल बताती है कि सामाजिक संस्थाएं केवल रक्तदान या जरूरतमंदों की मदद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में मानवीय संवेदनाओं की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

